INDVsNZ ODI: क्या क्लीन स्वीप से बच सकेगा भारत?

विराट कोहली

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    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
  • प्रकाशित

तीसरे एक दिवसीय मैच की बात करें तो भारत के पास कुछ खोने के लिए नहीं है, इसलिए भारत खेल में सब कुछ झोंकने की कोशिश करेगा.

हो सकता है कुछ नए प्रयोग भी देखने को मिलें. जो खिलाड़ी अभी तक नहीं खेल पाए हैं उन्हें मौक़ा भी मिल सकता है. उम्मीद है भारत अच्छा मुक़ाबला करेगा और सिरीज़ 2-1 तक लेकर आएगा.

यह कहना है द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित पूर्व क्रिकेटर राजकुमार शर्मा का जो भारत के कप्तान विराट कोहली के कोच रह चुके है.

टी-20 सिरीज़ के पांचों मैच जीतने के बाद जहां भारतीय टीम का जोश सांतवे आसमान पर था वहीं न्यूज़ीलैंड के कंधे झुके हुए थे. लेकिन उसने पलटवार करते हुए तीन मैचों की एकदिवसीय सिरीज़ के शुरूआती दोनों मैच जीतकर सबको हैरान कर दिया. भारतीय टीम के लिए यह किसी झटके से कम नहीं है.

अब दोनों टीमें मंगलवार को माउंट माउंगानुई में तीसरे और आख़िरी एकदिवसीय मुक़ाबले में आमने-सामने होंगी. न्यूज़ीलैंड भारत को तीसरे मैच में हराकर टी-20 सिरीज़ में हुए क्लीन स्वीप का बदला लेने की पूरी कोशिश करेगा.

न्यूज़ीलैंड ने भारत को पहले मैच में चार विकेट से और दूसरे मैच में 22 रन से हराया है.

अब अगर विराट कोहली के कोच राजकुमार शर्मा चाहते हैं कि टीम में बदलाव हो, तो वह क्या हो सकते हैं - क्या भारत विकेटकीपर बल्लेबाज़ ऋषभ पंत को मौक़ा दिया जाए या फिर मनीष पांडेय को?

शिवम दूबे तो टी-20 सिरीज़ में कुछ ख़ास नहीं कर सके. वैसे ऋषभ पंत को तो पहले ही इतने मौक़े मिल चुके हैं कि उन पर सवाल खड़े हो गए हैं. शिवम दूबे को तो ख़ैर अभी तक एक ही एकदिवसीय मैच खेलने का अवसर मिला है लेकिन टी-20 में उन्होंने बेहद निराश किया. उनकी हालत तो ऋषभ पंत जैसी ही हो गई.

कप्तान के कहने पर आक्रामक खेल दिखाने की कोशिश में उनकी अपनी स्वभाविक बल्लेबाज़ी कहीं खो गई. रही बात मनीष पांडेय की तो वह केदार जाधव की जगह खेल सकते है लेकिन केदार जाधव भले ही दूसरे मैच में केवल नौ रन बना सके लेकिन पहले मैच में तो वह 15 गेंदों पर 26 रन बनाकर नाबाद थे.

न्यूज़ीलैंड की टीम

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दरअसल पहले मैच में भारत 347 रन बनाने के बावजूद हार गया था. इसका कारण भारत की बल्लेबाज़ी नहीं कमज़ोर गेंदबाज़ी थी.

जब कोई टीम 24 वाइड गेंद करेगी और 29 अतिरिक्त रन देगी तो भला वो क्यों ना हारे. ख़ासकर तेज़ गेंदबाज़ हार्दिक पांड्या तो यार्कर के माहिर माने जाते है, उन्होंने सबसे अधिक वाइड गेंद की.

आखिरकार ऐसा क्यों हुआ? इसे लेकर विराट के कोच राजकुमार शर्मा मानते हैं कि "न्यूज़ीलैंड की परिस्थिति भारत से बिलकुल अलग है. इसके अलावा वहां मैदान बहुत छोटे हैं. कुछ जगह बाउंड्री 48 या 50 मीटर दूर है. वहां बल्लेबाज़ ग़लत शॉट भी खेल दे तो फर्क़ नहीं पडता. ऐसे में गेंदबाज़ की कोशिश रहती है कि वह उस तरफ गेंद करे जहां बाउंड्री बड़ी है तो वहां उनका संतुलन ख़राब हो जाता है."

"रही बात जसप्रीत बुमराह की तो वह एक चोट के बाद वापसी कर रहे है. दो टी-20 में वह अच्छा खेले. एकदिवसीय क्रिकेट में वह ज़रूर संघर्ष कर रहे है. आने वाले समय में उनका आत्मविश्वास वापस आ जाएगा वह बेहतरीन गेंदबाज़ हैं."

हार्दिक पांड्या

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अब गेंदबाज़ों को लेकर विराट कोहली इसलिए भी मुश्किल में हैं क्योंकि उनके पास जसप्रीत बुमराह, नवदीप सैनी, मोहम्मद शमी, शार्दुर ठाकुर, कुलदीप यादव, युज़्वेंद्र चहल और रविद्र जडेजा ही हैं. इनमें रविंद्र जडेजा ही थोड़े किफ़ायती साबित हुए हैं.

बल्लेबाज़ी मे रोहित शर्मा और शिखर धवन के चोटिल होकर बाहर होने से नई सलामी जोड़ी मयंक अग्रवाल और पृथ्वि शॉ बड़ा स्कोर नहीं बना पाए.

केएल राहुल अच्छी फॉर्म में हैं लेकिन वह सलामी बल्लेबाज़ी नहीं कर रहे वह नम्बर चार पर खेल रहे हैं.

इस समीकरण को लेकर राजकुमार शर्मा कहते है कि "रोहित शर्मा और शिखर धवन मैच जिताने वाले खिलाड़ी हैं. उनके बाहर होने से असर तो पड़ा है. पृथ्वि शॉ ने दूसरे मैच में छह चौके लगाकर अपना दमख़म दिखाया. ऐसा लग रहा था जैसे वीरेन्दर सहवाग खेल रहे हैं. वह जल्दी आउट हो गए लेकिन उनमें प्रतिभा है. केएल राहुल ने दिखाया है कि उन्हें मध्यमक्रम में भी खिलाया जा सकता है. लेकिन इसके बावजूद मध्यमक्रम के बल्लेबाज़ों को ही अपनी ज़िम्मेदारी और समझनी होगी."

शिखर धवन

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दूसरी तरफ़ न्यूज़ीलैंड के सबसे अनुभवी बल्लेबाज़ रोस टेलर ने दिखा दिया कि अगर एक खिलाड़ी अंत तक मैदान में टिका रहे तो उसका क्या नतीजा होता है. उन्होंने पहले मैच में नाबाद 109 रन बनाए तो दूसरे मैच में नाबाद 73 रन बनाए.

उनके अलावा मार्टिन गप्टिल और हैनरी निकोलस ने भी बेहतरीन बल्लेबाज़ी की. सबसे बड़ी बात उनके गेंदबाज़ों ने पहले मैच के मुक़ाबले दूसरे मैच में अच्छी लाइन और लैंग्थ से गेंदबाज़ी की. उन्होंने अपनी तेज़ और उछाल लेती गेंदों को ऑफ स्टंप या उसके आसपास ही रखा.

नतीजा भारतीय बल्लेबाज़ों को बड़े शॉट्स खेलने का अवसर नहीं मिला. दूसरे मैच में केएल राहुल और केदार जाधव भी कुछ ख़ास नहीं कर सके.

ऐसे में भारत के कप्तान विराट कोहली के पास टीम में एकाध परिवर्तन करने के अलावा कुछ नहीं है.

मार्टिन गप्टिल

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दूसरी तरफ़ न्यूज़ीलैंड अपने चोटिल खिलाड़ियों की समस्या से कम परेशान नहीं है.

नियमित कप्तान केन विलियमसन चोटिल थे तो ट्रेंट बोल्ट, मैच हेनरी और लॉकी फर्ग्युसन भी चोट के कारण नहीं खेल सके है. टिम साउदी और मिचेल सैंटनर बीमार है.

टीम में ईश सोढ़ी और ब्लेयर टिकनर को शामिल किया गया है. ख़बर है कि केन विलियमसन चोट से उबर गए हैं और वह तीसरा एकदिवसीय खेल सकते हैं.

जो भी हो ऐसे में मुक़ाबला ज़बर्दस्त होने की उम्मीद है, क्योंकि भारत इसके बाद होने वाली दो टेस्ट मैच की सिरीज़ में जीत के साथ जाना चाहेगा, ताकि उसका मनोबल बढ़ा रहे.

वहीं न्यूज़ीलैंड भी क्लीन स्वीप कर अपना रिकार्ड और बेहतर करना चाहेगा.

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