कश्मीरी कार्यकर्ताओं और मीडिया पर एनआईए के छापे से उठे कई सवाल

अजित डोभाल

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    • Author, आमिर पीरज़ादा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर से
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 4 मिनट

भारत की प्रमुख जाँच एजेंसी एनआईए यानी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी ने बुधवार और गुरुवार को भारत प्रशासित कश्मीर में कई एनजीओ और मीडिया संस्थानों पर छापेमारी की है.

बुधवार को एनआईए ने भारत प्रशासित कश्मीर में 10 जगहों पर और बेंगलुरू में एक ठिकाने पर छापा मारा.

एनआईए के मुताबिक़, "इन जगहों पर भारत और विदेश से चैरिटेबल गतिविधियों के नाम पर कथित रूप से पैसे जुटा रहे कुछ एनजीओ और ट्रस्ट्स के एक केस के सिलसिले में छापेमारी की जा रही है. इस पैसे का इस्तेमाल जम्मू और कश्मीर में अलगाववाद और पृथकतावादी गतिविधियों को चलाने में किया जा रहा था."

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एनआईए का कहना है कि इस मामले से जुड़े कई दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस छापेमारी में ज़ब्त किए गए हैं.

मशहूर मानवाधिकार कार्यकर्ता ख़ुर्रम परवेज़ और परवीना अहंगर, अख़बार ग्रेटर कश्मीर, एएफ़पी जर्नलिस्ट परवेज़ बुख़ारी और एनजीओ अथरूट के ठिकानों पर छापेमारी की गई है.

कश्मीर टाइम्स की एग्ज़ीक्यूटिव एडिटर अनुराधा भसीन ने बीबीसी के सहयोगी संवाददाता माजिद जहाँगीर को बताया कि सत्य बोलने वाले संस्थानों के ख़िलाफ़ छापेमारी की कार्रवाई की गई है.

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भसीन के मुताबिक़, "ऐसे संस्थानों पर छापेमारी और तलाशी की कार्रवाई की गई है जिनका कभी भी चरमपंथ से संबंधित गतिविधियों से जुड़ाव नहीं रहा. एनआईए ने इन संस्थानों को अचानक घेर लिया है. उन्होंने प्रमुख अख़बारों के दफ़्तरों, जेकेसीसीएस, एपीडीपी के दफ़्तरों पर छापा मारा है."

उन्होंने कहा, "जेकेसीसीएस मानव अधिकारों से जुड़ा एक ऐसा संस्थान है जिसके दस्तावेज़ न सिर्फ़ सुरक्षा बलों के बल्कि चरमपंथियों के भी ख़िलाफ़ हैं. वे संवाद और शांतिपूर्ण समाधान की बात करते हैं."

उन्होंने बताया, "एनआईए के बुधवार के बयान में कहा गया है कि उनके पास साक्ष्य हैं. इन सबको सार्वजनिक किया जाना चाहिए. या तो इन लोगों को बस निशाना बनाया जा रहा है, या फिर ये लोगों को चुप कराने के लिए हो रहा है."

यह पूछे जाने पर कि क्या ये ज़मीन क़ानूनों के ख़िलाफ़ होने वाले विरोध-प्रदर्शनों को रोकने के किया गया है? तो उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता, मेरे दिमाग़ में कई सवाल आ रहे हैं, ज़मीन क़ानूनों का बड़े पैमाने पर विरोध है, लेकिन कई लोग यह सवाल कर रहे हैं कि ये छापेमारी अभी ही क्यों की गई."

परवीना अहंगर 1994 से एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स ऑफ़ डिसअपीयर्ड पर्संस (एपीडीपी) चला रही हैं.

कश्मीर, एनआईए के छापे

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एपीडीपी भारत प्रशासित कश्मीर में ग़ायब हुए लोगों के परिवारों को न्याय दिलाने और सपोर्ट मुहैया कराने के काम में लगी हुई है.

एपीडीपी ने एक बयान में कहा है, "उन्होंने कई दस्तावेज़ और कुछ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ज़ब्त की हैं. परवीना अहंगर का मोबाइल फ़ोन भी ज़ब्त कर लिया गया है."

एपीडीपी ने कहा है, "एपीडीपी से दस्तावेज़ ज़ब्त किये जाने के चलते संवेदनशील जानकारियों के ग़लत इस्तेमाल की गंभीर चिंताएं पैदा हो रही हैं. इनमें पीड़ित परिवारों के नाम और पते शामिल हैं."

संस्था ने कहा कि उसे इस वजह से निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि ज़बरदस्ती गायब किए गए, प्रताड़ित किए गए और मानवाधिकारों के उल्लंघन के पीड़ितों के लिए काम करने का उसका मज़बूत रिकॉर्ड रहा है.

ख़ुर्रम परवेज़ के संस्थान जम्मू एंड कश्मीर कोएलिशन ऑफ़ सिविल सोसाइटी ने भारत प्रशासित कश्मीर में गुज़रे वर्षों में हुए कथित मानव अधिकारों के उल्लंघन को लेकर कई रिपोर्ट्स दाख़िल की हैं.

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अपने ठिकानों की तलाशी होने के एक दिन पहले ही परवेज़ ने जम्मू और कश्मीर में भारतीय नागरिकों को ज़मीन ख़रीदने का अधिकार देने वाले क़ानून के ख़िलाफ़ ट्वीट किया था.

गुरुवार को जिन संस्थानों पर छापा मारा गया, उनमें छह एनजीओ हैं.

इनमें दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन जफ़र उल-इस्लाम की अगुवाई वाला चैरिटी अलायंस, शब्बीर अहमद बाबा का अनंतनाग में ह्यूमन वेल्फ़ेयर फ़ाउंडेशन, फलहे आम ट्रस्ट, जेएंडके यतीम फ़ाउंडेशन, साल्वेशन मूवमेंट और जेएंडके वॉयस ऑफ़ विक्टिम्स शामिल हैं.

NIA

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8 अक्तूबर को आईपीसी और अनलॉफ़ुल एक्टिविटीज़ (प्रिवेंशन) एक्ट (यूएपीए) की अलग-अलग धाराओं के तहत एक केस दर्ज किया गया था.

अधिकारियों ने पीटीआई को बताया कि "यह केस उस पुख्ता सूचना के आधार पर दर्ज किया गया था जिसके मुताबिक़ कुछ ख़ास एनजीओ और ट्रस्ट देश में और विदेश से पैसा इकट्ठा कर रहे हैं और इस पैसे का इस्तेमाल चरमपंथी गतिविधियाँ चलाने में किया जा रहा है."

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पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की चीफ़ महबूबा मुफ़्ती ने एक ट्वीट कर कहा है कि "भारत सरकार का अभिव्यक्ति की आज़ादी और विरोध पर बुरा हमला. दुखद है कि एनआईए बीजेपी की पालतू एजेंसी बन गई है जो उनकी मर्जी से ना चलने वालों को धमकाने का काम कर रही है."

एनजीओ अथरूट ने कहा है कि एनआईए के अधिकारी उनके दफ़्तर आये और कुछ सवाल किये. इन्हें बेहद दोस्ताना और प्रोफ़ेशनल तरीक़े से पूछा गया और इन सभी सवालों के उचित और पारदर्शी तरीक़े से जवाब भी दिये गए.

एनआईए

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एनजीओ अथरूट कोरोना वायरस के दौरान पूरे कश्मीर में ऑक्सीज़न सिलेंडरों और ऑक्सीमीटर मुहैया कराने के काम में शामिल रहा है.

सीपीआईएम के राज्य सचिव और पूर्व एमएलए एम वाई तारिगामी ने बीबीसी को बताया, "इस बार नई चीज़ यह हो रही है कि एक डर का माहौल बनाया जा रहा है. अगर एनआईए और दूसरी एजेंसियों का न्याय-क्षेत्र असीमित रूप से फैल गया है तो इस तरह के क़दम के अच्छे परिणाम नहीं होंगे. हमारे यहाँ अदालतें हैं, हमारे यहाँ अलग-अलग क्षेत्रों को रेगुलेट करने के लिए कई क़ानून मौजूद हैं. एनआईए का इस्तेमाल न सिर्फ़ कश्मीर में बल्कि पूरे देश में एक राजनीतिक हथियार के तौर पर किया जा रहा है."

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