कोरोना वैक्सीन लगाने के लिए भारत में 28-29 दिसंबर को पूर्वाभ्यास- प्रेस रिव्यू

कोरोना वैक्सीन

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भारत में लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाने के लिए अगले हफ़्ते से चार राज्यों में 'ड्राई रन' (पूर्वाभ्यास) किया जाएगा.

भारतीय इतिहास का यह सबसे महत्वाकांक्षी पूर्वाभ्यास आंध्र प्रदेश, गुजरात, पंजाब और असम में दो दिनों के लिए होगा.

अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार 28 और 29 दिसंबर को इन चारों राज्यों के दो ज़िलों में टीकाकरण का पूर्वाभ्यास किया जाएगा.

इस पूर्वाभ्यास के चार प्रमुख चरण होंगे और चारों पर केंद्र सरकार क़रीब से नज़र रखेगी. ये चार चरण हैं:

1. हर ज़िले के क़रीबी डिपो तक 100 लाभार्थियों के लिए डमी वैक्सीन पहुँचाई जाएगी.

2. डिपो से लेकर टीकाकरण की जगह तक के तापमान को ट्रैक किया जाएगा.

3. लाभार्थियों को टीकाकरण से पहले ही एक एसएमएस भेजा जाएगा जिसमें टीका लगाने वाले का नाम और टीका लगने की जगह के बारे में बताया जाएगा.

4. टीका लगने के अभ्यास के बाद हर शख़्स को आधे घंटे पर वहीं इंतज़ार करने को कहा जाएगा और उन पर नज़र रखी जाएगी. अगर इस प्रक्रिया में कोई कठिनाई आती है तो इसे सेंट्रल सर्वर के ज़रिए ट्रैक किया जाएगा.

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि इस ड्राई रन में शामिल होने वाले कुल 2,360 लोगों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण दिलाया गया है. इनमें कोल्ड चेन से लेकर टीकाकरण अधिकारी तक शामिल हैं.

ब्रिटेन, अमेरिका और फ़्रांस समेत कई देशों में कोरोना वायरस की वैक्सीन लगने लगी है. अब भारत भी इससे कुछ ही क़दम दूर नज़र आ रहा है. उम्मीद जताई जा रही है कि टीकाकरण के पूर्वाभ्यास के बाद जल्दी ही असल में टीकाकरण भी शुरू हो जाएगा.

भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल मामले एक करोड़ से भी ज़्यादा हैं और अमेरिका के बाद यह महामारी से सबसे ज़्यादा प्रभावित दूसरा देश है.

भारत-बांग्लादेश सीमा

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'बड़ी संख्या में बांग्लादेशियों के भारत आने के दावों में दम नहीं'

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ़) और बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश (बीजीबी) ने कहा है कि बांग्लादेशियों के बड़ी संख्या में अवैध रूप से भारत में आने की धारणाएं तथ्यों पर आधारित नहीं हैं.

अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू में छपी रिपोर्ट के अनुसार भारत और बांग्लादेश के सुरक्षाबलों ने यह बात सीमापार अपराधों के रोकने के लिए पेट्रोलिंग बढ़ाने से पहले कही.

बीएसएफ़ और बीजीबी ने शुक्रवार को दोनों देशों की 4,096 किलोमीटर की सीमा पर 'प्राथमिकता वाले क्षेत्रों' में इकहरी घेराबंदी का भी फ़ैसला लिया.

बॉर्डर गार्डस बांग्लादेश के डायरेक्टर जनरल शफ़ीनुल इस्लाम ने कहा, "देखा जाए तो वैध काग़जात के साथ इलाज कराने के अलावा बांग्लादेशियों के पास सीमा पार जाने की कोई ख़ास वजहें भी नहीं हैं."

उन्होंने यह बात बीएसएफ़ और बीजीबी की 51वीं डीजी स्तर की साझा प्रेस कॉन्फ़्रेंस के बाद कही.

शफ़ीनुल इस्लाम ने कहा, "बांग्लादेशियों के अवैध रूप से भारत में न जाने की एक वजह बांग्लादेश की बढ़ती जीडीपी ग्रोथ भी है."

वहीं, बीएसएफ़ के डीजी राकेश अस्थाना ने कहा कि बड़े स्तर पर बांग्लादेशियों के भारत में घुसने की बातों में कोई सच्चाई नहीं है.

उन्होंने कहा, "अगर कोई ग़ैरक़ानूनी तरीके से सीमा पार करने की कोशिश करता है तो हम उसे ज़रूर रोकते हैं. हमने इस साल ऐसे 3,204 लोगों को पकड़ा है."

इस साल एनआरसी और सीएए को लेकर भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तल्ख़ी आ गई थी.

बांग्लादेश ने भारत के कुछ नेताओं के उन बयानों पर आपत्ति जताई थी, जिनमें उन्होंने कहा था कि बड़ी संख्या में बांग्लादेशी प्रवासी अवैध रूप से भारत में आते हैं.

छात्र

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सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए एक ही परीक्षा

अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार साल 2021 से केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए कॉमन (एक ही) परीक्षा होगी.

नए क़दम का मक़सद छात्रों पर 12वीं कक्षा में मिले अंकों के आधार पर तय होने वाल कटऑफ़ का दबाव कम करना है.

केंद्र सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2021-22 की प्रवेश परीक्षा के लिए सात सदस्यों वाली एक समिति बनाई है.

सरकार का कहना है कि ये समिति 'उच्च मानकों वाली प्रवेश परीक्षा' के नियम निर्धारित करेगी.

ग्रैजुएशन के लिए कंप्यूटर आधारित इस प्रवेश परीक्षा को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) आयोजित कराएगी और ये केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए अनिवार्य होगा.

उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे ने बताया कि इस परीक्षा में सामान्य अध्ययन के प्रश्न भी पूछे जाएंगे और ख़ास विषयों से जुड़े सवाल भी.

कोरोना वायरस

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कोरोना के म्यूटेशन से घबराने की ज़रूरत नहीं: एम्स डायरेक्टर

नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के डायरेक्टर और नेशनल टास्क फ़ोर्स ऑन कोविड मैनेजमेंट के सदस्य डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि कोरोना वायरस के म्यूटेशन की ख़बरों से घबराने की ज़रूरत नहीं है.

उन्होंने कहा, ''कोरोना वायरस अब तक कई बदलावों से गुज़र चुका है लेकिन औसतन देखा जाए तो हर महीने इसमें दो म्यूटेशन हुए हैं. ऐसे में वायरस के नए वैरिएंट्स से बेवजह घबराने की ज़रूरत नहीं है."

डॉक्टर गुलेरिया ने कहा, "म्यूटेशन के कारण कोविड-19 के लक्षणों में कोई बदलाव नहीं आया है.इसलिए इसके इलाज की रणनीति में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है. अभी तक मौजूद डेटा के अनुसार जो वैक्सीन भारत में ट्रायल के दौर में हैं, वो कोरोना वायरस के नए वैरिएंट्स पर भी असर करेंगी."

उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में मिले नए वैरिएंट की वजह से चिंताएं इसलिए बढ़ी हैं क्योंकि ये तेज़ी से फैलता है न कि इससे अस्पताल में भर्ती होने की आशंका बढ़ती है.

इस बीच, ब्रिटेन के अलावा फ़्रांस और दक्षिण अफ़्रीका में भी कोरोना वायरस के नए वैरिएंट्स मिले हैं जिन्हें ज़्यादा संक्रामक बताया जा रहा है.

इस ख़बर को टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है.

वीडियो कैप्शन, कोरोना वायरस की वैक्सीन इतनी जल्दी कैसे आ गई?

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