मोदी और शी जिनपिंग अगले महीने होंगे आमने-सामने - प्रेस रिव्यू

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लद्दाख में मई में तनाव की स्थिति पैदा होने के बाद पहली बार भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नवंबर में आमने-सामने होंगे.
अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, दोनों नेता 17 नवंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के ज़रिए ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होंगे.
रूस ने सोमवार को घोषणा की कि ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्ऱीका का 12वां ब्रिक्स सम्मेलन इस बार वर्चुअल माध्यम से होगा.
पिछले छह साल में कम से कम 18 बार मिल चुके मोदी और शी ने सीमा विवाद के बाद से एक-दूसरे से बात नहीं की है.
17 नवंबर से पहले दोनों के बीच कोई बैठक या फ़ोन कॉल तय नहीं है, हालांकि, अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि बातचीत होने की संभावना को ख़ारिज नहीं किया जा सकता है.
इससे पहले दोनों नेता 26 मार्च को तब एक प्लेटफॉर्म पर नज़र आए थे जब सऊदी अरब ने कोविड-19 महामारी को लेकर जी-20 देशों की वर्चुअल बैठक कराई थी.
मोदी और शी के पास जी-20 के प्लेटफॉर्म को फिर से साझा करने का एक और मौका होगा. दरअसल, हर साल ब्रिक्स सम्मेलन के बाद चार दिन का जी-20 सम्मेलन होता है. इस बार ये सम्मेलन 21-22 नवंबर को होना है.
सूत्रों का कहना है कि ब्रिक्स सम्मेलन, विवाद को सुलझाने का एक अवसर हो सकता है. जबकि दोनों पक्ष 17 नवंबर से पहले ही मसले का हल करने की कोशिश करेंगे.

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उमर ख़ालिद को सुरक्षा देने का दिया आदेश
दिल्ली की एक अदालत ने रविवार को जेएनयू के पूर्व छात्र उमर ख़ालिद को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दिया है. उमर को तीन दिन की पुलिस हिरासत के बाद फिर से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.
अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू अख़बार के मुताबिक़, अपने वकीलों रक्षंदा डेक और सांता कुमार के ज़रिए उमर ख़ालिद ने दोहराया कि उन्होंने पुलिस हिरासत में किसी बयान पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं.
उमर ने कोर्ट से अपील की थी कि न्यायिक हिरासत में उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई जाए. साथ ही चश्मा पहनने दिया जाए और वीडियो कॉल के ज़रिए तीस-तीस मिनट के दो लीगल इंटरव्यू करने की अनुमति दी जाए.
कोर्ट ने अनुमति दे दी और जेल सुप्रिटेंडेंट से कहा, "अभियुक्त/आवेदक को पर्याप्त सुरक्षा दी जाए और ये ध्यान रखा जाए कि उन्हें कोई नुक़सान ना पहुंचे और उनकी ओर से मांगी गई अन्य सुविधाएं भी दी जाएं."

हाथरस मामले में नेता, रिपोर्टर पर देशद्रोह का मामला
एक पत्रकार और एक नेता, जिनका अब तक नाम नहीं बताया गया है, ये दोनों उन अज्ञात लोगों में शामिल हैं जिनके ख़िलाफ़ उत्तर प्रदेश पुलिस ने देशद्रोह का मामला दर्ज किया है.
अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़, ये मामला हाथरस घटना में ग़लत जानकारी फैलाकर आपराधिक साज़िश रचने और दंगा भड़काने के आरोप में दर्ज किया है.
एफ़आईआर रविवार को चांपा पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई.
तीन अन्य एफ़आईआर भी हाथरस में दर्ज की गई हैं. जिनमें धारा 144 के उल्लंघन के लिए भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद समेत 680 लोगों को बुक किया गया है.
इससे पहले उत्तर प्रदेश में सोमवार को 19 एफ़आईआर दर्ज की गई थीं जिनमें गंभीर आरोप लगाए गए थे.
कम से कम 13 एफ़आईआर सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ी हैं, जिन्हें "शांति में खलल डालने की मंशा" रखने वाली बताया गया है.

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दिल्ली दंगे के अभियुक्त को मिली ज़मानत
दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगे के एक अभियुक्त को तीन मामलों में ज़मानत दे दी.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़, कोर्ट ने ये भी कहा कि मामले की जांच जारी है और जांच एजेंसी का मामले में नामज़द अन्य लोगों की पहचान करना और उन्हें गिरफ्तार करना अभी बाक़ी है.
ज़मानत के आदेश में लिखा है कि अभियुक्त के ख़िलाफ़ ऐसा कोई इलैक्ट्रॉनिक सबूत नहीं मिला है जिससे क्राइम सीन पर उसकी मौजूदी का पता चलता हो.

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शिव कुमार के परिसर पर छापे, 50 लाख बरामद
सीबीआई ने भ्रष्टाचार के एक मामले में कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष नेता डीके शिवकुमार से जुड़े कई परिसरों की तलाशी ली.
हिंदी दैनिक जन सत्ता अख़बार के मुताबिक़, तलाशी में सीबीआई ने अब तक 50 लाख रूपए बरामद किए हैं.
सीबीआई के अधिकारियों का आरोप है कि शिवकुमार ने कर्नाटक सरकार में मंत्री रहते कथित रूप से 74 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति अर्जित की, जो आय के ज्ञात स्त्रोतों से अलग है.
अधिकारियों के अनुसार सीबीआई आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में तीन राज्यों में डीके शिवकुमार से जुड़े 14 स्थानों पर तलाशी ले रही है.
तलाशी अभियान सोमवार दिन भर चला. सीबीआई ने एक अन्य एजेंसी से प्राप्त जानकारी के आधार पर शिवकुमार के ख़िलाफ़ नया मामला दर्ज किया है.
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