कफ़ील ख़ान को योगी सरकार ने बर्खास्त किया

    • Author, अनंत झणाणे
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 2 मिनट

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल चिकित्सा विभाग में कार्यरत रहे डॉक्टर कफ़ील ख़ान को बर्खास्त कर दिया है.

बीबीसी को इस फ़ैसले की आधिकारिक पुष्टि प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा के प्रमुख सचिव आलोक कुमार से मिली.

डॉक्टर कफ़ील के मुताबिक़, 6 अगस्त 2021 को सरकार ने हाई कोर्ट को जानकारी दी थी कि वो उनके ख़िलाफ़ दूसरी जाँच वापस ले रही है. उनके मुताबिक़ दूसरी जाँच तब शुरू की गई थी जब पहली जाँच में डॉक्टर कफ़ील को चिकित्सकीय लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोपों में क्लीन चिट मिली थी.

प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने कहा कि "सरकार ने यह कभी नहीं कहा था कि उनके ख़िलाफ़ एक्शन नहीं लेगी. अब तक सरकार ने कोई ऐसा बयान नहीं दिया है."

आलोक कुमार के मुताबिक़ डॉक्टर कफ़ील के ख़िलाफ़ 2017 में ऑक्सीजन की कमी से हुई बच्चों की मौत के मामले में लापरवाही के बड़े आरोप हैं.

आरोपों को विस्तार से बताते हुए आलोक कुमार ने कहा कि, 2017 में जब वो पीडीऐट्रिक वार्ड के इंचार्ज थे. पहला आरोप था कि वो सरकारी डॉक्टर होते हुए प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे थे. जबकि सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकते हैं.

दूसरा आरोप उन पर अपने कर्तव्यों में लापरवाही बरतने का था जिसकी वजह से कुछ बच्चों की मौत हुई. तीसरा आरोप यह था कि उन्होंने समय पर ऑक्सीजन की कमी के बारे में अस्पताल प्रबंधन को जानकारी नहीं दी थी."

डॉक्टर कफ़ील का दावा है कि उन्हें हमेशा अदालतों से न्याय और राहत मिली है.

कल सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में उन्होंने वर्तमान ऑर्डर को ऊंची अदालतों में चुनौती देने की बात कही है.

बीबीसी से बात करते हुए डॉक्टर कफ़ील ने आदेश की टाइमिंग के बारे में सवाल उठाते हुए कहा कि 10 नवम्बर को ही हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई थी लेकिन सरकार ने अदालत को मेरी बर्ख़ास्तगी की कोई जानकारी नहीं दी. और उसी शाम मीडिया को इसकी जानकारी दी गई.

डॉक्टर कफ़ील का दावा है कि डीएम से लेकर प्रमुख सचिव स्तर की जांच में उन्हें क्लीन चिट मिली. हाई कोर्ट ने कहा है कि मेरे ख़िलाफ़ लापरवाही और भ्रष्टाचार के कोई सबूत नहीं हैं, फिर भी मुझे बर्खास्त कर दिया गया.

जाँच में देरी के आरोप के बारे में आलोक कुमार का कहना है कि, "जाँच पूरी होने में थोड़ा वक़्त ज़रूर लगा, लेकिन जाँच पूरी हो गयी थी. जाँच चलने के दौरान उन्हें सस्पेंड भी किया गया."

"उन्होंने कोर्ट से कहा कि मुझे इतने लम्बे समय तक सस्पेंड किया है, जब कि दूसरे लोगों को सरकार ने जाँच पूरी कर फिर से बहाल कर दिया है. लेकिन असल में बात यह है कि जिनको बहाल किया उनकी जाँच पूरी होकर उन्हें सज़ा मिली और उसके बाद उन्हें बहाल किया गया.

क्योंकि कफ़ील का मामला थोड़ा पेंचीदा था तो फिर उनकी जाँच थोड़ी लम्बी खिंच गई. पिछली बार की सुनवाई में कोर्ट के कहने पर जाँच निर्धारित समय में पूरी की गई. सरकार ने सभी क़ानूनी नियमों के तहत और सर्विस कमीशन की इजाज़त के बाद ही यह अंतिम फ़ैसला लिया है."

क्योंकि मामला हाई कोर्ट में लंबित है तो इसकी जानकारी सरकार की तरफ़ से कोर्ट को दे दी गयी है.

इसके अलावा डॉक्टर कफ़ील को आदेश की कॉपी बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माध्यम से सौंपी जाएगी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)