अफ़ग़ानिस्तान में अग़वा भारतीय को लेकर क्या कर रहा है भारत - प्रेस रिव्यू

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भारत को बताया गया है कि काबुल में जिस अफ़ग़ान हिंदू व्यक्ति का अपहरण किया गया है वो वास्तव में भारतीय है.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने गुरुवार को कहा कि भारत उस व्यक्ति के संबंध में सभी जानकारियों की पुष्टि कर रहा है.

बागची ने कहा, "हमें कहा गया है कि वो भारतीय नागरिक है. हम सभी संबंधितों के संपर्क में हैं. हमने रिपोर्ट देखी हैं कि स्थानीय अथॉरिटी इस मामले की जांच कर रही हैं. हम स्थिति पर नज़र रखना जारी रखेंगे."

अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदू' अपनी रिपोर्ट में लिखता है कि तालिबान के ख़ुफ़िया विभाग ने बुधवार को सीसीटीवी फ़ुटेज की मदद से इस मामले की जांच की.

अख़बार लिखता है कि बागची का बयान इस बात के संकेत देता है कि भारत अप्रत्यक्ष रूप से काबुल में तालिबान के संपर्क में है और अपहृत व्यक्ति बंसारी लाल अरेंदेह की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना चाहता है.

बागची ने इस मामले को बेहद 'संवेदनशील' बताया है.

भारत ने अभी तक तालिबान के साथ अपने संबंध स्थापित नहीं किए हैं हालांकि उसने इच्छा ज़ाहिर की है कि वो अफ़गान लोगों के लिए विकास कार्य जारी रखना चाहता है.

बंसारी लाल काबुल में एक प्रमुख दवा की दुकान चलाते थे जिनका मंगलवार की सुबह अपहरण कर लिया गया था. यह मालूम चला था कि उनको मुक्त करने के लिए बातचीत जारी है.

15 अगस्त को तालिबान के अफ़ग़ानिस्तान पर क़ब्ज़े के बाद अफ़गानिस्तान का मेडिकल सेक्टर लगभग ठप पड़ गया है और अस्पतालों में बुनियादी दवाओं की कमी चल रही है.

अरेंदेह काबुल में ही रह रहे थे और वे उन अफ़ग़ान हिंदुओं और सिख नागरिकों में शामिल नहीं थे जिन्होंने भारत या अन्य देशों में जाने के लिए निवेदन किया था.

यह मामला तब सामने आया है जब शुक्रवार की सुबह शांघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक होने जा रही है.

विदेश मंत्री जयशंकर इसमें भाग लेने के लिए ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे पहुंच चुके हैं जबकि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअली इस बैठक को संबोधित करेंगे.

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान दुशांबे पहुंचे हैं. ऐसा समझा जा रहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में पैदा होती मानवीय स्थिति पर यह बैठक केंद्रित होगी.

आईटीसी शेयर प्राइस में इतनी ज़बरदस्त उछाल कैसे दर्ज की गई

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में एफ़एमसीजी कंपनी ITC के शेयर गुरुवार को 8 फ़ीसदी उछाल के साथ 233.50 रुपये पर पहुंच गए.

फ़ाइनैंशियल एक्सप्रेस अख़बार लिखता है कि ITC के शेयर सात महीने के उच्चतम स्तर के क़रीब पहुंच चुके हैं. इसी साल फ़रवरी में इसके शेयर की क़ीमत 239.15 रुपये पहुंच गई थी.

इस कंपनी के शेयर्स की ख़रीद-फ़रोख़्त में काफ़ी बढ़ोतरी देखी गई है. बीएसई में इस दिन 98.15 लाख इक्विटी ख़रीदी गई हैं जबकि एनएसई में कुल 13.41 करोड़ यूनिट का व्यापार हुआ.

ITC के शेयर्स में इस महीने 11.45 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है. विश्लेषकों ने इसकी वजह कंपनी के व्यापार में हुए बदलाव को बताया है क्योंकि ITC के शेयर काफ़ी समय से 207-217 रुपये के बीच में ही चल रहे थे.

अख़बार लिखता है कि इस स्टॉक में बढ़ोतरी की वजह इसका मज़बूत मूल्यांकन भी है क्योंकि ऐसा माना जा रहा था कि इसमें बढ़ोतरी होगी क्योंकि इस शेयर को काफ़ी समय तक नज़रअंदाज़ किया जाता रहा था.

विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी के बुनियादी सिद्धांत काफ़ी मज़बूत हैं जिसकी वजह ITC जैसी कंपनियों की अच्छी आर्थिक मज़बूती है और निवेशकों की निगाहें ऐसी ही कंपनियों को तलाशती हैं.

मॉरिसन ने मोदी को पहले ही बता दिया था AUKUS के बारे में

भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती ताक़त के मद्देनज़र अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया ने एक नए त्रिपक्षीय सुरक्षा गठबंधन की घोषणा की है.

द इंडियन एक्सप्रेस अख़बार सूत्रों के हवाले से लिखता है कि इस गठबंधन की घोषणा से पहले ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फ़ोन करके पहले ही इसके बारे में बता दिया था.

इस महत्वाकांक्षी सुरक्षा पहल की घोषणा करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने एक साझा बयान में कहा था कि उनका यह क़दम भारत-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा देगा और उनके साझा मूल्यों और हितों का समर्थन करेगा.

इस समझौते को AUKUS नाम दिया गया है. ऐसा माना जा रहा है कि यह ऑस्ट्रेलिया को परमाणु पनडुब्बियों को पाने में भी मदद करेगा ताकि वो रणनीतिक रूप से इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में चीन की बढ़ती ताक़त के ख़िलाफ़ खड़ा हो सके.

वहीं दूसरी ओर फ़्रांस इस सौदे से नाख़ुशी ज़ाहिर कर चुका है. उसने कहा है कि यह उसकी 'पीठ में छुरा घोंपने' की तरह है.

दरअसल फ़्रांस को इस बात का डर है कि AUKUS के कारण 2016 में उसका ऑस्ट्रेलिया के साथ हुआ 90 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का पनडुब्बी सौदा खटाई में पड़ जाएगा.

'नारकोटिक्स जिहाद' विवाद के बाद मुस्लिम व्यापारियों के ख़िलाफ़ अभियान

केरल में एक बिशप के कथित 'लव जिहाद' और 'नारकोटिक्स जिहाद' जैसे आरोपों के बाद दो फ़ूड प्रोसेसिंग कंपनियों को निशाना बनाकर उनके ख़िलाफ़ सांप्रदायिक अभियान चलाया जा रहा है.

टेलीग्राफ़ अख़बार लिखता है कि कोट्टायम के एरट्टुपेट्टा में इन कंपनियों के मालिक मुसलमान हैं और इन पर सोशल मीडिया पर आरोप लग रहे हैं कि इन्होंने पाला में पाला डायसिस के बिशप मार जोसेफ़ कल्लारांगट के ख़िलाफ़ विरोध मार्च आयोजित किया था.

बिशप ने आरोप लगाया था कि मुसलमान ग़ैर-मुस्लिम महिलाओं को फुसलाकर उनका धर्मांतरण कर रहे हैं और ग़ैर-मुस्लिम युवाओं को ड्रग्स की लत लगा रहे हैं.

आजमी फ्लोर मिल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और केकेएफ़एम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां रेडी टू कुक ब्रेकफ़ास्ट बेचती हैं.

दोनों ही कंपनियों ने 10 सितंबर को हुए विरोध मार्च में अपनी किसी भी भागीदारी को ख़ारिज करते हुए कहा है कि उनका किसी भी राजनीतिक पार्टी या विचारधारा से कोई संबंध नहीं है.

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