सीबीएसई की 12वीं की परीक्षा अब 15 जून के बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने लिया फ़ैसला

इमेज स्रोत, Sunil Ghosh/Hindustan Times via Getty Images
सीबीएसई की बोर्ड परीक्षा पर आख़िरकार सरकार ने बुधवार को फ़ैसला ले ही लिया.
इस साल 10वीं के छात्र अब इंटरनल असेसमेंट के ज़रिए आगे की क्लास में जाएंगे.
वहीं 12वीं की बोर्ड परीक्षा फ़िलहाल के लिए स्थगित करने का फ़ैसला किया गया है. 1 जून 2021 को दोबारा से इस पर विचार करने की बात कही गई है.
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की तरफ़ से जारी प्रेस रिलीज़ में बताया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को बैठक हुई, जिसमें यह निर्णय लिया गया. केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव , कैबिनेट सेक्रेटरी, स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा सचिव सभी इस बैठक में मौजूद थे.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 1
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बैठक में कहा, "छात्रों की सेहत हमारी प्राथमिकता है. लेकिन बच्चों के स्वास्थ्य के साथ ये भी ध्यान रखना है कि उनकी पढ़ाई पर इसका असर ना पड़े."
सीबीएसई की 10वीं की परीक्षाएँ 4 मई से 7 जून 2021 के बीच होंनी थीं. वहीं 12वीं की परीक्षाएँ 4 मई ले 14 जून 2021 के बीच होने का एलान किया गया था.
सामान्य तौर पर ये परीक्षाएं मार्च-अप्रैल में होती थीं, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से इस बार बोर्ड की परीक्षाएं देर से करवाने का एलान किया गया था. इस बारे में छात्रों के लिए सुरक्षा के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए गए थे.
इस साल की सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाओं में 21,50,761 बच्चे शामिल होने वाले थे जबकि 14,30,243 बच्चों के 12वीं की परीक्षा में शामिल होने की संभावना है.

इमेज स्रोत, Sunil Ghosh/Hindustan Times via Getty Images
सरकार ने क्यों लिया फैसला?
भारत में कोरोना संक्रमण जिस तेज़ी से बढ़ रहा है, उसे दूसरी लहर के तौर पर देखा जा रहा है. किसी राज्य में इसका क़हर ज़्यादा है तो किसी में तुलनात्मक रूप से कम. चूंकि सीबीएसई बोर्ड को देश में केंद्रीय बोर्ड के तौर पर देखा जाता है, इस वजह से इस बोर्ड की परीक्षा में बैठने वाले छात्र देश भर से आते हैं.
इसलिए ये ज़रूरी है कि सभी राज्यों में सीबीएसई बोर्ड परीक्षा एक साथ कराई जाए.
कोरोना के रोज़ाना आने वाले नए मरीज़ों की संख्या महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़,पंजाब, दिल्ली और गुजरात जैसे राज्यों में तेज़ी से बढ़ रही है.
कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री ने ऐसी माँग केंद्र सरकार के सामने रखी थी.
मंगलवार को ही दिल्ली के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री दोनों ने गुहार लगाई थी कि सीबीएसई बोर्ड एग्ज़ाम पर अगर जल्द ही फ़ैसला नहीं लिया गया, तो वो सुपर स्प्रेडर साबित हो सकते हैं. बुधवार को लिए गए फ़ैसले पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ख़ुशी जताई है.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 2

इमेज स्रोत, Arvind Yadav/Hindustan Times via Getty Images
फैसले के सीबीएसई के 10वीं के छात्रों के लिए मायने?
ताज़ा फ़ैसले के मुताबिक़, सीबीएसई की 10वीं की बोर्ड परीक्षा कैंसल हो गई है.
सीबीएसई बोर्ड की तरफ़ से अब छात्रों को अगले क्लास में प्रोमोट करने के लिए एक 'ऑब्जेक्टिव क्राइटेरिया' दिया जाएगा. उसी के आधार पर छात्रों का रिजल्ट तैयार किया जाएगा. अगर कोई छात्र इस तरह से तैयार किए गए रिजल्ट से संतुष्ट नहीं होगा, तो महामारी की हालत सुधरने के बाद उन्हें एक परीक्षा देना का मौक़ा दिया जाएगा.
लेकिन ये 'ऑब्जेक्टिव क्राइटेरिया' सीबीएसई की तरफ़ से कब और कैसे तैयार होगा, रिज़ल्ट कब तक आएंगे, असंतुष्ट छात्र दोबारा कब परीक्षा दे पाएंगे इस बारे में शिक्षा मंत्रालय की तरफ़ से कुछ नहीं बताया गया है.
बताया जा रहा है कि इस बारे में सीबीएसई की तरफ़ से विस्तृत गाइडलाइन अगले 24 से 48 घंटे के बीच जल्द ही जारी की जाएगी.
फ़ैसले के पीछे अधिकारियों का तर्क है कि चूंकि 10वीं के बाद ज़्यादातर छात्र उसी स्कूल में 11वीं में दाख़िला लेतें हैं इसलिए इस तरह से रिज़ल्ट तैयार करने में दिक़्क़त नहीं होगी. जो छात्र दूसरे स्कूल में 11वीं में दाख़िला लेना चाहते हैं उन्हें थोड़ी दिक़्क़त हो सकती है.
लेकिन सारे पहलूओं को ध्यान में रखते हुए ही गाइडलाइन निकालने की बात कही जा रही है.

इमेज स्रोत, Keshav Singh/Hindustan Times via Getty Images
फ़ैसले के सीबीएसई के 12वीं के छात्रों के लिए मायने?
12वीं के छात्रों के बारे में केवल इतना कहा गया है कि फ़िलहाल 4 मई से शुरू होने वाली उनकी परीक्षा आगे के लिए टाल दी गई है.
आगे परीक्षा होगी? इस बारे में 1 जून 2021 को रिव्यू किया जाएगा और उसी बैठक के बाद छात्रों और अभिभावकों को इस बारे में सूचित किया जाएगा.
इसके अलावा ये भी कहा गया है कि छात्रों को सूचित करने और एग्ज़ाम की नई डेटशीट में कम से कम 15 दिन का गैप ज़रूर होगा.
यानी, 12वीं के छात्रों को परीक्षा शुरू होने से 15 दिन पहले सूचित कर दिया जाएगा, ताकि तैयारी के लिए उन्हें पूरा मौक़ा मिले.
इससे साफ़ है कि 12वीं के छात्रों को आगे भी अपनी तैयारी जारी रखनी है. अब 15 जून 2021 के बाद ही उनकी बोर्ड की परीक्षा शुरू होगी. ज़ाहिर है परीक्षा देर से होगी तो रिज़ल्ट आने में भी टाइम लगेगा. इसका कुछ असर कालेज में छात्रों के दाख़िले पर भी पड़ सकता है.
सीबीएसई की तरफ़ से जारी गाइडलाइन से ही पता चलेगा की नतीजे और अगले सेशन के बीच कितना गैप होगा.
पिछले साल क्या हुआ था?
कोविड-19 महामारी के चलते साल 2020 सीबीएसई बोर्ड की परीक्षा के कुछ पेपर बाक़ी रह गए थे. पिछले साल जो परीक्षाएँ 1 से 15 जुलाई के बीच होने वाली थीं उन्हें रद्द कर दिया गया था.
12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कैसे करें?
कोरोना महामारी का ये दौर 10वीं और 12वीं के स्कूली छात्रों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है.
महामारी और राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की वजह से चालू शैक्षिक सत्र प्रभावित हुआ. ज़्यादातर पढ़ाई ऑनलाइन क्लासेस के ज़रिए हुई है. स्कूल में पढ़ाई ना होने की वजह से छात्रों ने ऑनलाइन तरीक़े से सिलेबस पूरा कर अपनी परीक्षा की तैयारी की है.
हालात की समीक्षा और विशेषज्ञों व शिक्षकों के सुझाव के बाद सीबीएसई ने 2020-2021 के सत्र के लिए 10वीं और 12वीं का सिलेबस 30% कम कर दिया था. रिवाइज़्ड सिलेबस को cbseacademic.in पर जारी किया गया था.
बोर्ड परीक्षा के दौरान छात्रों को कोविड-19 से बचाने के लिए क्या तैयारी है?
सीबीएसई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, "कोविड दिशा-निर्देशों का पालन करने के साथ-साथ, देश भर में परीक्षा केंद्रों को 40-50 प्रतिशत बढ़ाया गया है, ताकि परीक्षा के दौरान छात्रों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग को सुनिश्चित किया जा सके."
सीबीएसई ने 1 अप्रैल को जारी सर्कुलर में कहा है कि बोर्ड, कोविड महामारी के बीच 2021 की बोर्ड परीक्षा कराने के लिए पर्याप्त उपाय कर रहा है. जो छात्र 12वीं कक्षा की प्रैक्टिकल परीक्षा में नहीं आ पा रहे, उन्हें दूसरी मौक़ा दिया जाएगा.
बोर्ड परीक्षा के दौरान अगर छात्र को कोविड हो जाए तो?
सीबीएसई ने कोविड-19 के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र कई तरह के दिशा-निर्देश जारी किए हैं. जिसमें कोविड-19 संक्रमित छात्रों को अतिरिक्त अटेम्प्ट देना शामिल है.
एक अप्रैल को जारी सर्कुलर के मुताबिक़, अगर कोई उम्मीदवार ख़ुद या परिवार के किसी सदस्य को कोविड हो जाने की वजह से प्रैक्टिकल एग्ज़ाम में शामिल नहीं हो पाता है तो स्कूल वाले रीजनल ऑफ़िस से सुझाव लेकर उपयुक्त समय पर उस छात्र का प्रैक्टिकल कराएंगे. लेकिन ये प्रैक्टिकल 11 जून 2021 से पहले कराना होगा. बुधवार को लिए गए ताज़ा फ़ैसले के बाद पुराने फ़ैसले पर क्या असर होगा, ये देखने वाली बात होगी.
बोर्ड की परीक्षा के दौरान कोविड-19 से कैसे बचें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि इस साल 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में बैठने वाले छात्र अपने स्वास्थ्य का ख़ास ख्याल रखें और कोविड-19 से बचने के लिए एहतियात बरतें.
बोर्ड एग्ज़ाम में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए ठीक से सोने और खाने की सलाह तो हमेशा दी जाती है, लेकिन कोरोना महामारी के इस दौर में अतिरिक्त सावधानी बरतने की ज़रूरत है.
मास्क पहनें, हाथ धोते रहें और सोशल डिस्टेंसिंग का ख़ास ख्याल रखें.
वहीं छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए एग्ज़ाम सेंटर पर भी विशेष इतंज़ाम किए जा रहे हैं. जिसमें एग्ज़ाम सेंटर को वक़्त-वक़्त पर सैनेटाइज़ करना, शिक्षकों का विशेष एहतियात बरतना, एग्ज़ाम हॉल में जाने से पहले तापमान जाँचा जाना शामिल है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)




























