भारत-चीन विवाद: तनाव कम करने के लिए बफ़र ज़ोन की बात क्यों?- प्रेस रिव्यू

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भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में तवान कम करने के लिए बफ़र ज़ोन के मुद्दे को सुलझाना बहुत ज़रूरी हो गया है ताकि भविष्य में टकराव को रोका जा सके.

इक़नॉमिक टाइम्स ने इस ख़बर को दूसरे पन्नें पर जगही दी है

अख़बार ने लिखा है कि जानकारों की राय में ऐसे इलाक़ों में दोनों ही देशों की तरफ़ से पुलिस फ़ोर्स की तैनाती की जा सकती है ताकि ऐसे तनाव की स्थिति से बचा जा सके.

ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, ''सीमा पर सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया शुरू हो गई है लेकिन भारतीय सेना बहुत सावधानी से क़दम उठा रही है. चीन पहले भी अपने वादों से मुकर चुका है और गलवान घाटी और सिक्किम के नाकुला ज़मीन पर नए तथ्य गढ़ने की कोशिश करता रहा है.''

अख़बार के मुताबिक़ बफ़र ज़ोन को सही तरीक़े के परिभाषित करने की ज़रूरत है, इसके लिए उस क्षेत्र के प्राकृतिक विशेषताएं को ध्यान में रखा जाना चाहिए. दोनों देशों के बीच 15 जून की घटना के बाद से अविश्वास की भावना है. विश्वास को वापस हासिल करने के लिए ज़रूरी है कि सेना को वहां से हटाया जाए.

अख़बार के मुताबिक़ एक जानकार ने बताया कि एक राय ये है कि जब तक राजनयिक प्रयासों से हल नहीं हो जाता, जिसमें काफ़ी समय लग सकता है, बफ़र ज़ोन को आइटीबीपी (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) और चाइनीज़ बॉर्डर डिफेंस रेजीमेंट को दिया जा सकता है.

रिपोर्ट के अनुसार, ''सेना लड़ने के लिए ट्रेंड होती हैं, वो ऐसे इलाक़ों के लिए उपयोगी साबित नहीं हो सकते हैं क्योंकि वहां बेहतर पुलीसिंग की ज़रूरत हैं क्योंकि मुमकिन है कि बफ़र जोन में हथियारों के इस्तेमाल की इजाज़त न हो.

एक जानकार के मुताबिक़, "सेना को एक निर्धारित स्पष्ट रेखा की ज़रूरत होती है, जिसका वो बचाव करते हैं. उन्हें बफ़र ज़ोन के नियमों में नहीं बांधा जा सकता, उन्हें अपनी उद्देशय की पूरी तरह से रक्षा करने की क्षमता के रोल में ही काम करना चाहिए." लेकिन ये बात भी समझनी होगी कि चीन सीमा को लेकर अपना स्टैंड बदलता रहा है.

देविंदर सिंह

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पाकिस्तानी अधिकारियों के संपर्क में थे देविंदर सिंह

अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू में छपी ख़बर के मुताबिक, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि जम्मू-कश्मीर के निलंबित पुलिस अधिकारी देविंदर सिंह, जो इस साल जनवरी में हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों के साथ कार में यात्रा करते हुए पकड़ा गए थे, उन्हें "संवेदनशील जानकारी प्राप्त करने के लिए पाकिस्तानी अधिकारियों ने तैयार किया गया था"

एनआईए ने कहा कि सिंह नई दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग के कुछ अधिकारियों के साथ सेक्योर (सुरक्षित) सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपर्क में थे.

एनआईए ने सोमवार को जम्मू की एक अदालत में सिंह और पांच अन्य लोगों के खिलाफ अपनी चार्जशीट दाखिल की.

सिंह को 11 जनवरी को हिजबुल के दो वांछित आतंकवादियों मुश्ताक राथर और इरफ़ान शफ़ी के साथ गिरफ्तार किया गया था. उन्हें दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में एक चेक पोस्ट पर पड़का गया था.

हरियाणा में प्राइवेट नौकरियों में 75 प्रतिश आरक्षण देने की तैयारी

हरियाणा

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अंग्रेज़ी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक सोमवार को हरियाणा मंत्रिमंडल ने निजी क्षेत्रों की नौकरियों में 75% आरक्षण प्रदान करने के लिए एक अध्यादेश का ड्राफ़्ट तैयार करने को को मंजूरी दे दी.

इससे निजी कंपनियों की बीच चिंता बढ़ गई है. उनका मानाना है कि कोविड 19 महामारी से आर्थिक तौर पर उबरने की कोशिशों के झटका लगेगा.

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि स्थानीय उम्मीदवारों के ड्राफ्ट को मंत्रिपरिषद की अगली बैठक में पेश किया जाएगा.

बयान में कहा गया है कि आध्यादेश " प्राइवेट कंपनियों, समाजों, ट्रस्टों, साझेदारी फर्मों आदि में प्रति माह 50,000 रुपये से कम वेतन वाले नौकरियों के लिए स्थानीय उम्मीदवारों को नए रोजगार का 75% प्रदान करेगा,"

हालांकि कंपनियां एक ज़िले से अधिकतम 10 प्रतिशत लोगों को ही नौकरियां दे पाएंगी. लेकिन ये भी प्रावधान किया जाएगा कि अगर कंपनियों के काम के अनुकूल कैंडिडेट उपलब्ध नहीं हैं, तो उन्हें इससे छूट दी जाएगी.

अख़बार के मुताबिक पिछले पांच महीने में ये दूसरा मौका था जब कैबिनेट में आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा हुई.

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