पुतिन ने कहा, 'पाकिस्तान चीन के नियंत्रण में नहीं है'

व्लादिमीर पुतिन, शी जिनपिंग

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इमेज कैप्शन, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मई में चीन का दौरा किया था
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि अमेरिका के साथ भारत की बढ़ती साझेदारी मॉस्को के साथ उसके लंबे समय से चले आ रहे रिश्तों को कमज़ोर नहीं कर सकती. साथ ही उन्होंने पाकिस्तान के बारे में कहा कि उन्हें नहीं लगता कि वो चीन के नियंत्रण में है.

उन्होंने कहा कि रूस के साथ संबंधों को लेकर भारत पर दबाव डालने की कोशिशें 'बेकार' हैं और उनसे दोनों देशों के रिश्तों की दिशा बदलने की संभावना नहीं है.

पुतिन का ये बयान ऐसे समय आया है जब इसी साल 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में हो रही ब्रिक्स की बैठक में शामिल होने के लिए पुतिन भारत दौरे पर आने वाले हैं.

एक साल के अंदर पुतिन का यह दूसरा भारत दौरा होगा.

उधर, भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर नए दौर की वार्ता हो रही है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को व्यापार समझौते के जल्द पूरा होने की उम्मीद जताई है.

गुरुवार को राष्ट्रपति पुतिन ने सेंट पीटर्सबर्ग में पीटीआई समेत ग्लोबल न्यूज़ एजेंसियों के पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भारत, रूस का एक भरोसेमंद पार्टनर है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, राष्ट्रपति पुतिन ने भारत-रूस के संबंधों में दख़ल देने के लिए पश्चिम की कोशिशों को लेकर चेतावनी भी दी.

उन्होंने कहा, "रूस के साथ रिश्तों की गर्माहट को कम करने के लिए भारत पर दबाव डालने की पश्चिमी कोशिशें बेकार हैं और वैश्विक स्थिरता को नुक़सान पहुंचाने वाली हैं."

भारत और रूस के संबंधों पर क्या कहा?

राष्ट्रपति पुतिन

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इमेज कैप्शन, राष्ट्रपति पुतिन ने अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के प्रतिनिधियों से बातचीत में भारत, चीन, अमेरिका और मध्य पूर्व की स्थितियों पर बात की
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भारत के साथ रूस के संबंधों को राष्ट्रपति पुतिन ने 'दशकों पुराना' और एक 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' वाला रिश्ता बताया.

उन्होंने कहा, "हमारे बीच एक विशेष रणनीतिक साझेदारी है. यह ऐसा रिश्ता है जिस पर हम दशकों से काम कर रहे हैं. 1947 में, जब सोवियत संघ ने भारत के साथ कूटनीतिक संबंध स्थापित किए थे, तब से हम एक नए स्वतंत्र राष्ट्र की स्थापना में हरसंभव सहयोग करते रहे हैं."

उन्होंने कहा, "भारतीय लोगों की मेहनत और प्रतिभा की बदौलत भारत ने अपने विकास में बड़ी और महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं. भारत दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, ऊंची आर्थिक विकास दर इसका सबूत है."

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा, "भारत ने यह विकास दर उन रणनीतियों को लागू करते हुए हासिल की है, जिन्हें भारत सरकार के प्रमुख के रूप में मोदी ने तैयार किया और लागू किया है."

पुतिन ने आने वाले सालों में दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाने की उम्मीद जताई.

उन्होंने ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा के साथ-साथ भारत में निवेश की नई परियोजनाओं को लेकर भी सकारात्मक उम्मीद ज़ाहिर की.

उन्होंने कहा, "भारत फ़ार्मास्युटिकल उद्योग में बहुत सक्रिय है और हमारे आर्थिक संचालक कई दिलचस्प परियोजनाएं प्रस्तावित करने के लिए तैयार हैं. हम पहले ही दीर्घकालिक योजनाओं की रूपरेखा तैयार कर चुके हैं."

'भारत पर अमेरिका दबाव डाल रहा है'

राष्ट्रपति पुतिन

रूसी राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि भारत पर दबाव डालने की अमेरिका की कोशिशों का रूस-भारत संबंधों पर बहुत कम असर पड़ा है.

एक पत्रकार ने पूछा कि कुछ लोगों का कहना है कि अमेरिका और भारत के साथ सहयोग, रूस और भारत के बीच रिश्ते में मुश्किलों का कारण बन रहा है, इस पुतिन ने कहा, "आपकी बाद मुझे अजीब लग रही है. आप ऐसा क्यों सोचते हैं?

बदले हुए भू-राजनीतिक माहौल में भारत-रूस संबंधों को लेकर पुतिन ने कहा, "हमें खुशी है कि भारत सभी देशों के साथ संबंध विकसित कर रहा है. यह एक महान देश है. 1.5 अरब लोगों का देश सबसे बड़ा लोकतंत्र है. यह स्वाभाविक है कि वह अपने हितों के अनुरूप उन देशों से अपने संबंध विकसित करता है, जिन्हें वो ज़रूरी समझता है."

उन्होंने कहा, "कुछ मामलों में अमेरिका भारत पर दबाव डालने की कोशिश कर रहा है. मसलन रूस के साथ सहयोग के मामले में. हर कोई समझता है कि नरेंद्र मोदी पर दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय संबंधों और द्विपक्षीय संबंधों के लिए नुक़सानदेह है, चाहे यह दबाव कहीं से भी आए."

हालांकि उन्होंने कहा, "इसके कोई नकारात्मक नतीजे नहीं दिख रहे हैं, आज की स्थिति में इससे कोई गंभीर दुष्परिणाम सामने नहीं आया है. हम भारत के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ा रहे हैं और भारत को एक भरोसेमंद साझेदार मानते हैं."

दरअसल, यूक्रेन के साथ संघर्ष के बाद से ही रूस को अलग-थलग करने की कोशिशों के बावजूद भारत ने रूस के साथ अपने रिश्तों को बरकरार रखा और और साथ ही रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल के आयात में काफ़ी बढ़ोतरी की.

रूसी कच्चा तेल ख़रीदने के लिए ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ़ भी लगाया था, हालांकि बाद में इसे हटा लिया और ईरान जंग के बाद रूसी तेल ख़रीद को लेकर छूट भी बढ़ाई गई.

पाकिस्तान और चीन पर क्या बोले पुतिन

राष्ट्रपति पुतिन

पड़ोसी देशों के संबंधों का भारत पर पड़ने वाले असर के बारे में राष्ट्रपति पुतिन ने कहा, "हम भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों की जटिलताओं को अच्छी तरह समझते हैं. मुझे नहीं लगता कि पाकिस्तान ऐसा देश है जो पूरी तरह चीन के नियंत्रण में है."

"पाकिस्तान एक बड़ा देश है और उसके अलग-अलग देशों के साथ बहुआयामी संबंध हैं. उसे चीन के साथ अपने सहयोग को ध्यान में रखना होता है, लेकिन हर कोई चीन के साथ संबंध विकसित कर रहा है."

उन्होंने भारत और चीन के बीच संबंधों को बेहद संवेदनशील और बहुआयामी बताया और कहा कि उसमें हस्तक्षेप करना अच्छा विचार नहीं है.

उन्होंने कहा, "हम भारत और चीन, दोनों में अपने मित्रों के साथ संपर्क में रहते हैं. राष्ट्रपति शी और प्रधानमंत्री मोदी दोनों आपसी हितों से जुड़े सभी मुद्दों को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें सीमा से जुड़े संबंध भी शामिल हैं."

चीन के साथ रूस के संबंधों पर उन्होंने कहा, "जहां तक रूस का सवाल है, चीन और भारत दोनों के साथ हमारे अपने संबंध हैं. रूस और भारत के संबंध चीन को परेशान नहीं करते और चीन के साथ हमारे संबंध भारत को परेशान नहीं करते."

उन्होंने ब्रिक्स का उदाहरण देते हुए कहा, "एक समय मैंने सुझाव दिया था कि भारत और चीन के नेता यहां मिलें. इसी तरह रूस-भारत-चीन फ़ोरम की स्थापना हुई. "

पाकिस्तान-चीन संबंधों के भारत पर प्रभाव को लेकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा, "भारत या चीन, किसी के साथ भी सहयोग में हमें कोई समस्या नहीं है. हम उन्नत हथियार प्रणालियों के क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग करते हैं. भारत ने ब्रह्मोस मिसाइलें बनाई हैं."

उन्होंने कहा, "रूस ने भारत को सुखोई-57 फ़ाइटर जेट तकनीक पर मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया था. लेकिन हमारे भारतीय मित्रों ने कहा कि आप इसे स्वयं विकसित कीजिए और संभव है कि हम बाद में इसमें शामिल हों."

उन्होंने कहा, "हम इस क्षेत्र में भारत के साथ काम करने, इस विमान की आपूर्ति करने और इसके आगे के विकास में सहयोग के लिए तैयार हैं. हमें कोई समस्या नहीं है. हवाई रक्षा प्रणाली के मामले में भी यही स्थिति है."

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