कोरोना वायरस: महामारी ने कैसे कतर डाले भारतीय एयर इंडस्ट्री के पंख

विमान उद्योग

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    • Author, निधि राय
    • पदनाम, बीबीसी बिज़नेस संवाददाता
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बहुत पहले की बात नहीं है जब इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) ने घोषणा की थी कि 2037 तक हवाई यात्रियों की संख्या 8.2 बिलियन तक पहुंच जाएगी और दुनिया भर में विमानन उद्योग यात्रियों की संख्या में होने वाली इस वृद्धि के लिए कमर कस रहा है. लेकिन कोरोना वायरस की गंभीर चोट से अन्य सेक्टर्स की तरह यह भी अछूता नहीं रहा.

महामारी का असर इतना गहरा है कि देशों को अपनी सीमाएं बंद करनी पड़ीं और लॉकडाउन में विमानन उद्योग को अपने विमानों को खड़े रखना पड़ा.

इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) के मुताबिक, हवाई यात्रा में 98 फ़ीसदी तक की कमी आई है और अनुमान लगाया गया कि दुनिया भर की एयरलाइंस कंपनियों को 2020 तक 84 बिलियन डॉलर का नुकसान होगा. आईएटीए ने यह भी अनुमान लगाया है कि प्रति पैसेंजर रेवेन्यू (राजस्व) में भी 2019 की तुलना में 2020 में 48 फीसदी की गिरावट आएगी और सबसे बड़ा ख़तरा तो विमानन उद्योग और इससे जुड़ी 3.2 करोड़ नौकरियों पर मंडरा रहा है.

इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि भारतीय विमानन क्षेत्र को भी आने वाले वक्त में मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा. रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने अनुमान लगाया है कि भारतीय विमानन उद्योग को 24,000 से 25,000 करोड़ के रेवेन्यू (राजस्व) का नुक़सान उठाना पड़ सकता है.

क्रिसिल इन्फ्रास्ट्रक्चर के ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक निदेशक जगनारायण पद्मनाभन ने एक प्रेस नोट के ज़रिए कहा, "एयरलाइंस को लगभग 17 हज़ार करोड़, हवाई अड्डे के रिटेलर्स (खुदरा विक्रेताओं) को 1,700 से 1,800 करोड़ रुपये और हवाई अड्डा ऑपरेटर्स को क़रीब 5,000 से 5,500 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाने की संभावना है."

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इसी तरह एविएशन कंसल्टिंग फर्म सेंटर फ़ॉर एशिया पैसिफिक एविएशन (सीएपीए) इंडिया के मुताबिक भारतीय विमानन उद्योग को इस साल अप्रैल-जून के दौरान 3 से 3.6 बिलियन डॉलर तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है.

हालांकि 25 मई से आंशिक तौर पर हवाई सेवाओं के शुरू होने से विमानन कंपनियां थोड़ी राहत की उम्मीद कर रही हैं.

दूसरी विमानन कंपनियों से बेहतर प्रदर्शन कर रही इंडिगो ने कहा है कि उसे इस साल जनवरी से मार्च के बीच 871 करोड़ रूपये का नुक़सान हुआ है. बीते साल कंपनी ने इन महीनों के दौरान 596 करोड़ रूपये का शुद्ध लाभ कमाया था.

कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी आदित्य पांडे ने बीबीसी को बताया कि "कोविड-19 महामारी से पहले की स्थिति तक वापस आने के लिए कंपनी को 18 से 24 महीनों के बीच का वक्त लग सकता है."

वो कहते हैं कि "फिर से मांग कितनी बढ़ती है ये इस बात पर निर्भर करता है कि अन्य देश अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ाने कब और कैसे शुरू करते हैं."

आदित्य पांडे कहते हैं, "लोग अपने दोस्तों और परिवार से मिलने के लिए बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं. बस सफर के दौरान सुरक्षा को लेकर लेकर वो पहले आश्वस्त होना चाहते हैं. हम सभी ये चाहते हैं कि बिज़नेस मीटिंग ऑनलाइन हो इसलिए जब तक स्थिति काबू में न आ जाए, लोग इसे फिलहाल जारी रखेंगे."

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एयर एशिया इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील भास्करन की भी यही राय है. वो कहते हैं "मांग का फिर से बढ़ना सीधे तौर पर सुरक्षा के मुद्दे से जुड़ा है."

समाचार वेबसाइट बिज़नेस ऑफ ट्रैवल ट्रेड (बीओटीटी) ने भी एक उपभोक्ता सर्वेक्षण किया है जिसमें उन्होंने पाया है कि देशव्यापी लॉकडाउन के ख़त्म होने के तीन से छह महीने के भीतर 66 फीसदी भारतीय यात्रा करने के लिए तैयार हैं.

इस बीच कोरोना महामारी से बचने के लिए अमीरों ने अधिक से अधिक चार्टर विमानों की सेवा लेना शुरू किया है जिससे इनकी मांग बढ़ी है.

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महंगा ईंधन चिंता का बड़ा कारण

उपभोक्ता का भरोसा जीतने की बात को दरकिनार कर भी दें तो भारतीय विमानन उद्योग के सामने मंहगा टरबाइन ईंधन (एटीएफ़) एक बड़ी चुनौती है.

एयरलाइन कंपनी का 40 फीसदी खर्च ईंधन पर होता है और इसकी कीमतों में बढ़ोतरी, कंपनियों की समस्याओं को और बढ़ा देती है.

राजधानी दिल्ली में 16 जून को एक महीने में एटीएफ़ की कीमतें दूसरी बार बढ़ाई गई हैं. इसमें 16.3 फीसदी की बढ़ोतरी है यानी इसमें 5,494.5 रूपये बढ़ा कर इसे 39,069.87 रूपये प्रति लीटर कर दिया गया है.

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की वेबसाइट पर मौजूद डेटा के अनुसार इससे पहले 1 जून को इसमें 56.5 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी और इसमें11,030.62 रू. प्रति लीटर बढ़ा कर इसे 33,575.37 रू. प्रति लीटर कर दिया गया था.

इसके अलावा, एटीएफ़ पर केंद्र सरकार 14 फीसदी एक्साइज़ ड्यूटी लगाती है और राज्य सरकारें करीब 30 फीसदी का वैट लगाती हैं. एक्साइज़ ड्यूटी की दर हर राज्य के लिए अलग-अलग है, जैसे महाराष्ट्र और नई दिल्ली एटीएफ़ पर 25 फीसदी का वैट वसूलते हैं.

वहीं कर्नाटक 28 फीसदी, तमिलनाडु 29 फीसदी जबकि ओडिशा और छत्तीसगढ़ 5 फीसदी वैट लेते हैं. देखा जाए तो वैट के रूप में केवल एटीएफ़ पर कंपनी की कुल लागत करीब 25 फीसदी होती है.

जानकारों का कहना है कि एटीएफ़ की मंहगी कीमतें विमानन कंपनियों के पूरे हिसाब-किताब पर पहले से अधिक बुरा असर डाल सकती हैं क्योंकि वो पहले ही भारी कर्ज में डूबे हुए हैं, उस पर महामारी के कारण यात्रियों की संख्या कम है और सफर की कीमतें भी कम रखी गई हैं. और तो और, बीते दो महीने से कंपनी के पास राजस्व के नाम पर कुछ नहीं आ रहा.

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सरकार का टिकट की कीमतें तय करना

कंपनियों के लिए एक और बड़ी मुश्किल है 'फे़यर कैपिंग' यानी एक तरह की सीमा जो ये तय करे कि किसी उपभोक्ता को किसी उड़ान के लिए अधिकतम कितना भुगतान करना है.

जब भारतीय विमानन नियामक, नागरिक उड्डयन के महानिदेशक ने 21 मई को घरेलू उड़ानों के लिए किराये की सीमा तय की थी तो इसका उद्देश्य कंपनी और यात्रियों दोनों की मदद करना था. ये कदम यात्रियों की ज़रूरतों और आर्थिक मुश्किलों को ध्यान में रख कर किया गया था.

सरकार का मानना था कि उड़ान का किराया बहुत अधिक होगा, इसलिए सरकार ने कंपनियों से किरायों को कम रखने के लिए कहा.

एविएशन कंसल्टेन्सी सीएपीए के एक वेबिनार में भास्करन ने कहा था, "मुझे उम्मीद है कि ये कदम अस्थाई होगा. मुझे नहीं लगता कि स्थाई तौर पर इस तरह की सीमा होनी चाहिए."

सीएपीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कपिल कौल ने बीबीसी को बताया, "फे़यर कैपिंग दुर्भाग्यपूर्ण है - ये एयरलाइन और यात्री दोनों के ही हित में नहीं है. पहले हमने पैसा लौटाने की व्यवस्था तय की और अब हमने किराया तय कर दिया है. इससे एयरलाइन कंपनियों को नुक़सान पहुंच रहा है और जुलाई से उन्हें इसके कारण और चोट पहुंचेगी."

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क्या मालवाहक उड़ानें हो सकती हैं नया विकल्प

फिलहाल सभी कंपनियां ये सोच रही हैं कि वो किन तरीकों से अपना राजस्व बढ़ा सकती हैं.

कार्गो का काम यानी मालवाहक उड़ानें शुरू हो चुकी हैं और स्पाइस जेट, विस्तारा और इंडिगो जैसी कंपनियां इस पर काम कर रही है.

लॉकडाउन के दौरान इंडिगो ने इसके महत्व को समझा और कंपनी अब इससे राजस्व कमाना चाहती है. कंपनी का कहना है कि वो लिक्विडिटी और नकदी लेन-देन पर ज़्यादा ध्यान देगी.

कंपनी अपनी लिक्विडिटी में और 3000 से 4000 करोड़ बढ़ाने की योजना बना रही है, और इसमें मालवाहक उड़ानों की मुख्य भूमिका होगी.

कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी आदित्य पांडे ने बीबीसी को बताया कि "कंपनी अब तक करीब एक सौ मालवाहक उड़ानें चला चुकी है और इसके कंपनी के राजस्व भी सुधर रहा है. कंपनी और 10 विमान ख़ास माल ढोने के लिए लगाने वाली है."

इंडिगो की तरह स्पाइस जेट ने भी कहा है कि वो अपने तीन बॉम्बार्डियर क्यू400 यात्री विमानों को कार्गो विमानों के तब्दील कर चुकी है.

वीडियो कैप्शन, पाकिस्तानी पायलटों पर कई देश अचानक बैन क्यों लगा रहे हैं?

आगे क्या होगा?

रेटिंग एजेंसी केयर रेटिंग्स के अनुसार कम से कम दिसंबर 2020 तक विमानन उद्योग पर संकट के बादल मंडराते रहेंगे.

एजेंसी का ये भी कहना है कि कंपनियों की मदद करने के लिए सरकार राज्यों में एटीएफ़ पर लगने वाले वैट की अलग-अलग दरों को तर्कसंगत भी कर सकती है.

केयर रेटिंग्स के अनुसार, जब तक कोविड-19 महामारी है तब तक के लिए सरकार मौजूदा एयरपोर्ट नेविगेशन सर्विस शुल्क में सौ फीसदी की छूट भी दे सकती है.

एयरपोर्ट नेविगेशन सर्विसेज शुल्क वो किराया है जो कंपनी हवाई अड्डे के इस्तेमाल के लिए देती है. ये शुल्क भी अलग-अलग हवाई अड्डों के लिए अलग-अलग होता है और ये विमान के आकार पर भी निर्भर करता है. आमतौर पर यह एयरलाइन कंपनी के ऑपरेटिंग कॉस्ट का साल से आठ फीसदी होता है.

फिलहाल के लिए एयरलाइन कपनियां सीमित तरीके से खुल गई हैं और आने वाले महीनों में इनके और खुलने की उम्मीद है. लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि भारत समेत दुनिया भर की एयरलाइन कंपनियां फिलहाल रिकॉर्ड नुक़सान से जूझ रही हैं और इसका अर्थ है कई लोगों की नौकरियों पर संकट के बादल मंडराना.

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है? लीड्स के कैटलिन से सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता? बाइसेस्टर से डेनिस मिशेल सबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है? जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है? सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं? मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

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मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है? फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है? स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं? कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है? हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए? मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए? लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा? बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए? मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है? लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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