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हेगड़े के बयान पर पीएम मोदी से संसद में स्पष्टीकरण की मांग
महात्मा गांधी पर बीजेपी नेता अनंत कुमार हेगड़े की टिप्पणी पर कांग्रेस ने भारी ग़ुस्सा जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफ़ी मांगने और अनंत कुमार के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग की है.
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी से संसद में आकर हेगड़े के 'आपत्तिजनक' बयान पर अपना रुख़ साफ़ करने की भी मांग की है.
समाचार एजेंसियों के मुताबिक़, बीजेपी नेता हेगड़े ने बेंगलुरु के एक कार्यक्रम में कथित तौर पर दावा किया था कि 'आज़ादी की पूरी लड़ाई अंग्रेज़ों की सहमति एवं सहयोग से लड़ी गई थी और महात्मा गांधी के नेतृत्व वाला स्वतंत्रता आंदोलन एक नाटक था.'
इस टिप्पणी के विरोध में कांग्रेस प्रवक्ता आनंद शर्मा ने आरोप लगाया कि दिल्ली चुनाव में ध्रुवीकरण करके वोट हासिल करने के लिए भाजपा के कई नेता-मंत्री भड़काऊ बयान दे रहे हैं.
संसद परिसर में आनंद शर्मा ने संवाददाताओं से कहा, ''महात्मा गांधी का और आज़ादी के आंदोलन का इससे बढ़कर अपमान नहीं हो सकता. अगर प्रधानमंत्री और सरकार कार्रवाई नहीं करती, तो साबित हो जाएगा इनकी नीयत में खोट है.''
कांग्रेस प्रवक्ता आनंद शर्मा ने कहा, "हमारी मांग है प्रधानमंत्री संसद में आएं और इस मामले पर स्पष्टीकरण दें."
बीजेपी नेता अनंत हेगड़े इससे पहले भी अपने विवादित बयानों के लिए सुर्ख़ियों में रहे हैं.
साल 2019 में उन्होंने कर्नाटक के कोडागू में एक सभा में कहा कि 'अगर हिंदू लड़की को कोई हाथ छूता है तब वह हाथ बचना नहीं चाहिए.'
तब उन्होंने कहा था, "हमें अपने समाज की प्राथमिकताओं पर दोबारा सोचना चाहिए. हमें अपनी जाति के बारे में नहीं सोचना चाहिए. अगर कोई हाथ हिंदू लड़की को छूता है तब वह हाथ बचना नहीं चाहिए."
उन्होंने संविधान के संबंध में भी कहा था, "कुछ लोग कहते हैं संविधान धर्म निरपेक्षता की बात कहता है और उसे स्वीकारना चाहिए. हमें संविधान का सम्मान करना चाहिए लेकिन संविधान कई बार बदल चुका है और यह भविष्य में भी बदल सकता है. हम यहां संविधान बदलने के लिए हैं और हम इसे बदलेंगे."
पिछले साल ही मोदी सरकार में मंत्री रहते हुए अनंत हेगड़े ने राहुल गांधी से उनके डीएनए का सबूत भी मांगा था.
चिन्मयानंद को यौन शोषण के मामले में मिली ज़मानत
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद को क़ानून की छात्रा का कथित यौन शोषण करने के मामले में सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज़मानत दे दी.
यौन शोषण का आरोप लगाने वाली लड़की चिन्मयानंद के ही शाहजहांपुर के एसएस लॉ कॉलेज की छात्रा थी.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) इस मामले की जांच कर रही थी और पिछले साल सितंबर में चिन्मयानंद को गिरफ़्तार किया था.
इसके बाद बीजेपी ने कहा था कि चिन्मयानंद पार्टी में नहीं है. एसआईटी ने नवंबर में दो मामलों में चार्जशीट दाख़िल की थी.
पहली चार्जशीट छात्रा के साथ यौन शोषण के मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री के ख़िलाफ़ और दूसरी चार्जशीट आरोप लगाने वाली छात्रा के ख़िलाफ़ दाख़िल की गई थी.
छात्रा को कथित जबरन उगाही के मामले में गिरफ़्तार किया गया था और दिसंबर में उसे ज़मानत दे दी गई थी.
संसद में गूंजा 'गोली मारना बंद करो' के नारे
संसद के दोनों सदनों में बजट सत्र के दूसरे दिन सोमवार को नागरिकता संशोधन क़ानून यानी सीएए और एनपीआर को लेकर जमकर हंगामा हुआ.
लोकसभा में कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी पार्टियों के सांसद दिल्ली के जामिया और शाहीन बाग़ में गोलीबारी को लेकर 'गोली मारना बंद करो, देश तोड़ना बंद करो' नारे लगाने लगे. प्रश्न काल शुरू किया गया लेकिन विपक्षी सांसद नारा लगाते रहे. विपक्षी सांसद मांग कर रहे थे कि प्रधानमंत्री संसद में आएं और पूरे मामले पर स्पष्टीकरण दें. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सासंदों को शांत कराने की कोशिश करते हुए कहा कि अपनी सीटों पर बैठेंगे तभी लोकतंत्र बचेगा.
ओम बिड़ला ने कहा कि संसद में जनता ने नारे लगाने के लिए नहीं भेजा गया है. उन्होंने कहा कि आपको सवाल पूछने के लिए जनता ने चुना है. ओम बिड़ला ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सारे मुद्दे उठाए जा सकते हैं.
संसद में सीएए-एनआरसी नहीं चलेगा और लोकतंत्र बचाओ, संविधान बचाओ के नारे भी लगे. राज्यसभा में भी यही दृश्य देखने को मिला. राज्यसभा में हंगामे को देखते हुए एक घंटे के लिए कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.
राज्यसभा में विपक्षी सांसदों ने सीएए और एनआरसी पर बहस के लिए नोटिस दिया था. राज्यसभा के सभापति वेंकैय्या नायडू ने कहा कि इन मुद्दों पर पहले ही पर्याप्त बहस हो चुकी है. हालांकि सभापति ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बहस के दौरान इन मुद्दों को शामिल किया जा सकता है.
भारत में एक और व्यक्ति में कोरोना वायरस के लक्षण पाए गए हैं. ये भारत में तीसरा मामला है. ये मामला भी केरल में ही सामने आया है.
पहले दो मामले भी केरल से ही आए हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय ने ये जानकारी दी है. तीसरा व्यक्ति भी चीन के वुहान से आया था, जहाँ सबसे पहले कोरोना वायरस पाया गया था.
इस व्यक्ति को अस्पताल में अलग-थलग रखा गया है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है. मरीज़ की लगातार निगरानी की जा रही है.
केरल की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने बताया कि मरीज़ को कासरगोड के ज़िला अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
केरल में कोरोना वायरस के तीनों मामले अलग-अलग हिस्सों से आए हैं. वायरस का पहला मामला 30 जनवरी को राज्य के त्रिशूर ज़िले में पाया गया था और दूसरा मामला केरल के अलपुझा ज़िले में.
अकेले केरल में 1700 से अधिक लोगों को निगरानी में रखा गया है. इनके कोरोना वायरस से संक्रमित होने की आशंका है. कम से कम 70 लोगों को अलग वार्ड में रखा गया है और उन पर लगातार नज़र रखी जा रही है.
राज्य के स्वास्थ्य मंत्रालय ने चीन से वापस आ रहे सभी लोगों से मेडिकल चेकअप कराने की अपील की है.
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दिल्ली विधानसभा चुनाव में आठ फ़रवरी को मतदान से पहले बीजेपी अपने चुनावी अभियान में आम आदमी पार्टी की सरकार और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को राष्ट्रवाद को लेकर घेर रही है.
बीजेपी ख़ुद को राष्ट्रवादी बता रही है और केजरीवाल पर सवाल उठा रही है.
रविवार को दिल्ली के बुराड़ी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने सीपीआई नेता और जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार और उमर ख़ालिद का नाम लेकर अरविंद केजरीवाल पर हमला बोला.
अमित शाह ने कहा, ''ये कन्हैया कुमार और उमर ख़ालिद को मोदी जी ने जेल में डाला और जब आरोपपत्र दायर करने का समय आया तब परमिशन चाहिए थी लेकिन डेढ़ साल हो गए और केजरीवाल सरकार अभी तक परमिशन नहीं दी है. मैं पूछते-पूछते थक गया हूं लेकिन ये नहीं बताते की परमिशन देंगे या नहीं.''
दो महीने पहले ही यानी दिसंबर के पहले हफ़्ते में दिल्ली हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल सरकार को कन्हैया कुमार के राजद्रोह मामले में कोई भी निर्देश देने से इनकार कर दिया था.
जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस सी हरि शंकर की बेंच ने कहा था कि इस मामले में अदालत सरकार को कोई निर्देश नहीं दे सकती है. कोर्ट ने कहा था कि सरकार ख़ुद ही नियम, नीति और तथ्य के हिसाब से फ़ैसला करेगी.
कन्हैया अमित शाह के बेटे जय शाह को लेकर हमलावर रहे हैं. हाल ही में कन्हैया ने कहा था कि अमित शाह के बेटे में कौन सी योग्यता है कि उन्हें बीसीसीआई का सचिव बना दिया गया है.
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'देश के सब्र का इम्तेहान ले रहे हैं निर्भया के अपराधी'
केंद्र सरकार ने रविवार को दिल्ली हाई कोर्ट से कहा है कि निर्भया गैंग रेप मामले के चारों दोषी 'देश के सब्र का इम्तेहान लेने की कोशिश कर रहे हैं.'
केंद्र ने कहा कि ये दोषी जानबूझकर अपनी फांसी की तारीख़ स्थगित करवा रहे हैं.
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कुछ महीनों पहले हैदराबाद में एक डॉक्टर से हुए गैंग रेप और हत्या मामले में अभियुक्तों को पुलिस के एनकाउंटर में मारे जाने पर लोगों की ख़ुशी का ज़िक्र किया और कहा, "इससे पता चलता है कि लोगों की न्यायिक व्यवस्था से भरोसा ख़त्म हो रहा है."
शनिवार को अदालत ने मामले के चार अभियुक्तों- मुकेश सिंह, विनय शर्मा, अक्षय ठाकुर और पवन गुप्ता को सरकार की उस याचिका का जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया, जिसमें एक फ़रवरी को उन्हें फांसी दिए जाने की अपील की गई थी.
केंद्र सरकार ने अपराधियों पर जानबूझकर सज़ा में देरी के लिए तरह-तरह की तरकीबें इस्तेमाल करने का आरोप लगाया.
केंद्र ने कहा कि दोषियों ने ऐसा करके 'घृणित' काम किया है.
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