किसान संगठनों और सरकार के बीच 11वें दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही

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सरकार और किसान संगठनों के बीच तीन नए कृषि क़ानूनों को लेकर 11वें दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही है.

शुक्रवार को विज्ञान भवन में हुई बैठक में सरकार ने अपनी ओर से दिए प्रस्ताव पर ही बातचीत करने की बात दोहराई जिसे किसान संगठनों ने मानने से इंकार कर दिया.

किसान नेताओं का कहना है कि यह बैठक बमुश्किल 15-20 मिनट ही चली.

सरकार ने डेढ़ साल तक क़ानून को स्थगित करने का प्रस्ताव किसान संगठनों के सामने रखा है लेकिन किसानों को यह प्रस्ताव मंज़ूर नहीं है.

आगे की बैठक को लेकर कोई नई तारीख़ की बात नहीं कही गई है.

बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा के इस सवाल पर कि क्या किसान संगठनों में भी सरकार के प्रस्ताव को मानने को लेकर कोई मतभेद है?

एक किसान नेता ने कहा कि घर में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार होता है. घर में अगर चार लोग हैं तो सब की अपनी-अपनी राय होती है लेकिन आख़िरकार एक ही राय बनी है. सभी इस पर एकमत है कि ये क़ानून रद्द होना चाहिए.

ट्रैक्टर रैली को लेकर इस किसान नेता ने कहा कि हम दो दिन पहले 24 तारीख़ को इस पर प्रस्ताव बनाकर देंगे. उन्होंने बताया कि सरकार एमएसपी पर भी गारंटी देने के बजाए कमेटी बनाने का प्रस्ताव रख रही है.

किसान संगठन दिल्ली बॉर्डर पर क़रीब दो महीने से केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीन नए कृषि क़ानूनों को रद्द कराने की माँग को लेकर बैठे हुए हैं.

किसान संगठन दिल्ली बॉर्डर पर करीब दो महीने से केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीन नए कृषि क़ानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर बैठे हुए हैं.

विज्ञान भवन के बाहर मौजूद एक अन्य किसान नेता ने कहा कि सरकार ने कोई नया प्रस्ताव नहीं दिया है. पहले प्रस्ताव पर ही अड़े हुए है.

मौके पर मौजूद किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने पीछे हटने के सवाल पर कहा कि सरकार भी पीछे हटने को तैयार नहीं है. हम भी नहीं है. हमारे लिए पीछे हटना आत्महत्या है. क्या हम आत्महत्या कर लें?

बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा ने जब पूछा कि ऐसी स्थिति में हल कैसे निकलेगा?

इस पर उनका जवाब था, "हम तो फरियादी है. फरियाद ले कर आए हैं. हम सरकार के पास ही आएँगे और किसके पास जाएँगे."

उन्होंने आगे कहा कि हमने कोई रास्ता नहीं रोका हुआ है. सरकार ने रास्ता रोक रखा है. सरकार ने दिल्ली में आने को लेकर रास्ता रोक रखा है.

उन्होंने बताया कि सरकार के प्रस्ताव को लेकर जो किसान संगठनों में मतभेद की बात सामने आई है, वो दरअसल पंजाब के जत्थेबंदियों के बीच हुई है, हमारे बीच नहीं हुई है. हमारे बीच सर्वसम्मति से किसान क़ानूनों को रद्द करने को लेकर सहमति बनी हुई है.

आगे की बातचीत की संभावना पर उन्होंने कहा कि आगे कोई संभावना नहीं है. सरकार जब मन बना लेगी क़ानूनों को रद्द करने को लेकर तब आएँगे.

26 जनवरी को होने वाली ट्रैक्टर रैली को लेकर उन्होंने कहा कि पंजाब और दूसरे राज्यों में जैसी तैयारियाँ चल रही हैं उसे देखकर लगता है कि करीब पांच लाख ट्रैक्टर इस रैली में आ रहे हैं. हमने सरकार ने कहा कि हम शांतिपूर्ण मार्च करेंगे, हमें रास्ता दीजिए.

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि हम लौटकर सिंघु बॉर्डर पर बात करेंगे कि हमें आगे क्या करना है.

किसान नेता बलकरन सिंह ने कहा कि सरकार अपने पिछले डेढ़ साल के स्थगन प्रस्ताव पर ही टिकी हुई है. हम क़ानून रद्द कराना चाहते हैं और सरकार इधर-उधर की बात कर के आंदोलन को तोड़ना चाहती है.

उन्होंने कहा कि हम पिछले छह महीने से शांतिपूर्ण आंदोलन चला रहे हैं और आगे भी शांतिपूर्ण आंदोलन चलाएँगे. ट्रैक्टर परेड के लिए हमने रास्ता मांगा है. हम ये परेड पूरी तरह से संविधान के दायरे में शांतिपूर्ण तरीके से करेंगे. कोर्ट ने भी कहा कि यह किसानों का संविधानिक अधिकार है.

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