छत्तीसगढ़: गोबर खरीदने को लेकर संघ और बीजेपी के बीच अंतरविरोध क्यों?

    • Author, तारेंद्र किशोर
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 5 मिनट

हाल ही में छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने किसानों से डेढ़ रुपये प्रति किलो के हिसाब से गोबर खरीदने का फ़ैसला लिया था. 'गोधन न्याय योजना' के नाम से शुरू होने वाली इस योजना की शुरुआत अब 21 जुलाई से हो चुकी है.

इसकी शुरुआत के लिए हरेली त्योहार का दिन चुना गया है. यह त्यौहार पारंपरिक रूप से खेती-किसानी से जुड़ा हुआ है. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सांकेतिक रूप से गोबर खरीद कर इसकी शुरुआत की.

इसके बाद भूपेश बघेल ने ट्वीट कर यह भी जानकारी दी कि पहले दिन इस योजना के तहत राज्य में कितने किलो गोबर की खरीदारी की गई.

उन्होंने ट्वीट किया कि, "आप सभी प्रदेशवासियों को बताते हुए संतोष हो रहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वकांक्षी छत्तीसगढ़ गोधन न्याय योजना के पहले दिन ही राज्य के एक हज़ार 642 गौठानों में करीब दो हज़ार क्विंटल गोबर खरीदी गई है. राज्य के 11 हज़ार 277 पशुपालकों ने गौठानों में आज गोबर को बेचा है."

छत्तीसगढ़ सरकार के इस कदम से उम्मीद की जा रही है कि किसानों और पशुपालकों को लाभ मिलेगा. हालांकि विपक्षी दल बीजेपी के नेताओं ने भूपेश बघेल सरकार के इस कदम की आलोचना की है.

पूर्व मंत्री और कुरुद से बीजेपी विधायक अजय चंद्राकर ने योजना पर सवाल उठाते हुए ट्वीट किया है, "छत्तीसगढ़ में सिर्फ दो लोग किसान हैं और किसानी जानते हैं माननीय मुख्यमंत्री जी और माननीय कृषि मंत्री जी, बाकी सब??? बारिश में कौन किसान "गोबर खाद" का उपयोग करता है... ये दोनों महाशय ही बताएंगे... फिर आगे क्या होगा.... अभी कहने की ज़रूरत नहीं है."

लेकिन वहीं वैचारिक रूप से बीजेपी से क़रीब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े लोगों ने छत्तीसगढ़ सरकार के इस कदम की सराहना की है.

आरएसएस से जुड़े लोगों ने जिस तरह से छत्तीसगढ़ सरकार के इस फै़सले का स्वागत किया है और बीजेपी के नेता लगातार इसके विरोध में बयान दे रहे हैं. उसे देखकर साफ़ तौर पर ज़ाहिर हो रहा है कि गोधन न्याय योजना पर बीजेपी और आरएसएस के लोगों के बीच मतभेद है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ आरएसएस से जुड़े लोगों के एक दल ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात कर इस योजना के लिए बधाई भी दी है.

गौ ग्राम स्वावलंबन अभियान ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू से मिलकर इस निर्णय के लिए अभिनंदन किया है. इस अभियान के संरक्षक बिसराराम यादव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संघचालक हैं.

छत्तीसगढ़ राज्य के प्रांत संघचालक बिसराराम यादव ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए.

वो कहते हैं, "कांग्रेस ने किया है इसलिए विरोध करना ज़रूरी नहीं है. जब बीजेपी कुछ करती है तो कांग्रेस विरोध करती है और कांग्रेस कुछ करती है तो बीजेपी विरोध करती है. काम के गुण को नहीं देखा जाता है. राजनीतिक पार्टियों का अपना-अपना नज़रिया है. उसमें हम क्या कर सकते हैं. जो अच्छी बात होगी उसका हम स्वागत तो करेंगे ही. हम कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है."

वो आगे बताते हैं, "हम लोग गौ ग्राम स्वावलंबन अभियान और गौ संरक्षण अभियान चलाते हैं. हमें ऐसा लगता है कि यह योजना हमारे इस दोनों ही अभियान में सहायक होगी."

इस पूरे मामले पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता शैलेश नितिन त्रिवेदी बीबीसी से बातचीत में कहते हैं कि बीजेपी सिर्फ़ विरोध के लिए इस योजना का विरोध कर रही है.

वो कहते हैं, "यह एक ऐसी योजना है जिससे राज्य के किसानों, पशुपालकों और मजदूरों को लाभ होने वाला है. छत्तीसगढ़ की 90 प्रतिशत जनसंख्या अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर करती है. भारतीय जनता पार्टी का विरोध पूरी तरह से ग़लत है. यह सिर्फ विरोध के लिए विरोध है. यह बीजेपी की नाकारात्मक और छत्तीसगढ़ विरोधी मानसिकता को दर्शाता है."

वो आगे कहते हैं, "आरएसएस ज़रूर इस योजना को लेकर उलझन में पड़ गया है. चूंकि आरएसएस शुरू से गाय और हिंदुत्व की बात करता रहा और इस योजना की वजह से अब इन मापदंडों के आधार पर विरोध का अब कोई कारण नहीं बन पा रहा है इसलिए आरएसएस के कुछ लोग खुलकर और बहुत सारे लोग अंदर ही अंदर प्रदेश सरकार की प्रशंसा कर रहे हैं लेकिन बीजेपी जरूर विरोध के लिए विरोध कर रही है. ये दोनों आपस में इस मुद्दे को लेकर अंतरविरोध का शिकार हो रहे हैं."

छत्तीसगढ़ में आरएसएस और बीजेपी के बीच का यह अंतरविरोध क्या लंबा खींचने वाला है? शैलेश नितिन त्रिवेदी को ऐसा नहीं लगता कि यह अंतरविरोध लंबा खींचने वाला है.

वो कहते हैं, "आरएसएस तो बीजेपी का पितृ संगठन है जो बीजेपी में संगठन मंत्री होते हैं, वो आरएसएस के पूर्णकालिक कार्यकर्ता ही होते हैं. इसलिए मुझे नहीं लगता कि इन दोनों में यह अंतरविरोध लंबा खींचेगा लेकिन निश्चित तौर पर दोनों ही संगठनों में एक असहज स्थिति तो बनी ही है. हमें लेकिन उनके इस अंतरविरोध से कोई सरोकार नहीं है."

छत्तीसगढ़ की राजनीति पर लंबे समय से नज़र रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार ललित सुरजन की राय लेकिन इस पूरे प्रकरण पर अलग है. बीबीसी से बातचीत में मानते हैं कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को संघ के लोगों से नहीं मिलना चाहिए था.

वो कहते हैं, "बीजेपी और संघ एक ही है लेकिन वो अपने-अपने हिसाब से अपनी स्थिति लेते रहते हैं. दोनों में कोई फर्क नहीं देखा जाना चाहिए. दूसरी बात यह कि कोई ख़बर सिर्फ़ आज की भले ही होती है लेकिन कुछ सालों के बाद अलग संदर्भ में उसे देखा जाने लगता है. कुछ सालों के बाद संघ के लोग ही कहने लगेंगे कि देखिए ये कांग्रेस के मुख्यमंत्री हमारे कार्यकर्मों से भी जुड़ाव रखते हैं. एक तरह से वो उनका उल्टा प्रचार करने लगते है."

"संघ के लोग गांधीजी को लेकर इस तरह के दुष्प्रचार करते रहे हैं कि गांधीजी उनके किसी कार्यक्रम में आए थे. इसलिए कांग्रेस के मुख्यमंत्री को तो संघ के लोगों से मिलना भी नहीं चाहिए था और साफ तौर पर मना कर देना चाहिए था."

वो आगे कहते हैं कि बीजेपी चूंकि छत्तीसगढ़ में मुख्य विपक्षी पार्टी है इसलिए कांग्रेस कुछ अच्छा काम भी करेगी तो बीजेपी उसका विरोध करेगी. यह बहुत स्वाभाविक है.

वो कहते हैं, "जहाँ तक संघ के समर्थन की बात है तो वो यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि देखिए कांग्रेस का मुख्यमंत्री भी हमारे ही विचारधारा पर चल रहा है. कल को वो यह भी कहना शुरू कर देंगे कि देखिए भूपेश बघेल ने हमारे कहने पर योजना शुरू की थी. इसलिए भूपेश बघेल को इस मामले में सावधानी बरतनी चाहिए थी."

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