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लॉकडाउन 5.0 में क्या रह सकता है बंद, क्या रह सकता है खुला: प्रेस रिव्यू
देश में कोरोना के कारण लगाए गए चौथे लॉकडाउन का वक्त 31 मई को ख़त्म होने वाला है. ऐसे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि इसके बाद सरकार पांचवा लॉकडाउन लगाने जा रही है. दिल्ली से छपने वाले लगभग सभी अख़बारों में लॉकडाउन 5.0 से जुड़ी ख़बरें पहले पन्ने पर हैं.
'द इकोनॉमक टाइम्स' में छपी एक ख़बर के अनुसार गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों की राय जानने के बाद इस विषय पर प्रधानमंत्री से बात की है, जिसके बाद 31 मई की रात से पहले लॉकडाउन 5.0 के नए दिशानिर्देश जारी किए जा सकते हैं.
सूत्रों के हवाले से अख़बार लिखता है कि नए दिशानिर्देशों के अनुसार जून 1 से 13 शहरों को छोड़ कर देश की बाकी जगहों से पाबंदियां हटा ली जाएगी. देश में संक्रमितों की कुल संख्या का 70 फीसदी इन्हीं 13 शहरों से आए हैं. ये शहर हैं - दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, अहमदाबाद, ठाणे, पुणे, हैदराबाद, कोलकाता/हावड़ा, इंदौर, जयपुर, जोधपुर, चेंगलपट्टू और तिरुवल्लूवर.
अख़बार 'द हिंदू' के अनुसार लॉकडाउन के पांचवे चरण में कुछ नियमों के साथ धार्मिक स्थलों को खोला जा सकता है, हालांकि मॉल और रेस्त्रां बंद रखे जा सकते हैं. चूंकि मेट्रो के रूट अधिकतर उन शहरों में जो कंटेनमेंट ज़ोन में हैं इस कारण हो सकता है कि मेट्रो को चलने की इजाज़त न दी जाए.
अख़बार कहता है कि संभव है कि लॉकडाउन 5.0 के दौरान गृह मंत्रालय के जारी किए दिशानिर्देशों के लागू करने में राज्यों को अधिक आज़ादी दी जाए. अख़बार कहता है कि उम्मीद की जा रही है कि रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम में मोदी नए दिशानिर्देशों के बारे में जानकारी दे सकते हैं. देश में कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए 24 मार्च को पहली बार लॉकडाउन लगाया गया था. इसके बाद से इसे चार बार आगे बढ़ाया गया है.
एम्स में अब तक 205 कर्मचारी कोरोना पॉज़िटिव
'द हिंदू' अख़बार में ही छपी एक अन्य ख़बर के अनुसार दिल्ली में मौजूद देश के सबसे बडे एम्स अस्पताल में बीते तीन दिनों के भीतर कोरोना संक्रमण के 62 ताज़ा मामले सामने आए हैं.
स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से अख़बार लिखता है कि मार्च 15 के बाद से अस्पताल के कुल 205 कर्मचारी कोरोना पॉज़िटिव पाए गए हैं. इन कर्मचारियों में रेजिडेंट डॉक्टर, नर्स, लेबॉरेटरी स्टाफ़, टेक्नीशियन, सफाई कर्मचारी और सिक्योरिटी गार्ड शामिल हैं.
एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के महासचिव श्रीनिवास राजकुमार के हवाले से अख़बार लिखता है कि मार्च के महीने से ही डॉक्टरों ने होस्टल में सुरक्षा और स्वच्छता, ज़रूरी कोरोना टेस्टिंग को लेकर अस्पताल प्रशासन को लिखित में शिकायत दी थी लेकिन अब तक उस पर उन्हें कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला है.
श्रीनिवास कहते हैं कि डॉक्टरों को दिए गए एन-95 मास्क की ख़राब क्वालिटी को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए थे लेकिन इस मुद्दे को भी अब तक नहीं सुलझाया गया है.
मज़दूरों के मुद्दे के लेकर बीजेपी से नाराज़ कांग्रेस
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार मज़दूरों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट को गुमराह कर रही है. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में प्रवासी मज़दूरों से जुड़े एक मामले में सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने आलोचकों की निंदा करते हुए उनके मक़सद और साख पर सवाल उठाए थे.
इंडियन एक्सप्रेस अख़बार के मुताबिक़ तुषार मेहता ने इस सुनवाई के दौरान कहा कि देश के कुछ हाई कोर्ट समानांतर सरकार चला रहे हैं. अख़बार के मुताबिक़ देश के तकरीबन 19 उच्च न्यायालयों ने कोविड-19 की महामारी और लॉकडाउन से बने हालात में केंद्र और राज्य सरकारों को कुछ दिशानिर्देश दिए हैं.
कोलकाता से छपने वाले अंग्रेज़ी अखब़ार टेलीग्राफ़ ने इसी मसले पर कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी के हवाले से कहा है, "प्रवासी मज़दूरों को लेकर इस सरकार का जो रुख रहा है, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के बयान में भी वही झलकता है. सरकार के दावों की कड़ाई से जांच किए जाने की ज़रूरत है."
"सरकार ने 30 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ये बताया था कि एक भी मजदूर सड़क पर पैदल नहीं चल रहा है. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को ये कहकर गुमराह किया था. ये ग़लत है और इसे किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता है."
हालांकि सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में मेहता की दलील के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि वे सरकार के निर्देश पर ही बयान दे रहे थे.
कोविड-19 की दवाओं का टेस्ट करेगी सन फार्मा
भारत की सबसे बड़ी दवा उत्पादक कंपनी सन फार्मा ने कहा है कि वो कोविड-19 के इलाज के लिए दो दवाओं का टेस्ट करेगी.
अंग्रेज़ी अख़बार बिज़नेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ कंपनी जिन दवाओं का ट्रायल शुरू करने की तैयारियां कर रही हैं, उन्हें कोविड-19 की बीमारी के इलाज के तौर पर देखा जा रहा है. इसमें ख़ून को गाढ़ा होने से रोकने और जलन से बचाव करने वाली दवा नैफैमोस्टैट भी शामिल है.
अख़बार का कहना है कि सन फार्मा के इस रिसर्च में कुछ सरकारी एजेंसियां भी शामिल हैं.
ये ख़बर ऐसे समय में आई है जब भारत की कुछ दवा निर्माता कंपनियां कोविड-19 के इलाज के लिए संभावित दवाओं पर परीक्षण की तैयारी कर रही हैं. मुबंई की ग्लेनमार्क फार्मा ने भी फैवपिराविर पर ट्रायल शुरू किया है. ये इनफ्लुएंजा की दवा है, जिसमें कोरोना संक्रमण के इलाज की संभावना देखी जा रही है.
हिज़्ब और आईएसआई में बढ़ रही है दरार?
'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' में छपी एक ख़बर के अनुसार बीते सोमवार को इस्लामाबाद में हिज़्बुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैय्यद सलाहुद्दीन पर जानलेवा हमला हुआ था जिसमें वो बच गए हैं. उन्हें इस हमले में मामूली चोटें आई हैं.
अख़बार कहता है कि इसके बाद सैय्यद सलाहुद्दीन कहीं सेफ़हाउस में छिप गए हैं. लेकिन इसके बाद अब जम्मू कश्मीर में ये अटकलें तेज़ हो गई हैं कि चरमपंथी गुट हिज़्बुल मुजाहिदीन और आईएसआई के बीच सब कुछ सामान्य नहीं है.
अख़बार कहता है कि अपुष्ट ख़बरों के अनुसार 25 मई को इस्लामाबाद की गली नंबर 8 के नज़दीक दोपहर 12.30 बजे सलाहुद्दीन के काफिले पर हमला हुआ था. माना जा रहा है कि दोनों गुटों के बीच रिश्तों में तनाव है जिसका नाता इस हमले से हो सकता है.
सूत्रों के हवाले से अख़बार ने लिखा है कि हाल में जम्मू कश्मीर के लिए सलाहुद्दीन के सबसे भरोसेमंद कमांडर रिजाज़ नाइकू की सुरक्षाबलों के साथ एक मुठभेड़ में मौत हो गई थी.
सूत्रों के हवाले से अख़बार लिखता है कि सलाहुद्दीन आईएसआई से इस बात पर नाराज़ हैं कि संगठन ने जम्मू कश्मीर घाटी में चरमपंथ को बढ़ावा देने और उसे स्थानीय चेहरा देने के लिए 'द रेज़िस्टेन्स फ्रंट' का गठन किया था. इसके बाद चरमपंथ के लिए आर्थिक ममद के मामले में हिज़्बुल मुहाहिदीन की बजाय द रेज़िस्टेन्स फ्रंट को अधिक तवज्जो दी जाने लगी.
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