तमिलनाडु: बाप-बेटे की हिरासत में मौत का वीडियो क्यों हटाया गया?

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इमेज कैप्शन, सुचित्रा रामादुराई
    • Author, एंड्रयू क्लेरेंस
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 4 मिनट

हाल ही में तमिलनाडु में एक बाप-बेटे की हिरासत में हुई मौत से जुड़ा एक वीडियो वायरल हुआ था. इंस्टाग्राम पर डाले गए इस वीडियो की वजह से देश भर में यह मामला सुर्खियों में आ गया था. सुचित्रा रामादुराई ने यह वीडियो डाला था जो कि एक रेडियो जॉकी और गायिका हैं.

लेकिन अब उन्होंने अपना यह वीडियो हटा लिया है. इस वीडियो को भारत और दुनिया भर में लाखों लोगों ने देखा था.

उन्होंने वीडियो की शुरुआत इस लाइन से की थी, "हाय, मैं सुचित्रा हूँ और मैं एक दक्षिण भारतीय हूँ. मैं इस बात से नफरत करती हूँ कि क्यों दक्षिण भारत का कोई मुद्दा सिर्फ़ दक्षिण भारत का ही मुद्दा बन कर रह जाता हूँ क्योंकि हम इसके बारे में अंग्रेजी में बात नहीं करते."

आरोप है कि पुलिस ने लॉकडाउन में देर तक दुकान खोलने के आरोप में 58 साल के पी जयराज और 38 साल के उनके बेटे बेनिक्स को गिरफ़्तार किया और हवालात में पीटा. बाद में पिता को छुड़ाने आए पुत्र को भी बुरी तरह पीटा गया. तमिलनाडु में अब भी कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन लागू है.

जयराज और बेनिक्स को पूरी रात पुलिस हिरासत में रखा गया था. दो दिन बाद दोनों की मौत हो गई. दोनों की मौत के बीच केवल कुछ घंटों का अंतर था.

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जयराज और बेनिक्स के रिश्तेदारों ने आरोप लगाया है कि हिरासत में दोनों को यातनाएं दी गई थी, बेनिक्स को यौन यंत्रणा भी दी गई.

परिवार की ओर से दायर किए मामले और गवाहों के बयान के आधार पर सुचित्रा ने अपने वीडियो में दावा किया गया था कि दोनों बाप-बेटे के साथ क्या हुआ था.

वीडियो के आख़िर में उन्होंने कहा था, "व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई शुरू करते हैं. आप जहाँ कहीं भी हो, ये वीडियो शेयर कीजिए."

उनके इस वीडियो को दो करोड़ लोगों ने देखा और सोशल मीडिया पर इसे लेकर जमकर प्रतिक्रिया आई थी. वीडियो की शुरुआत में स्थानीय भाषा में लिखा आता है - दो आदमियों के लिए इंसाफ की मांग.

इसके बाद यह ख़बर देश भर की मीडिया में छा गई थी. ट्विटर और इंस्टाग्राम पर ट्रेंड करने लगी थी. राजनेताओं, क्रिकेट खिलाड़ियों, व्यापार से जुड़े बड़े नामों, कॉमेडियन और बॉलीवुड की शख्सियतों ने इसे लेकर ट्वीट करना शुरू कर दिया.

देश भर में फैलते आक्रोश को देखते हुए यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया. उसके बाद पुलिस हिरासत में हत्या करने के आरोप में पांच पुलिसकर्मियों की गिरफ़्तारी भी हुई.

कुछ दिनों के बाद पांच और पुलिस वालों की गिरफ़्तारी हुई जिसमें एक सब-इंस्पेक्टर भी शामिल हैं.

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जिन पुलिस वालों के ऊपर आरोप था, उनका शुरू में तबादला कर दिया गया था लेकिन बाद में दबाव बढ़ने और सख्त कार्रवाई की मांग को देखते हुए, उन्हें निलंबित कर दिया गया.

इसके बाद सुचित्रा रामादुराई से तमिलनाडु पुलिस ने वीडियो हटाने को कहा. पुलिस का कहना है कि वो (सुचित्रा) "ग़लत तरीक़े से इस मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही हैं और घटना को लेकर सनसनी पैदा कर रही हैं, जिसका कोई प्रमाण मौजूद नहीं है."

ट्विटर पर जारी किए बयान में पुलिस ने कहा है कि रामादुराई का वीडियो पुलिस के ख़िलाफ़ नफरत फैला रहा था.

सुचित्रा ने बताया कि राज्य के आपराधिक जाँच विभाग की एक अधिकारी ने उन्हें वीडियो हटाने को कहा था क्योंकि वीडियो में जो घटनाक्रम बताया गया है वो मारे गए बाप-बेटे की पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट से मेल नहीं खाती है.

सुचित्रा बीबीसी से बताती है कि जब मैंने पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट मांगी तब मुझे यह कहकर मना कर दिया गया कि यह एक सीलबंद दस्तावेज़ है जो सीधे मामले की सुनवाई कर रहे जज को ही सौंपा जाएगा.

वो आगे कहती हैं, "मैं यह देखकर हैरान थी कि जब वो सीलबंद रिपोर्ट है तो फिर उस अधिकारी ने मेरे वीडियो में वो ग़लतियां कहां से पकड़ ली जो पोस्ट-मॉर्टम से मेल नहीं खातीं."

हालांकि, रामादुराई ने अपने वकील के कहने पर वो वीडियो हटा लिया.

पुलिस बर्बरता भारत में एक गंभीर समस्या है. हिरासत के दौरान होने वाले मौतों को लेकर काम करने वाले ग़ैर-सरकारी संगठनों के संघ ने एक रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट के मुताबिक साल 2019 के दौरान भारत में पुलिस हिरासत में 1731 लोगों की मौत हुई है. इसका मतलब हुआ कि हर दिन कम से कम पांच मौतें हिरासत के दौरान हुई है.

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बीबीसी से बातचीत में कर्नाटक के एक पूर्व पुलिस आईजी गोपाल होसुर कहते हैं कि पुलिस वालों को क़ानून के हिसाब से चलना चाहिए.

वो कहते हैं, "जब कोई हिरासत में होता है तो वो असहाय होता है इसलिए इस तरह के तरीक़े अपनाने का कोई सवाल ही नहीं उठता. आप बिना बल प्रयोग किए दूसरे तरीकों से भी सबूत जुटा सकते हैं."

सुचित्रा रामादुराई हालांकि पीछे नहीं हटी है और निडर बनी हुई हैं.

फिर भी उन्होंने वीडियो हटा दिया क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्होंने अपना काम कर दिया है और लोगों को अब कुछ भी कहकर बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता है.

वो कहती हैं, "यह वीडियो खासतौर पर नब्बे के दशक की पीढ़ी की वजह से इतने लोगों तक पहुंच पाई. आप लोगों को यह कहकर बेवकूफ नहीं बना सकते कि यह फ़ेक है और अराजकता फैलाने के लिए किया गया है. नौजवान पीढ़ी सब समझती है. वो इस झांसे में नहीं आने वाली."

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