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आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि क़ानून है- सुप्रीम कोर्ट- आज की प्रमुख ख़बरें
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के मेडिकल कॉलेजों में ओबीसी के लिए 50 फ़ीसद सीटें आरक्षित किए जाने की माँग को लेकर दायर याचिका को सुनने से इनकार कर दिया.
तमिलनाडु की डीएमके, एआईडीएमके, सीपीआई-एम समेत लगभग सभी पार्टियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर माँग की थी कि राज्य के मेडिकल कॉलेजों में ओबीसी आरक्षण को 50 फ़ीसद कर दिया जाए.
गुरुवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, "तमिलनाडु में पिछड़े वर्ग के लोगों की भलाई के लिए सभी पार्टियां एक साथ मिलकर आई हैं ये अप्रत्याशित है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट कह चुकी है कि आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है."
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि अगर वो चाहें तो हाईकोर्ट जा सकते हैं. याचिकाकर्ताओं ने आख़िरकार अपनी याचिक को वापस ले लिया ताकि वो मद्रास हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटा सकें.
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि अदालत केंद्र सरकार और मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया को निर्देश दें कि वो तमिलनाडु पिछड़ा वर्ग, एससी एंड एसटी आरक्षण एक्ट, 1993 को लागू करें.
उनका कहना था कि 2006 क़ानून के तहत ओबीसी के लिए 27 फ़ीसदी सीटें आरक्षित हैं लेकिन केंद्र सरकार उन सीटों को भरने में नाकाम रही है और इसी का कारण है कि पिछले तीन सालों में ओबीसी छात्र-छात्राओं की 10 हज़ार मेडिकल सीटें उनसे छीन ली गईं हैं.
हिंदू-मुसलमान टकराव बन गया जौनपुर में आम तोड़ने का झगड़ा, 35 गिरफ़्तार
उत्तर प्रदेश के जौनपुर ज़िले में आम तोड़ने को लेकर बच्चों के बीच हुआ विवाद सांप्रदायिक संघर्ष में तब्दील हो गया.
लखनऊ में मौजूद बीबीसी के सहयोगी पत्रकार समीरात्मज मिश्र के मुताबिक़ जौनपुर ज़िले के सरायख़्वाजा थाना क्षेत्र के भदेठी गांव में मंगलवार को दलित और मुस्लिम समुदाय के कुछ बच्चों में मारपीट और पथराव हुआ जिसमें कई लोग घायल हो गए.
मौक़े पर पहुंचे वाराणसी ज़ोन के पुलिस महानिरीक्षक विजय सिंह मीना ने बताया, "दो पक्षों के बच्चों में विवाद हुआ था और बाद में समझौता भी हो गया था लेकिन एक पक्ष के लोगों ने दूसरे पक्ष की कुछ झोपड़ियों में रात में आग लगा दी जिसमें कुछ मवेशी भी जलकर मर गए. अभियुक्तों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कर लिया गया है, 35 लोग गिरफ़्तार भी किए गए हैं और अब गांव में शांति है. जो भी दोषी होंगे वो बख़्शे नहीं जाएंगे."
मंगलवार शाम हुई इस घटना में क़रीब 12 लोग घायल हुए हैं. गांव में तनाव बना हुआ है और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किए गए हैं. पुलिस ने इस मामले में 57 नामज़द और 27 अज्ञात लोगों पर मुक़दमा दर्ज किया है. गिरफ़्तार लोगों में गांव के प्रधान मोहम्मद आफ़ताब भी शामिल हैं.
इस बीच गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लेते हुए दोषियों के ख़िलाफ़ गैंगस्टर ऐक्ट और एनएसए के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.
मुख्यमंत्री ने स्थानीय थाने के एसएचओ के ख़िलाफ़ भी विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं और पीड़ित परिवरों के नुक़सान की भरपाई के लिए 10,26,450 रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की भी घोषणा की है. मुख्यमंत्री ने सात पीड़ित परिवारों के लिए आवास उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए हैं.
वहीं दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष के कुछ लोगों ने पुलिस पर इकतरफ़ा कार्रवाई करने और ज़बरन इस घटना को सांप्रदायिक रूप देने का आरोप लगाया है.
भदेठी गांव के ही रहने वाले समाजवादी पार्टी के नेता मोहम्मद जावेद कहते हैं कि उन्हें और उनके परिवार वालों का नाम ज़बरन इस मामले में शामिल किया गया है जबकि शिकायतकर्ता ने अपनी तहरीर में हमारा नाम दिया भी नहीं था.
पालघर में साधुओं की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
पालघर में साधुओं की हत्या मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और अन्य को जवाब दाख़िल करने के लिए कहा है.
जनहित याचिका में जाँच को लेकर चिंताएँ उठाई गई हैं और मामले की जाँच सही से कराने के लिए दिशानिर्देशों की माँग की गई है. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली बैंच ने इस याचिका पर अगली सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह के लिए तय कर दी है.
जूना अखाड़ा से जुड़े महंत स्वामी श्रद्धानंद और छह अन्य लोगों ने और एक अन्य याचिकाकर्ता ने पालघर में साधुओं की हत्या मामले की जाँच एनआईए से कराने की माँग की है और जाँच के लिए दिशानिर्देश भी माँगे हैं. वहीं, राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए अदालत में कहा है कि ऐसे ही मामले बंबई हाई कोर्ट में भी लंबित हैं.
एक याचिकाकर्ता महंत स्वामी के वकील बालाजी श्रीनिवासन ने आज अदालत में बताया है कि गवाह आत्महत्या कर रहे हैं, हमारे पास ये मानने के कारण हैं कि जाँच सही से नहीं की जा रही है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हम नोटिस जारी कर रहे हैं और अब इस मामले पर अगली सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह में करेंगे.
लालू यादव के जन्मदिन पर जेडीयू का पोस्टर वॉर
राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू यादव के 73वें जन्मदिन पर राज्य में सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड ने उन पर भ्रष्टाचार और संपत्ति की धांधली का आरोप लगाया है.
जेडीयू ने इस सिलसिले में लालू यादव के ख़िलाफ़ पटना शहर में कई जगहों पर पोस्टर भी लगाए हैं.
जेडीयू के इन पोस्टरों में लालू यादव और उनके परिवार द्वारा कथित तौर पर राजनीतिक प्रभुत्व के जरिए जुटाई गई 73 संपत्तियों का ब्योरा है.
इस बीच राजद नेताओं ने लालू यादव को उनके 73वें जन्मदिन पर शुभकामना देते हुए कई पोस्टर लगाए हैं.
इस साल के आख़िर में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र दोनों ही राजनीतिक दलों के बीच पिछले साल से ही पोस्टरों की लड़ाई चल रही है.
ब्रितानी जनरल की जगह गुरु नानक के नाम पर सड़क
साल 1857 के विद्रोह को क्रूरता से दबाने वाले ब्रिटिश सेना के जनरल के नाम वाली पश्चिमी लंदन की एक सड़क को नया नाम देने की तैयारी है. ऐसा कहा जा रहा है कि ब्रिटेन की विविधता दिखाने के लिए इस सड़क का नाम 'गुरु नानक मार्ग' रखा जाएगा.
साउथहॉल में हैवलॉक रोड ब्रिटिश सेना के जनरल सर हेनरी हैवलॉक के नाम पर है जो 1857 के विद्रोह से 'व्यवस्थित तरीके' से निपटने के लिए अपनी सैन्य दूरदर्शिता के लिए चर्चित थे. 1857 का विद्रोह ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन ख़िलाफ़ भारतीयों का आज़ादी के लिए पहला आंदोलन माना जाता है.
हैवलॉक ने बहुत सख्ती के साथ विद्रोह को दबाया और कानपुर, इलाहाबाद और मेरठ जैसी जगहों पर विद्रोही होने के संदेह में बहुत सारे लोग मारे गए.
मंगललवार को इस बात की जानकारी दी गई कि सड़क का नाम बदलकर गुरु नानक मार्ग करने को लेकर मशविरा किया जा रहा है. साउथहॉल में बड़ी संख्या में सिख आबादी रहती है और हैवलॉक रोड पर श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा स्थित है जिसे भारत के बाहर दुनिया का सबसे बड़ा गुरुद्वारा माना जाता है.
वैश्विक स्तर पर चल रहे 'ब्लैक लाइफ़ मैटर्स' आंदोलन के मद्देनज़र लंदन के मेयर सादिक़ ख़ान ने यहां लगी मूर्तियों और उन सार्वजनिक जगहों के नामों का फिर से मूल्यांकन करने की योजना शुरू की है जो ब्रिटिश उपनिवेशवाद की याद दिलाते हैं.
ऐलिंग काउंसिल के नेता जूलियन बेल ने कहा कि हैवलॉक रोड का नाम बदलकर गुरु नानक रोड कर देना, सार्वजनिक जगहों पर ऐलिंग की सामुदायिक विविधता को पहचान दिलाने की दिशा में पहला कदम है.
एक वीडियो संदेश में उन्होंने मेयर सादिक़ ख़ान की योजना का स्वागत किया जिसमें उन्होंने कहा है कि मौजूदा समय में लंदन की सार्वजनिक जगहों को कैसा दिखना चाहिए इसका मूल्यांकन होना चाहिए.
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