डॉमिनोज़ का पित्ज़ा ऑर्डर करने वालों को ये ख़बर डरा सकती है - प्रेस रिव्यू

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डेटा लीक होना या चोरी होना कोई नयी बात नहीं है. इसी क्रम में अब डॉमिनोज़ पित्ज़ा का नाम भी जुड़ गया है. डॉमिनोज़ के लाखों ग्राहकों के ऑनलाइन रिकॉर्ड के कथित तौर पर ऑनलाइन लीक होने का मामला सामने आया है.

बिज़नेस स्टैंडर्ड की ख़बर के अनुसार, इसराइल की साइबर क्राइम इंटेलिजेंस कंपनी हडसन रॉक के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी एलन गैल के मुताबिक़, क़रीब 13 टेराबाइट डेटा के लीक होने की आशंका है. रविवार को एक ट्वीट करके उन्होंने कहा कि इस डेटा में क़रीब 18 करोड़ ऑर्डर से जुड़ी जानकारी शामिल है.

ऑर्डर की जानकारी के तौर पर ग्राहकों के मोबाइल नंबर, ई-मेल अड्रेस, भुगतान संबंधी जानकारी शामिल थी. गैल का दावा है कि यह डेटा डार्क वेब पर बेचा जा रहा था और इसके लिए मोटी रकम मांगी जा रही थी.

हालांकि डॉमिनोज़ इंडिया की ओर से एक बयान में कहा गया है कि उनकी नीति के तहत वो ग्राहकों की वित्तीय जानकारियों को जमा नहीं करते हैं. और ऐसे में किसी भी जानकारी को लेकर कोई समझौता नहीं किया गया है. हालांकि उन्होंने ये ज़रूर माना कि कुछ समय पहले जुबिलैंड फूडवर्क्स में सूचना सुरक्षा से जुड़ा एक मामला ज़रूर सामने आया था. जुबिलैंड फूडवर्क्स डोमिनोज़ इंडिया की मूल कंपनी है.

कोरोना महामारी के कारण यूपीएससी ने सिविल सेवा परीक्षा 2020 के इंटरव्यू कि स्थगित

संघ लोक सेवा आयोग ने कोरोना महामारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए सिविल सेवा परीक्षा 2020 के लिए होने वाले साक्षात्कार को फिलहाल के लिए स्थगित कर दिया है.

यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक़, सिविल सेवा परीक्षा 2020 के इंटरव्यू (जोकि 26 अप्रैल से 18 जून तक होने वाले थे) को अग्रिम आदेश तक के लिए स्थगित कर दिया गया है. नई तारीख़ों का एलान आगे किया जाएगा.

जनसत्ता अख़बार की ख़बर के मुताबिक़, साक्षात्कार और प्रारंभिक परीक्षा की तारीख़ों की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी. सोमवार को यूपीएससी की विशेष बैठक हुई जिसके बाद यह फ़ैसला लिया गया. आयोग के मुताबिक़, ऐसे समय में जबकि कोरोना महामारी तेज़ी से फैल रहा है तो परीक्षा कराना या साक्षात्कार आयोजित कराना संभव नहीं होगा.

इसके अलावा भारतीय आर्थिक सेवा/ भारतीय सांख्यिकीय सेवा परीक्षा 2020 के लिए होने वाले साक्षात्कार को अगली सूचना तक के लिए स्थगित कर दिया गया है.

और बढ़ सकती है ऑक्सीजन की किल्लत

कोरोना की दूसरी लहर पहली लहर की तुलना में कई मायनों में अलग है. जिस लिहाज़ से संक्रमण के मामले आ रहे हैं, अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यह दूसरी लहर ज़्यादा घातक है. इसी के साथ इस बार पहले की तुलना में कहीं अधिक मरीज़ों को ऑक्सीजन की ज़रूरत पड़ रही है.

दैनिक हिंदुस्तान की ख़बर के अनुसार, इस बार ज़्यादातर संक्रमितों को ऑक्सीजन की ज़रूरत पड़ रही है. लेकिन जैसा कि बोला जा रहा है कि दूसरी लहर की चपेट में युवा अधिक हैं तो ऐसा नहीं है. यह बेहद मामूली बढ़ोत्तरी है.

नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल, आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव और एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कोरोना के नेशनल क्लिनिकल रजिस्ट्री के आंकड़े देते हुए बताया कि कोरोना की दोनों लहर में 70 फ़ीसद से अधिक मरीज़ 40 की उम्र के पार के हैं.

पिछली लहर में 0-19 साल तक की उम्र के 4.2 फ़ीसद मरीज़ थे जो कि इस बार 5.8 फ़ीसद हो गया है. इस बार 20-40 साल की उम्र के मरीज़ों की संख्या पहले की तुलना में 1.5 फ़ीसद अधिक है.

जो सबसे अधिक चिंता की बात है वो यह कि पहली लहर में जहां 41.1 फ़ीसद लोगों को ऑक्सीजन की ज़रूरत पड़ रही थी वहीं इस बार 54.5 फ़ीसद लोगों को ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ रही है.

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