You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
विनोद दुआ पर एफ़आईआर, उनके बोलने की आज़ादी पर हमला- एडिटर्स गिल्ड
जाने-माने पत्रकार विनोद दुआ पर हुई एफ़आईआर का विरोध करते हुए संपादकों की संस्था 'एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया' ने दुआ के समर्थन में एक बयान जारी किया है.
सोमवार को जारी बयान में गिल्ड ने कहा है कि दुआ पर हमला दरअसल उनके बोलने की आज़ादी पर हमला है और ये एक तरह से उन्हें परेशान करने का तरीक़ा है.
बयान में कहा गया है कि ऐसा देखा जा रहा है कि कई राज्यों में पुलिस में इस तरह की प्रवृत्ति बढ़ रही है कि वो पत्रकारों पर लगाए गए मनगढ़ंत आरोपों का संज्ञान ले रही है और फिर उसे पत्रकारों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर में तब्दील कर रही है.
बयान के मुताबिक़ पुलिस के इस रवैये से संपादकों की ये संस्था काफ़ी चिंतित है.
विनोद दुआ का ज़िक्र करते हुए कहा गया है कि, "बीजेपी प्रवक्ता की शिकायत पर वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ के ख़िलाफ़ दर्ज की गई एफ़आईआर इसकी ताज़ा मिसाल है. उन पर लगाए गए आरोप उनके बोलने की आज़ादी और निष्पक्ष टिप्पणी करने के उनके अधिकार पर खुला हमला है. इस बुनियाद पर एफ़आईआर उनको परेशान करने का एक साधन है और यह एक ऐसी प्रक्रिया की शुरुआत है जो ख़ुद एक सज़ा है."
बीजेपी के प्रवक्ता नवीन कुमार की शिकायत पर दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच ने चार जून को दिल्ली के लक्ष्मी नगर पुलिस स्टेशन में विनोद दुआ के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की थी.
बीजेपी प्रवक्ता ने विनोद दुआ पर यूट्यूब चैनल एचडब्लू न्यूज़ पर फ़ेक न्यूज़ की मार्केटिंग करने का आरोप लगाया है.
बीजेपी प्रवक्ता ने उनके ऊपर आरोप लगाया है कि उन्होंने दिल्ली दंगों जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सोच-समझकर अफ़वाह और ग़लत सूचना फैलाने का काम किया है.
एफ़आईआर की कॉपी में कहा गया है कि कोरोना की वजह से पैदा हुए इस संकट काल में सोशल मीडिया के माध्यम से अफ़वाहें फैलाने और ग़लत सूचनाओं के देने से समाज में अलग-अलग समुदाओं के लोगों के बीच वैमन्यस और घृणा का भाव बढ़ रहा है.
विनोद दुआ के ऊपर आईपीसी की धारा 290 (लोगों के बीच अशांति पैदा करना), 505 (समाज में अशांति पैदा करने वाला बयान देना) और 505 (2) (अपमानजनक टिप्पणी वाले प्रकाशित सामग्रियों को बेचना) के तहत मामला दर्ज किया गया है.
नवीन कुमार ने अपनी शिकायत में आगे सीएए विरोध-प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को ज़िम्मेवार ठहराने वाली ग़लत रिपोर्टिंग करने का भी जिक्र किया है.
एफ़आईआर की कॉपी में दुआ की ओर से व्यापम मामले को उठाए जाने का भी ज़िक्र है.
नवीन कुमार का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें वो कह रहे हैं, "पत्रकारिता के नाम पर लोगों को जिसतरह से जहर दिया जा रहा है, ये सबसे घातक है. विनोद दुआ वरिष्ठ पत्रकार रहे हैं. ना जाने उनके मन में क्या कुंठा है कि वो नरेंद्र मोदी की खिलाफत करते करते देश की भी खिलाफत करने लगे हैं. उन्होंने जिस प्रकार से जहर घोला है. क्या दिल्ली के दंगे अमित शाह या नरेंद्र मोदी जी के कहने पर हुए हैं क्या. क्या दिल्ली के दंगे पुलिस ने करवाए हैं. शाहीन बाग़ में जो बैठे हुए थे, जिन्हें शांतिप्रिय शांतिदूत कहते हैं, क्या उनकी दंगों के अंदर कोई भूमिका नहीं थी. आज जब ताहिर के खिलाफ चार्जशीट भी दायर हो गई है जो आम आदमी पार्टी के पार्षद हैं, उनकी पूरी भूमिका थी दंगों में, उन्हें भी लगातार विनोद दुआ बताते रहे कि वो शांतिदूत है."
वीडियो में आगे नवीन कुमार कहते हैं, "विनोद दुआ पत्रकारिता के माध्यम से पूरे विश्व में भारत को बदनाम करने में लगे हुए हैं. अभी तो पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज की है लेकिन मैं समझता हूँ कि इस में सेक्शन और सख्त होने चाहिए और तुरंत गिरफ़्तारी होनी चाहिए और सज़ा मिलनी चाहिए."
विनोद दुआ ने अपने ऊपर दर्ज एफआईआर पर बीबीसी संवाददाता तारेंद्र किशोर से बातचीत में कहा, "दिल्ली पुलिस ने अब तक मुझ से संपर्क नहीं किया है इसलिए मैं बहुत कुछ कह नहीं सकता हूँ लेकिन इतना ज़रूर है कि जिन्होंने एफ़आईआर दर्ज करवाई है, वो एफ़आईआर की कॉपी शेयर कर रहे हैं. ये अख़बारों तक पहुँच गई है और मेरे पास भी सोशल मीडिया के माध्यम से ही पहुँची है. इसलिए जब दिल्ली पुलिस मुझे आधिकारिक रूप से जानकारी देगी तब फिर आगे इस दिशा में कार्यवाही करेंगे. तब तक मैं इसमें कुछ नहीं कर रहा हूँ."
अपने ऊपर लगे इल्जाम पर आगे वो कहते हैं कि मेरा कार्यक्रम सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है, जिसे भी देखना है वो देख सकते हैं कि मैंने ऐसा क्या बोला है. मैं सिर्फ़ अपना काम करता हूँ. मेरी आकार पटेल से भी बात हुई है. उन पर भी एफ़आईआर दर्ज किया गया है. उनके अलावा भी कई लोगों पर हुआ है. मुझे और लोगों का तो पता नहीं लेकिन जहाँ तक मेरी बात है मेरा ट्रैक रिकॉर्ड सब के सामने हैं. मेरा यह कार्यक्रम भी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है. इस कार्यक्रम को देखकर कोई भी अंदाजा लगा सकता है कि मेरे ऊपर जो इल्जाम लगाए गए हैं, वो कितने वाजिब हैं. जब मुझ से आधिकारिक रूप से संपर्क किया जाएगा तब मैं इस बारे में कुछ बोलूंगा.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)