जीतनराम मांझी महागठबंधन से अलग हुए, बिहार में राजद को झटका- आज की बड़ी ख़बरें

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बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेतृत्व वाले महागठबंधन को झटका लगा है. पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के नेतृत्व वाले हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा ने अपने को महागठबंधन से अलग होने का ऐलान किया है.

लोकसभा चुनाव से पहले जीतनराम मांझी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) छोड़कर महागठबंधन में चले गए थे. लेकिन पिछले कुछ समय से महागठबंधन में दरार की ख़बरें आ रही थी.

पटना में हुई पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में ये फ़ैसला हुआ. पार्टी के विधान पार्षद और जीतनराम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन ने बताया कि अभी पार्टी ने कोई फ़ैसला नहीं किया है कि वो चुनाव में किसके साथ जाएगी.

उन्होंने बताया कि इस बारे में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं से बातचीत करके ही कोई फ़ैसला किया जाएगा.

राम मंदिर की दीवारों पर इस तरह नाम लिखवा सकते हैं श्रद्धालु

श्री राम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण कार्य प्रारंभ हो गया है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के आधिकारिक ट्विटर हैंडल द्वारा इसकी जानकारी दी गई है.

बताया गया है कि रुड़की के सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट और आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर निर्माणकर्ता कंपनी एल एंड टी इंजीनियर जन्मभूमि की मिट्टी के परीक्षण के कार्य में लगे हुए हैं.

मंदिर निर्माण कार्य में लगभग 36-40 महीने का समय लगने का अनुमान है.

मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, राम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण भारत की प्राचीन निर्माण पद्धति से किया जा रहा है ताकि वो सैकड़ों वर्षों तक ना केवल खड़ा रहे, बल्कि भूकंप अथवा अन्य किसी प्रकार की आपदा में भी मंदिर को किसी प्रकार की क्षति ना हो.

जानकारी दी गई है कि मंदिर के निर्माण में लोहे का प्रयोग नहीं किया जाएगा.

मंदिर निर्माण में लगने वाले पत्थरों को जोड़ने के लिए तांबे की पत्तियों का उपयोग किया जायेगा.

निर्माण कार्य हेतु 18 इंच लंबी, 3 मिलीमीटर गहरी और 30 मिलीमीटर चौड़ी 10,000 पत्तियों की आवश्यकता पड़ेगी.

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया है कि वो तांबे की पत्तियाँ दान करें.

ट्रस्ट के मुताबिक़, इन तांबे की पत्तियों पर दानकर्ता अपने परिवार, क्षेत्र अथवा मंदिरों का नाम गुदवा सकते हैं. इस प्रकार से ये तांबे की पत्तियां ना केवल देश की एकात्मता का अभूतपूर्व उदाहरण बनेंगी, बल्कि मंदिर निर्माण में संपूर्ण राष्ट्र के योगदान का प्रमाण भी देंगी.

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