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कानपुर के कुरसौली में 13 मौतें, डेंगू के डर से पसरा है सन्नाटाः ग्राउंड रिपोर्ट
- Author, रवि
- पदनाम, कुरसौली से बीबीसी हिंदी के लिए
- प्रकाशित
कानपुर शहर से करीब 13 किलोमीटर दूर कुरसौली गांव इन दिनों उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है.
बीते तीन सप्ताह के दौरान यहां डेंगू या तेज़ बुख़ार से अब तक 13 लोग दम तोड़ चुके हैं. हालांकि ज़िला प्रशासन यह दावा कर रहा है कि गांव में डेंगू से कोई मौत नहीं हुई है.
कानपुर नगर के मुख्य ज़िला चिकित्साधिकारी डा. नैपाल सिंह ने गांव में डेंगू से एक भी मौत से साफ इनकार किया है.
सरकारी दावों के उलट पनकी नहर किनारे बसे इस गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है. बीमारी और मौत के डर के चलते अधिकांश लोग गांव छोड़कर जा चुके हैं.
क़रीब 250 मकान वाले इस गांव में महीने भर पहले वैसे तो 1300 लोग रहा करते थे लेकिन इन दिनों यहां कुछ ही बुजुर्ग और युवा नज़र आते हैं.
गांव के बुजुर्ग राजाराम ने बताया, "गांव के 75 परसेंट लोग गांव को छोड़कर रिश्तदारों और किराए के मकानों पर रहने चले गए हैं. गांव में जो रुके भी हैं वो सिर्फ़ अपने जानवरों और खेतों की देखभाल के लिए ठहरे हुए हैं."
गांव में घुसते सन्नाटा और मायूसी ही मिलती है. प्रशासन के दावों के विपरीत गांव में कई जगहों पर गंदगी फैली नज़र आती है. हालांकि इस गांव की तस्वीर उत्तर प्रदेश के दूसरे गांवों के मुक़ाबले बहुत अच्छी मानी जा सकती है. गांव में सड़कें अच्छी हैं. नालियां बनी हुई हैं.
लेकिन गांव के बाहर अब भी कई जगहों पर बारिश का पानी भरा हुआ है, जिसके निकासी की कोई व्यवस्था नहीं दिखती है. इससे गांव में मच्छरों के पनपने की आशंका और बढ़ गई है.
इसके अलावा गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं थी.
हालांकि गांव के स्वास्थ्य केंद्र के अलावा प्राथमिक स्कूल में भी 12 बेड का हॉस्पिटल तैयार किया गया है. इस स्वास्थ्य केंद्र में एक डॉक्टर समेत तीन लोगों का स्टाफ़ है और एक एम्बुलेंस 24 घंटे उपलब्ध है. लेकिन यहां ना तो डॉक्टर और ना ही सहायक स्टॉफ़ कोई जानकारी देने के लिए तैयार दिखते हैं. हर कोई यही बता रहा है कि 'हमें मीडिया से बात करने की अनुमति नहीं है, आप सीएमओ साब से बात कीजिए.'
हालांकि दिन के समय में लोगों का टेस्ट कराने के लिए आना जारी थी, और दस से बारह लोगों ने अपना टेस्ट कराया.
दरअसल, इस गांव की स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि कानपुर नगर के ज़िलाधिकारी आलोक तिवारी ने एक रात गांव में बितायी जिसके बाद सुस्त पड़ी सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में हलचल दिखी. उनके गांव में रुकने के बाद लोगों की रिपोर्ट डेंगू पॉजिटिव आने लगी है.
गांव के युवा राकेश गौतम ने बताया, "डीएम के आने के बाद स्वास्थ्य विभाग डेंगू पॉजिटिव बताने लगा. नहीं तो अभी तक जिसको बुखार भी आ रहा था, उसकी रिपोर्ट निगेटिव ही बता रहे थे."
स्वास्थ्य विभाग विभाग के मुताबिक गांव में विभिन्न प्रकार के बुखार के कुल 322 मरीज मिले हैं. जिसमें संदिग्ध 196 मामलों के नमूने डेंगू जांच के लिए भेजा गया. इसमें 182 की रिपोर्ट आ चुकी है. इनमें 29 मामले डेंगू के पॉज़िटिव पाए गए हैं.
प्रशासन के मुताबिक इनमें 26 मरीज़ पूरी तरह ठीक हो गए हैं. पूरे मामले में कानपुर नगर के ज़िलाधिकारी आलोक तिवारी ने बताया, "हमलोग लगातार ज़ागरुकता अभियान चला रहे हैं. डेंगू से फ़िलहाल कोई मृत्यु नहीं हुई है."
गांव के लोग बुख़ार आने पर स्वास्थ्य टीम से जांच तो कराते हैं, लेकिन इलाज कराने प्राइवेट हॉस्पिटल का ही रुख़ करते हैं. ग्रामीण सोनी गौतम ने बताया, "मेरी ननद लक्ष्मी आशा बहू थी. उनकी भी मौत बुख़ार से हो गई. चार दिन प्राइवेट में इलाज कराया, लेकिन बच नहीं सकी. सरकार ने कोई मदद नहीं की."
ग्रामीण लगातार डेंगू से मौतों की बात कह रहे हैं. गांव की सोनी ने बताया कि इलाज कराया तो डॉक्टर ने कहा कि प्लेटलेट्स गिर गई हैं. गांव के युवा नवल किशोर ने बताया, "मेरी पत्नी और दोनों बच्चे बीमार हो गए थे. डॉक्टर ने बताया था कि उन्हें डेंगू है. गांव से करीब छह किमी. की दूरी पर मां प्राइवेट नर्सिंग होम है. वहीं पर पूरे परिवार का इलाज कराया. सरकारी हॉस्पिटल में जाते तो मर जाते."
एक अन्य ग्रामीण मोनी देवी ने बताया, "मेरे दो बेटे आर्यन और अमन को बुख़ार आया. कल्याणपुर में सीएचसी जांच कराने गए तो वहां डॉक्टर ने गांव में लगे कैंप में जांच कराने के लिए वापस भेज दिया. मेरे बेटे की नाक से खून आने लगा था. सरकारी हॉस्पिटल में ले जाते तो वो नहीं बच पाता. कर्ज लेकर इलाज कराया. लेकिन बच्चा मेरा सलामत है. बच्चों के इलाज में करीब 45 हजार रुपए ख़र्च हुए."
सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं से नाराज़ गांव के सभी लोग प्राइवेट अस्पताल में ही इलाज करा रहे हैं. सभी का मानना है कि सरकारी अस्पताल में गए तो जान नहीं बच पाएगी. वहां कोई सुनने वाला नहीं होता है. ग्रामीणों ने बताया कि क़रीब 40 से 45 लोग अब भी प्राइवेट अस्पताल में अपना इलाज करा रहे हैं.
बीच में मौतों का सिलसिला कुछ कम हो गया था. इसके बाद कुछ ग्रामीण वापस आना शुरू हो गए थे. बीते शुक्रवार को गांव के प्रधान अमित सिंह के घर में बुख़ार के चलते ख़त्म हो गई. इसके बाद गांव से फिर पलायन शुरू हो गया.
आलम ये है कि गांव की हर गली में 8 से 10 घरों में ताला लटका हुआ है. गांव के बुजुर्ग राजाराम ने बताया, "सभी मरीज़ों को एक ही दवा दी जा रही है. कहा कि जानवरों की देखभाल के लिए गांव में सिर्फ़ बुजुर्ग ही बचे हैं."
पिछले 48 घंटों पहले गांव के चार रोगियों में डेंगू की पुष्टि हुई है. इसके बाद ग्रामीण डरे हुए हैं. स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार गांव में फॉगिंग और दवाओं का छिड़काव कर रही है. कानपुर के कमिश्नर डा. राज शेखर ने बताया, "गांव में पानी का सैंपल लिया जा रहा है. गांव में होने वाली हर एक मौत का ऑडिट भी कराया जा रहा है."
कुरसौली के बाद आसपास के गांवों में भी डेंगू ने पैर पसारना शुरू कर दिया है. एक तरफ़ लोगों को सरकारी व्यवस्था पर भरोसा नहीं हो रहा है दूसरी तरफ़ बीमारी का असर लगातार बढ़ रहा है.
इस पहलू पर कानपुर नगर के सीएमओ डा. नैपाल सिंह ने कहा, 'ग्रामीणों को सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए फोर्स नहीं कर सकते हैं. लेकिन हमलोग लगातार लोगों को अच्छे और फ्री इलाज के बारे में बता रहे हैं.'
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