एच-1बी वीज़ा: अमरीका लौट सकेंगे धारक, भारतीयों को भी राहत - आज की बड़ी ख़बरें

डोनाल्ड ट्रंप

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अमरीका की ट्रंप ने एच-1बी वीज़ा धारकों के लिए कुछ नियमों में ढील दी है. अब एच-1बी वीजा धारकों को अमरीका में प्रेवश की अनुमति मिल पाएगी.

हालांकि इस नियम के मुताबिक ये छूट सिर्फ़ उन्हें मिलेगी जो उन्हीं नौकरियों के लिए वापस आ रहे हैं जिनमें वो वीज़ा प्रतिबंध से पहले काम कर रहे थे.

अमरीकी विदेश मंत्रालय की एडवाइज़री के मुताबिक प्राथमिक वीज़ा धारक के साथ आश्रितों (पत्नी और बच्चे) को यात्रा करने की अनुमति दी जाएगी.

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने तकनीकी विशेषज्ञों, वरिष्ठ-स्तर के प्रबंधकों और अन्य श्रमिकों को भी यात्रा की अनुमति दी है, जिनके पास एच-1बी वीजा है और जिनकी यात्रा अमरीका के आर्थिक हालात में तत्काल और निरंतर सुधार के लिए ज़रूरी है.

कोरोना वायरस और लॉकडाउन के बीच अमरीकी सरकार ने कई अमरीकी वीज़ा प्रोग्राम पर रोक लगा दी थी. इसके चलते कई वीज़ा धारकों के लिए मुश्किल खड़ी हो गई थी. उन्हें नौकरी भी छोड़नी पड़ी थी. इस फ़ैसले के लिए ट्रंप प्रशासन की काफ़ी आलोचना भी हुई थी.

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अवमानना क़ानून को चुनौती देने वाली याचिका वापस

वरिष्ठ पत्रकार एन राम, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरूण शौरी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने आपराधिक अवमानना से जुड़े एक क़ानूनी प्रावधान- धारा 2(सी)(i) की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका वापस ले ली है.

तीनों ने अपनी याचिका में 'अदालत की निंदा' के लिए आपराधिक अवमानना से जुड़े इस क़ानूनी प्रावधान की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी और कहा था कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और समानता के अधिकार का उल्लंघन है.

अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 2(सी)(i) को चुनौती देते हुए इन्होंने कहा था कि यह अस्पष्ट, व्यक्तिपरक और साफ़ तौर पर मनमाना क़ानून है.

पहले यह मामला 10 अगस्त को सुनवाई के लिए जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस जोसेफ़ की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था.

स्थानीय मीडिया में ऐसी ख़बरें भी आई थीं कि सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार इस याचिका पर शनिवार को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिये सुनवाई होनी थी, लेकिन बाद में इसे वेबसाइट से हटा दिया गया.

बताया गया कि 'परंपरा और प्रक्रिया' के मुताबिक़ इस मामले को ऐसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाना चाहिए था जो इस तरह के मामलों की पहले से सुनवाई कर रही हो, लेकिन इसे परंपरा और प्रक्रिया की अनदेखी कर सूचीबद्ध किया गया था.

अब ख़बर आई है कि इस याचिका को वापस ले लिया गया है.

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