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राहुल तेवतिया: पहलवानों के गांव से निकला ज़बरदस्त क्रिकेटर?
- Author, राखी शर्मा
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 3 मिनट
आईपीएल सीज़न 13 की शुरुआत के दो सप्ताह पूरे होने वाले हैं. इस दौरान दो-दो बल्लेबाज़ों ने शतक भी ठोक दिया है लेकिन चर्चे राजस्थान रॉयल्स के राहुल तेवतिया के ही सबसे ज़्यादा हैं.
हालांकि इस सीज़न से पहले उनके बारे में शायद ही कोई जानता हो लेकिन महज़ एक पारी के बाद उनके नाम की धूम है और सोशल प्लेटफ़ॉर्म्स पर उनके फ़लोअरों की संख्या बढ़ती जा रही है.
आपको राहुल तेवतिया की उस पारी की याद दिला दें आपको जिसे वेस्टइंडीज़ के तेज़ गेंदबाज़ शेल्डन कॉट्रैल शायद ही कभी याद करना चाहें.
ये था आईपीएल-20 का नौवां मुक़ाबला, पंजाब के बनाए 223 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही राजस्थान की टीम के 17 ओवरों में तीन विकेट के नुक़सान पर 173 रन बना चुकी थी. क्रीज़ पर रॉबिन उथप्पा 9 रन बनाकर और राहुल तेवतिया 23 गेंदों में 17 रन बनाकर मौजूद थे.
फिर आया पंजाब के गेंदबाज़ शेल्डन कॉट्रेल का ओवर बैटिंग पर राहुल तेवतिया.
पहली गेंद- लॉन्ग लेग पर छक्का
दूसरी गेंद- ठीक उसी तरह एक और छक्का
तीसरी गेंद- लॉन्ग ऑफ़ पर छक्का
चौथी गेंद- मिड विकेट के ऊपर से छक्का
पांचवीं गेंद- डॉट बॉल
छठी गेंद- मिड विकेट के ऊपर से एक और छक्का
राहुल तेवतिया ने ना सिर्फ़ आईपीएल में अपनी पहली हाफ़ सेंचुरी लगाई बल्कि अपनी टीम को इस टी-20 लीग के इतिहास के सर्वाधिक रनों के लक्ष्य को भी हासिल करने में अहम भूमिका निभाई.
राहुल हरियाणा के सिही गांव से आते हैं. ये गांव सूरदास की जन्मभूमि और ऐसा माना जाता है कि महाभारत में पांडवों को मिलने वाले पाँच गावों में से यह गांव भी एक था.
राहुल के गांव में ज़्यादातर बच्चे हॉकी खेलते हैं या पहलवानी करते हैं. लेकिन राहुल का झुकाव बचपन से ही क्रिकेट की तरफ़ था.
राहुल के पिता किशनपाल तेवतिया बताते हैं, "दोस्तों के कहने पर मैं इसे आठ साल की उम्र में क्रिकेट अकादमी ले गया. राहुल के दादा पहलवानी करते थे और उनका सपना राहुल को भी पहलवान बनाने का था."
आठ साल की उम्र से राहुल फ़रीदाबाद में पूर्व भारतीय खिलाड़ी विजय यादव की अकादमी में प्रैक्टिस कर रहे हैं. विजय यादव उनके बारे में कहते हैं, "जब वो आया था तो अच्छी लेग स्पिन डालता था. हरियाणा के पास पहले से ही कई अच्छे लेग स्पिनर्स अमित मिश्रा या युजवेंद्र चहल के रूप में मौजूद हैं. ऐसे में उसके लिए आगे की राह मुश्किल थी."
"लेकिन राहुल में बैटिंग अबिलिटी नैचुरली है. तो मैंने उससे कहा कि बैटिंग उसे बाक़ी स्पिनर्स से अलग कर सकती है. इसके पास पावर है शॉट्स हिट करने की. उसे ये समझाने में थोड़ा वक़्त लगा."
लेकिन जब राहुल ने इस बात को गांठ बांध कर समझ लिया उसके बाद उनके खेल में बदलाव साफ़ दिख रहा है.
2013-14 में हरियाणा के लिए रणजी डेब्यू करने वाले राहुल ने आईपीएल का पहला सीज़न 2014 में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेला. राजस्थान की फ्रेंचाइज़ी नें तब उन्हें 10 लाख रूपसे में अपने साथ जोड़ा.
उनके पिता किशनपाल तेवतिया बताते हैं, "हरियाणा बनाम कर्नाटक के मैच में राहुल ने 90 रन बनाए थे. तब राहुल द्रविड़ ने उनके टैलेंट को पहचाना और कहा कि मैं इसे राजस्थान रॉयल्स टीम में शामिल करूंगा. आईपीएल में तब ये राजस्थान की टीम से खेला."
अगले सीज़न भी राजस्थान से खेलने के बाद 2016 में वो किसी टीम से नहीं खेल पाए. 2017 में 25 लाख रूपये में उन्हें पंजाब ने ख़रीदा. इसके बाद आईपीएल के 11वें सत्र के लिए उन्हें दिल्ली ने तीन करोड़ रूपये में लिया. लेकिन 2020 के ऑक्शन में दिल्ली ने उन्हें राजस्थान की टीम को इतनी बोली दे दिया.
राजस्थान की टीम के लिए फ़िलहाल तो ये फ़ायदे का सौदा ही साबित हो रहा है. राहुल ने पहले ही मैच में चेन्नई के ख़िलाफ़ तीन विकेट झटके और दूसरे मैच में पंजाब के ख़िलाफ़ 53 रन की पारी खेली. कोलकाता के ख़िलाफ़ वे कुछ ख़ास नहीं कर सके लेकिन इस सीज़न टीम की रणनीति में उनकी भूमिका बेहद अहम हो गई है.
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