चीन सर्दियों से पहले एलएसी पर अपनी सेना को लेकर हुआ मुस्तैद- प्रेस रिव्यू

चीन

इमेज स्रोत, Getty Images

प्रकाशित

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी पीएलए ने सर्दियों के शुरू होने के साथ ही भारत के साथ विवादित सीमा पर अपने सैनिकों के लिए सुविधाओं को और मज़बूत करना शुरू कर दिया है.

अंग्रेज़ी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के अनुसार, चीन की सरकारी मीडिया के अनुसार, भारत के साथ विवादित सीमा पर लंबे समय से जारी गतिरोध के कारण सेना तैनात है और सर्दियों के मद्देनज़र उनके लिए सुविधाओं को और बेहतर-मज़बूत किया जा रहा है.

पर्यवेक्षकों के हवाले से चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि हालांकि चीन-भारत के बीच सर्दियों में किसी संघर्ष होने की उतनी आशंका तो नहीं है लेकिन छिटपुट झड़पें हो सकती हैं और इस आशंका से इनक़ार नहीं किया जा सकता है. इसलिए पीएलए को पूरी तरह से तैयार रहना चाहिए.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और चीन के बीच जारी गतिरोध को देखते हुए और सर्दियों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए पीएलए रसद आपूर्ति लाइनों को सुव्यवस्थित करने पर ध्यान दे रहा है.

चीन के आधिकारिक सैन्य आउलेट्स के हवाले से हिंदुस्तान टाइम्स ने लिखा है कि हाल की कुछ रिपोर्ट्स में भी इस बात का ज़िक्र किया गया है कि सीमा पर तैनात सैनिकों के लिए परिस्थितियों को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि कठोर सर्द मौसम में भी सैनिक लंबे समय तक तैनात रह सकें. ख़ासकर तब जब तापमान शून्य से भी नीचे चला जाता है.

पिछले सप्ताह पीएलए डेली ने एक रिपोर्ट के हवाले से लिखा था कि सैनिकों के लिए एक ख़ास किस्म की बनियान तैयार की गई है जो तेज़ हवा को रोकने में मददगार साबित हो सकती है.

मौदी

इमेज स्रोत, Ian Forsyth/gettyimages

मोदी सरकार बताए, सांसद निधि के करोड़ों रुपये कहाँ ख़र्च किए: विपक्ष

सांसदों को मिलने वाली स्थानीय विकास निधि एक बार फिर से बहाल कर दी गई है. इस वित्तीय वर्ष में सांसदों को विकास कार्यों के लिए दो करोड़ रुपये दिये जाएंगे और अगले वित्त वर्ष से यह राशि पांच करोड़ हो जाएगी.

कोविड महामारी के दौरान बीते साल सांसदों को मिलने वाली इस राशि को विकास कार्यों के लिए देने के बजाय कोरोना से लड़ने के लिए इस्तेमाल किया गया था. इस योजना को दो वित्तीय वर्षों (2020-2021 और 2021-2022) के लिए स्थगित किया गया था लेकिन अर्थव्यवस्था में सुधार का हवाला देते हुए इसे आंशिक रूप से इसी वर्ष वापस बहाल करने का फ़ैसला किया गया है.

द हिंदू अख़बार के मुताबिक़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी की बैठक में यह फ़ैसला हुआ. बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि - चूंकि अर्थव्यवस्था में अब सुधार हो गया है इसलिए इस स्कीम को दोबारा शुरू किया जा गया है.

अनुराग ठाकुर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "यह बताते हुए मुझे खुशी हो रही है कि चूंकि देश आर्थिक सुधार की राह पर है और कई क्षेत्रों में सकारात्मक वृद्धि भी हो रही है, इसलिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सांसद निधि को बहाल करने का फ़ैसला किया है."

पिछले साल जब इस स्कीम पर रोक लगायी गई थी तब सरकार ने दावा किया था कि इस राशि का इस्तेमाल कोरोना महामारी से लड़ने के लिए किया जाएगा. यह राशि क़रीब 8000 करोड़ रुपये तक होने का दावा था.

हालांकि विपक्ष नेताओं का कहना था कि सरकार ने अभी तक इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है कि सांसद निधि योजना को स्थगित करके जो राशि जमा हुई, उसे कैसे और किस मद के लिए ख़र्च किया गया.

डीएमके के राज्यसभा सदस्य पी विल्सन ने कहा कि केंद्र महामारी के दौरान यह फ़ैसला लिया था. तमिलनाडु में 39 लोकसभा और 18 राज्यसभा सांसद हैं. इसलिए राज्य को सलाना 285 करोड़ रुपये मिलते हैं. यह वो पैसा है जो केंद्र सरकार के पास है.

वहीं आरजेडी नेता मनोज झा का कहना है कि सरकार को इस बारे में विस्तार से जानकारी देनी चाहिए कि उन्होंने सांसद निधि से बचाए धन का किया क्या. द हिंदू अख़बार ने मनोज झा के हवाले से लिखा है कि सरकार को बिना कोई तथ्य छिपाए श्वेत पत्र लाना ताहिए. सवाल यह है कि इस पैसे को ख़र्च कैसे किया गया और इससे महामारी में लोगों को किस तरह मदद की गई.

किसान

इमेज स्रोत, Getty Images

सिंघु बॉर्डर पर पेड़ से लटका मिला किसान का शव

दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बॉर्डर पर बुधवार को एक किसान का शव पेड़ से लटका मिला. बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने पुलिस को सूचित किया.

जनसत्ता अख़बार की ख़बर के अनुसार, मृतक की पहचान गुरप्रीत सिंह के तौर पर की गई है.

पुलिस को शव के पास से कोई भी आत्महत्या का नोट नहीं मिला है. इसलिए मौत के कारण का पता नहीं चल सका है. पुलिस इस मामले में अन्य किसानों से पूछताछ कर रही है.

कोरोना

इमेज स्रोत, Shutterstock

रूस में एक बार फिर कोरोना की लहर, 83 फ़ीसदी कोरोना बेड भरे

रूस में कोविड मरीज़ों की संख्या बढ़ती जा रही है. रूस में कोविड मरीज़ों के लिए बनाए गए लगभग 83 फ़ीसदी बेड भर चुके हैं. रूस के अधिकारियों का कहना है कि रोज़ाना आने वाले नए मामलों की संख्या और संक्रमण के कारण होने वाली मौतें भी हर रोज़ बढ़ रही है.

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, रूस के उप-प्रधानमंत्री तात्याना गोलिकोवा ने एक बैठक में कहा कि कोरोनावायरस रोगियों के लिए आरक्षित 301500 अस्पतालों में से 83फ़ीसदी अस्पताल पूरी तरह भर चुके हैं.

उन्होंने कहा, "अभी तक यह नहीं कहा जा सकता है कि स्थिति नियंत्रण में है या थम चुकी है."

कोरोना टास्क फ़ोर्स ने बुधवार को संक्रमण के कारण 1239 मौतों की पुष्टि की है. साथ ही एक दिन में 38 हज़ार से अधिक मामले भी दर्ज किये गए.

ये भी पढ़ें

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)