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नई शिक्षा नीति-2020: विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए खुले भारत के दरवाज़े - प्रेस रिव्यू
नई शिक्षा नीति के तहत भारत ने अब विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए अपने दरवाज़े खोल दिए हैं. दुनिया के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय अब देश में अपने कैम्पस खोल सकेंगे. बिज़नेस स्टैंडर्ड ने इस ख़बर को अपने पहले पन्ने पर प्रकाशित किया है.
हालांकि विशेषज्ञों के मुताबिक़ ये नहीं कहा जा सकता कि ये बदलाव ज़मीन पर जल्द उतर पाएगा या नहीं, लेकिन कइयों को ये ज़रूर लगता है कि भारत में शीर्ष 200 विदेशी विश्ववविद्यालय खुलने से यहां की उच्च शिक्षा का स्तर भी बढ़ जाएगा. कई लोगों का ये भी मानना है कि इससे प्रतिभा पलायन रोकने में भी मदद मिलेगी.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, विदेश विश्वविद्यालयों को देश में लाने पर सरकार का मौजूदा रुख बीजेपी के पुराने उस स्टैंड से बिल्कुल उलट है, जो वो यूपीए-2 सरकार द्वारा विदेशी शिक्षण संस्थानों पर लाए गए (रेगुलेशन ऑफ एंट्री एंड ऑपरेशन) बिल 2010 पर रखती थी.
देश के वामपंथी नेताओं समेत पीएम मोदी की सत्ताधारी पार्टी भी पूर्ववर्ती सरकारों के विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अनुमति देने के प्रयासों का विरोध करती रही है.
लेकिन कई सरकारी अधिकारी ये कदम उठाने पर ज़ोर देते रहे, क्योंकि हर साल साढ़े सात लाख से ज़्यादा भारतीय छात्र अरबों डॉलर खर्च करके विदेशों में पढ़ते हैं.
बुधवार को उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे ने पत्रकारों को बताया कि सरकार विश्व के सर्वोच्च रैंक वाले विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस खोलने का अवसर देगी.
जागरण लिखता है कि हालांकि इस फ़ैसले के आलोचकों का ये भी कहना है कि सर्वोच्च श्रेणी के विश्वविद्यालय भारत में अपने परिसर क्यों खोलना चाहेंगे, जब भारत सरकार ने अपनी नई शिक्षा नीति के तहत फीस की अधिकतम सीमा निर्धारित कर दी है. यानी अब विश्वविद्यालय मुँहमांगी रकम नहीं बटोर सकेंगे. साथ ही नई शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा संस्थानों को फ़ीस चार्ज करने के मामले में और पारदर्शिता लानी होगी.
नई शिक्षा नीति में सरकार ने आरएसएस की कितनी बात मानी?
नई शिक्षा नीति को लेकर हुए व्यापक परामर्श में एक प्रमुख आवाज़ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस की थी.
आरएसएस से जुड़े कई लोग ड्राफ्टिंग की प्रक्रिया में शामिल थे. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, आरएसएस के पदाधिकारियों, कुछ बीजेपी शासित राज्य के शिक्षा मंत्रियों, सरकार के प्रतिनिधियों और नईपी की ड्राफ्टिंग कमिटी के चेयरमैन के कस्तूरीरंगन के बीच बैठकें हुई थीं.
लेकिन बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने जिस फाइनल पॉलिसी को मंज़ूरी दी, वो दिखाती है कि सरकार राजनीतिक मध्य मार्ग पर चली.
संघ की बातें ज़्यादा सांकेतिक तौर पर मानी गईं, जैसे मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया.
आरएसएस की बड़ी मांगों से सरकार ने फिलहाल किनारा ही रखा. मिसाल के तौर पर नई शिक्षा नीति तीन-भाषा के फॉर्मूले पर बनी है.
सरकार ने उस प्रावधान को हटा दिया, जिसमें निर्धारित किया गया था कि छात्रों को 6 ग्रेड में हिंदी को एक भाषा के तौर पर पढ़ना चाहिए. दरअसल राजनीतिक पार्टियों, मुख्य रूप से तमिलनाडु की पार्टियों ने इस प्रावधान का विरोध किया था. वो इसे "हिंदी" थोपना कह रहे थे.
जम्मू कश्मीर में 4जी बैन 19 अगस्त तक बढ़ा
हाई स्पीड 4जी इंटरनेट बहाल करने के गवर्नर जी सी मूर्मू के संकेत के कुछ दिन बाद केंद्र प्रशासित राज्य के प्रशासन ने बैन को 19 अगस्त तक बढ़ा दिया. बैन को आगे बढ़ाए जाने के पीछे राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों को वजह बताया गया है.
गृह विभाग की ओर से जारी बयान के मुताबिक़, "इनपुट मिले हैं कि आने वाले हफ़्तों में राष्ट्र-विरोधी गतिविधियां बढ़ सकती हैं, क्योंकि जम्मू-कश्मीर में किए गए संवैधानिक बदलावों (पांच अगस्त) को एक साल होने जा रहा है, साथ ही स्वतंत्रता दिवस आ रहा है."
ऑर्डर में शक़ जताया गया है कि चरमपंथी गतिविधियों की प्लानिंग और उसे अंजाम देने में, देश विरोधी विचारधाराओं को बढ़ावा देने, युवाओं को चरमपंथ से जुड़ने के लिए बहकाने, घुसपैठ कराने के लिए सीमा पार हैंडलर्स से बातचीत के लिए 4 जी इंटरनेट का ग़लत इस्तेमाल हो सकता है.
राजस्थान विधान सभा का सत्र 14 अगस्त से
द हिंदू अख़बार के मुताबिक़, राजस्थान में विधान सभा को लेकर राजभवन और सरकार के बीच जारी गतिरोध ख़त्म हो गया है.
सरकार के संशोधित प्रस्ताव पर राज्यपाल कलराज मिश्र ने विधान सभा सत्र 14 अगस्त से बुलाने पर मंज़ूरी दे दी है.
राजभवन के प्रवक्ता के अनुसार राज्यपाल ने राजस्थान विधान सभा के पांचवें सत्र को मंत्रिमंडल द्वारा भेजे गए 14 अगस्त से आरंभ करने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है.
प्रवक्ता ने बताया कि राज्यपाल ने विधान सभा में सत्र के दौरान कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए आवश्यक प्रबंध किए जाने के निर्देश मौखिक रूप से दिए हैं.
कोरोना काल में आईपीएल
स्टेडियम में कोई दर्शक नहीं, कम से कम शुरुआती वक़्त में. कॉमेंटेटर स्टूडियो में छह फीट की दूरी पर बैठेंगे. ड्रेसिंग रूम में 15 से ज़्यादा खिलाड़ी नहीं होंगे. मैच के बाद अवॉर्ड प्रेज़ेंटेशन में सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखना होगा. और खिलाड़ियों को दो हफ़्ते में चार कोविड टेस्ट कराने होंगे.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, ये कुछ अहम स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी एसओपी के बिंदु हैं. जिन्हें बीसीसीआई ने तैयार किया है. जल्द ही इन्हें टी20 टूर्नामेंट के लिए आईपीएल फ्रैंचाइज़ी मालिकों को भेजा जाएगा. ये टूर्नामेंट सिंतबर से नवंबर के बीच संयुक्त अरब अमीरात में होने की संभावना है.
आईपीअल-13 की जगह बदलकर यूएई किए जाने को अभी तक सरकार की मंज़ूरी नहीं मिली है. लेकिन बीसीसीआई की अपील पर एमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड ने इस इवेंट को कराने में रूचि दिखाई है.
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