रूस के विपक्षी नेता और पुतिन के आलोचक नवेलनी कोमा से बाहर, फ़्लाइट में दिया गया था ज़हर-आज की बड़ी ख़बरें

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रूस के विपक्षी नेता एलेक्सी नवेलनी कोमा से बाहर आ चुके हैं, डॉक्टरों का कहना है कि उनकी हालत में सुधार हो रहा है.

नवेलनी को 'नोविचोक नर्व एजेंट' ज़हर दे कर मारने की कोशिश की गई थी. उनका इलाज बर्लिन के एक अस्पताल में चल रहा है.

44 वर्षीय नवेलनी की पिछले महीने साइबेरिया से मॉस्को की उड़ान के दौरान तबीयत ख़राब हो गई थी, जिसकी वजह से विमान को रास्ता बदलकर, रूस के ओम्स्क शहर में आपातकालीन उतरना पड़ा था.

भारत ने किया हाइपरसोनिक तकनीक का सफल परीक्षण

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ ने हाइपरसोनिक तकनीक का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है.

भारत में तैयार किए गए हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमोनस्ट्रेटर व्हीकल (एचएसटीडीवी) का लंबी दूरी की मिसाइलों और हाइपरसोनिक मिसाइलों को ले जाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा.

सोमवार को उड़ीसा के व्हीलर आइलैंड स्थित डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम प्रक्षेपण केंद्र से इसे सफलतापूर्वक भेजा गया.

डीआरडीओ ने इस मौक़े पर कहा कि इस मिशन के ज़रिए डीआरडीओ ने जटिल तकनीक को लेकर अपनी क्षमता दिखाई है और ये नेक्सटजेन(उन्नत) हाइपरसोनिक व्हीकल बनाने के लिए एक नींव की तरह काम करेगा.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर डीआरडीओ को बधाई दी है.

नई शिक्षा नीति, 2020 पर क्या बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

"हम भारत को 21वीं सदी में ज्ञान पर आधारित अर्थव्यवस्था बनाना चाहते हैं."

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यपालों के वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रतिभा पलायन से लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के कैंपस भारत में स्थापित करने तक की बात कही है.

उन्होंने अपने संबोधन में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के मन में उठ रहे सवालों का जवाब देने की कोशिश की. इस कार्यक्रम में राज्यपालों के अलावा, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, शिक्षा मंत्री रमेश पोखरिया निशंक भी शामिल थे.

प्रधानमंत्री ने क्या-क्या कहा

  • देश की आकांक्षाओं को पूरा करने का महत्वपूर्ण माध्यम शिक्षा नीति और शिक्षा व्यवस्था होती है. शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी से केंद्र, राज्य सरकार, स्थानीय निकाय, सभी जुड़े होते हैं. लेकिन ये भी सही है कि शिक्षा नीति में सरकार, उसका दखल, उसका प्रभाव, कम से कम होना चाहिए.
  • शिक्षा नीति से जितना शिक्षक, अभिभावक जुड़े होंगे, छात्र जुड़े होंगे, उतना ही उसकी प्रासंगिकता और व्यापकता, दोनों ही बढ़ती है. देश के लाखों लोगों ने, शहर में रहने वाले, गांव में रहने वाले, शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने, इसके लिए अपना फीडबैक दिया था, अपने सुझाव दिए थे.
  • गांव में कोई शिक्षक हो या फिर बड़े-बड़े शिक्षाविद, सबको राष्ट्रीय शिक्षा नीति, अपनी शिक्षा शिक्षा नीति लग रही है. सभी के मन में एक भावना है कि पहले की शिक्षा नीति में यही सुधार तो मैं होते हुए देखना चाहता था. ये एक बहुत बड़ी वजह है राष्ट्रीय शिक्षा नीति की स्वीकारता की.
  • आज दुनिया भविष्य में तेजी से बदलते जॉब्स, उनके तौर-तरीकों को लेकर चर्चा कर रही है. ये पॉलिसी देश के युवाओं को भविष्य की आवश्यकताओं के मुताबिक ज्ञान और कुशलता, दोनों मोर्चों पर तैयार करेगी. नई शिक्षा नीति, पढ़ने के बजाय सीखने पर फोकस करती है और पाठ्यक्रम से और आगे बढ़कर क्रिटिकल थिंकिंग पर ज़ोर देती है. इस पॉलिसी में प्रोसेस से ज्यादा पैशन, व्यावहारिकता और प्रदर्शन पर बल दिया गया है.
  • इसमें फाउंडेशन लर्निंग और भाषाओं पर भी फोकस है. इसमें लर्निंग आउटकम्स और टीचर ट्रेनिंग पर भी फोकस है. इसमें एक्सेस और मूल्यांकन को लेकर भी व्यापक रिफॉर्म्स किए गए हैं. इसमें हर छात्र को सशक्त करने का रास्ता दिखाया गया है.
  • लंबे समय से ये बातें उठती रही हैं कि हमारे बच्चे बैग और बोर्ड एग्ज़ाम के बोझ तले, परिवार और समाज के दबाव तले दबे जा रहे हैं. इस पॉलिसी में इस समस्या को प्रभावी तरीके से उठाया किया गया है.
  • 21वीं सदी में भी भारत को हम एक ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था बनाने के लिए प्रयासरत हैं. नई शिक्षा नीति ने प्रतिभा पलायन से निपटने के लिए और सामान्य से सामान्य परिवारों के युवाओं के लिए भी सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के कैंपस भारत में स्थापित करने का रास्ता खोला है.
  • जब किसी भी सिस्टम में इतने व्यापक बदलाव होते हैं, तो कुछ शंकाएं-आशंकाएं स्वाभाविक ही हैं. माता-पिता को लगता होगा कि अगर इतनी आज़ादी बच्चों को मिलेगी, अगर स्ट्रीम खत्म हो जाएंगी तो आगे कॉलेज में उनको दाखिला कैसे मिलेगा, करियर का क्या होगा? प्रोफेसर्स, टीचर्स के मन में सवाल होंगे कि वो खुद को इस बदलाव के लिए तैयार कैसे कर पाएंगे? इस प्रकार का पाठयक्रम कैसे मैनेज हो पाएगा? आप सभी के पास भी अनेक सवाल होंगे, जिन पर आप चर्चा भी कर रहे हैं.
  • ये सभी सवाल महत्वपूर्ण हैं, हर सवाल के समाधान के लिए सब मिलकर काम कर रहे हैं. शिक्षा मंत्रालय की तरफ से भी लगातार संवाद जारी है. राज्यों में हर स्टेकहोल्डर की पूरी बात,हर राय को खुले मन से सुना जा रहा है. आखिर हम सभी को मिलकर ही तो तमाम शंकाओं और आशंकाओं का समाधान करना है.
  • ये शिक्षा नीति, सरकार की शिक्षा नीति नहीं है. ये देश की शिक्षा नीति है. जैसे विदेश नीति देश की नीति होती है, रक्षा नीति देश की नीति होती है, वैसे ही शिक्षा नीति भी देश की ही नीति है. कोई भी सिस्टम, उतना ही असरदार और संपूर्ण हो सकता है, जितना बेहतर उसका गवर्नेंस मॉडल होता है. यही सोच एजुकेशन से जुड़ी गवर्नेंस को लेकर भी ये पॉलिसी रिफ्लेक्ट करती है.

संक्रमण के मामलों में भारत ने ब्राज़ील को पीछे छोड़ा

भारत में पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 90,802 नए मामले रिपोर्ट हुए हैं. इसके साथ ही देश में कुल संक्रमितों की संख्या 42 लाख से ज़्यादा हो गई है. दुनिया भर में इस समय भारत ब्राज़ील को पीछे छोड़कर कोरोना संक्रमण से दूसरा सबसे ज़्यादा प्रभावित देश बन गया है.

पिछले सात दिनों से भारत में हर दिन 75 हज़ार से ज़्यादा कोरोना संक्रमण के नए मामले रिपोर्ट किए जा रहे हैं. अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के इरादे से जब से सरकार ने लॉकडाउन की पाबंदियां हटाई हैं, कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं.

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने सोमवार को बताया, "पिछले 24 घंटों में देश में कोरोना महामारी के कारण 1016 लोगों की मौत हुई है. कोरोना संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 42,04,614 हो गई है जिनमें 882,542 सक्रिय मामले हैं."

भारत में कोरोना से संक्रमित होने के बाद 32,50,429 लोग ठीक भी हुए हैं. इस महामारी ने अब तक 71,642 लोगों की जान ले ली है. देश में महाराष्ट्र कोरोना संकट से सबसे ज़्यादा जूझ रहे राज्यों में से एक है जहां रविवार को 23,350 नए मामले रिपोर्ट हुए हैं.

महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमितों की संख्या नौ लाख से ज़्यादा हो गई है.

राज बब्बर और जितिन प्रसाद को कांग्रेस कमेटियों में जगह नहीं

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के सिलसिले में कांग्रेस ने रविवार को सात अलग-अलग कमेटियों की घोषणी की है. गौर करने वाली बात ये है कि जितिन प्रसाद और राज बब्बर जैसे नेताओं के नाम इन कमेटियों से ग़ायब हैं.

जितिन प्रसाद और राज बब्बर कांग्रेस पार्टी के उन 23 वरिष्ठ नेताओं में शामिल थे जिन्होंने पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को कांग्रेस में सुधार के मुद्दे पर पत्र लिखा था.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़ कांग्रेस की इन कमेटियों में उन नेताओं को जगह दी गई है जिन्होंने चिट्ठी लिखने वाले नेताओं के समूह की अगुवाई कर रहे गुलाम नबी आज़ाद पर कार्रवाई करने की मांग की थी. इनमें प्रमोद तिवारी, सलमान खुर्शीद, पीएल पूनिया जैसे नेताओं के नाम अहम हैं.

आरपीएन सिंह और राजीव शुक्ला भी कांग्रेस की इन कमिटियों में जगह नहीं बना पाए हैं. हालांकि राज बब्बर ने पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति से खुद को दूर रखा है लेकिन जितिन प्रसाद ब्राह्मण समुदाय के मुद्दे को लेकर लगातार मुखर रहे हैं.

इससे पहले कांग्रेस पार्टी में 'नए नेतृत्व और बड़े स्तर पर बदलाव' को लेकर पार्टी के भीतर से आवाज़ उठी थीं. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ कांग्रेस पार्टी में बड़े बदलाव को लेकर पार्टी के 23 वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी की मुखिया सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी के भीतर शीर्ष से लेकर नीचे तक बड़े बदलाव की बात कही है.

साल 2014 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस पार्टी का पतन लगातार जारी है और इसके बाद से पार्टी अपनी वापसी नहीं कर पाई है. जिन 23 वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी को पत्र लिखा है, उनमें पाँच पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस वर्किंग कमेटी के कई सदस्य, मौजूदा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शामिल हैं.

पार्टी के शीर्ष नेताओं ने अपने पत्र में भाजपा के उदय की बात स्वीकार की है और इस बात को माना है कि देश के युवाओं ने निर्णायक रूप से नरेंद्र मोदी को अपना वोट दिया है.

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