चीन की नज़र मोदी समेत 10 हज़ार भारतीय शख्सियतों पर - प्रेस रिव्यू

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अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी दो महीने तक चली पड़ताल में पाया कि चीन की एक कंपनी 10 हज़ार भारतीय लोगों और संस्थाओं पर नज़र रखे हुई है.
'जुनख्वा डेटा इंफोर्मेशन टेक्नॉलॉजी को लिमिटेड' नाम की ये कंपनी शेनज़ेन में स्थित है और इसके संबंध चीन की सरकार और चाइनीज़ कॉम्युनिस्ट पार्टी से हैं.
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके परिवार, ममता बनर्जी, अशोक गहलोत, नवीन पटनायक, उद्धव ठाकरे से लेकर कैबिनट मंत्री राजनाथ सिंह, रवि शंकर प्रसाद, निर्मला सीतारमण, स्मृति इरानी इस लिस्ट में शामिल हैं.
इतना ही नहीं, चीफ़ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ बिपिन रावत, आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के 15 प्रमुखों से लेकर मुख्य न्यायाधीश शरद बोबडे, लोकपाल पीसी घोष, कैग प्रमुख जीसी मुर्मु, 'भारत पे' के संस्थापक निपुण मेहरा, उद्योगपति रतन टाटा और गौतम अडानी को भी ये कंपनी मॉनिटर कर रही है.
इनके अलावा कई बड़े पद वाले नौकरशाह, जज, वैज्ञानिक, पत्रकार, कार्यकर्ता और धार्मिक शख़्सियतों पर भी नज़र रखी जा रही है. ये कंपनी खुद दावा करती है कि ये चीन की खुफ़िया एजेंसी, सेना और सुरक्षा एजेंसियों के साथ काम करती है.
इंडियन एक्सप्रेस ने दिल्ली स्थित चीनी दूतावास के एक सूत्र से सवाल किया तो जवाब आया कि चीन ने किसी कंपनी या व्यक्ति से दूसरे देशों के डेटा या इंटेलिजेंस के बारे में जानकारी ना ही मांगी है और न मांगेगा.
अख़बार ने एक सितंबर को कंपनी की वेबसाइट पर मौजूद ईमेल आईडी पर सवाल भेजे थे लेकिन कोई जवाब नहीं आया बल्कि नौ सितंबर से वेबसाइट बंद कर दी गई.
इस तरह से कंपनी का डेटा रखना 'हाईब्रिड वारफेयर' का हिस्सा है जहां ग़ैर-सैन्य तरीकों को प्रभुत्व और प्रभावित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
दिल्ली दंगे: दर्ज बयानों में एक जैसी गलतियों ने पुलिस पर उठाए सवाल

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दिल्ली दंगों की जांच मामले में दो छात्रों के बयानों की बात हो रही है जिसके आधार पर फ़ाइल की गई सप्लिमेंट्री चार्जशीट में प्रोफ़ेसर जयति घोष और अपूर्वानंद का नाम आया है.
लेकिन टेलीग्राफ की ख़बर के मुताबिक गिरफ़्तार किए गए छात्रों के बयान में ये डिस्कलेमर है कि उन्होंने अपने बयान पर हस्ताक्षर करने से मना किया है. साथ ही बयान के बहुत से हिस्से हूबहू हैं, यहां तक की स्पेलिंग की गलतियां भी.
लेकिन इसके बावजूद भी दिल्ली पुलिस ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट में योगेंद्र यादव समेत बाक़ी लोगों का नाम लिख दिया. रविवार रात को इस चार्जशीट का कंटेट मीडिया के एक तबके को लीक किया गया लेकिन कई लोगों ने इस कंटेट की गलत व्याख्या की.
अख़बार ने लिखा है कि जिस तरह से इन लोगों का नाम सप्लिमेंट्र चार्जशीट में डाला गया और दोनों बयान एक तरह से 'कट-पेस्ट' नज़र आ रहे हैं, ये बात दिल्ली पुलिस पर कई सवाल खड़े करती है.
हालांकि दिल्ली पुलिस ने शनिवार को उन मीडिया रिपोर्ट्स को ख़ारिज किया है, जिनमें बताया गया था कि सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी, स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव, अर्थशास्त्री जयती घोष, डीयू के प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद और डॉक्युमेंट्री फ़िल्ममेकर राहुल रॉय के नाम दिल्ली दंगों की पूरक चार्जशीट में सह-साज़िशकर्ता के तौर पर हैं.
नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार को बनाया बिहार चुनाव के लिए एनडीए का चेहरा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार चुनावों के लिए प्रचार की शुरुआत कर दी है. उन्होंने नीतीश कुमार को ही एनडीए के चेहरे के रूप में आगे किया है.
प्रधानमंत्री ने एलपीजी सप्लाई के 900 करोड़ के प्रोजेक्ट का उद्घाटन करते हुए कहा कि नीतीश कुमार ने 'नए भारत नए बिहार' में बड़ी भूमिका निभाई है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी इस ख़बर के मुताबिक़ प्रधानमंत्री का ये बयान ऐसे वक्त में आया है जब उनकी अपनी पार्टी मे कई लोग नीतीश कुमार को लेकर सहमत नहीं थे, साथ ही राम विलास पासवान की पार्टी भी उनका विरोध कर रही थी.
प्रधानमंत्री ने कहा, "पिछले 15 साल में बिहार ने दिखाया है कि अगर सही सरकार राज्य को मिले तो सरकार की लाभकारी योजनाएं लोगों तक पहुंच सकती हैं."
भारत-चीन सीमा पर विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद कोई गतिविधि नहीं

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भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की रूस में 10 सितंबर को मुलाक़ात के बाद से एलएसी पर हर तरह की गतिविधियों और मूवमेंट पर विराम लग गया है.
द हिंदू की ख़बर के मुताबिक़ सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी(अनाम) ने बताया कि पेंगोंग त्सो के उत्तर और दक्षिणी तट इलाक़े में यथास्थिति बरक़रार की जा रही है.
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के मंत्रियों की मुलाक़ात के बाद पैंगोंग के दोनों तटों पर गतिविधि कम हो गई है. "अगर हम आज के परिदृश्य में कहें तो यथास्थिति का मतलब है कि एक हफ़्ते से वही पोज़िशन बरक़रार है और तीन-चार दिन से कोई और गतिविधि नहीं जुड़ी है. हम चीन से मांग करते आ रहे हैं कि अप्रैल से पहले की स्थिति बहाल करे."
'भारत-चीन तनाव का फ़ायदा उठा सकती हैं बाहरी ताकतें'- रूस

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रूस का कहना है कि भारत और चीन का तनाव बढ़ा तो बाहरी शक्तियां इसका ग़लत फ़ायदा उठा सकती हैं.
इकोनॉमिक टाइम्स से बात करते हुए रूस के उप-दूत ने कहा कि रूस चाहता है कि उसके स्वतंत्र साझेदार भारत और चीन के बीच अविश्वास ना हो.
"दोनों के बीच किसी तनाव को बढ़ावा नहीं देना चाहिए ताकि पड़ोसियों में शांति बनी रहे. ये क्षेत्रीय स्थिरता की बात है और जियोपॉलिटिक्स के लिए बाहरी ताकतें बढ़ते तनाव का ग़लत फ़ायदा उठा सकती हैं ताकि क्षेत्र में और अलगाव बढ़े."
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