झारखंडः पहले चरण में नक्सल प्रभावित 13 सीटों पर मतदान आज

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झारखंड विधानसभा के लिए पहले चरण का मतदान शनिवार को होगा. इन चरण में 13 सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे हैं, ये सभी सीटें नक्सल प्रभावित इलाकों में पड़ती हैं.
इन 13 में से छह सीटों पर सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी के मौजूदा विधायक चुनाव लड़ रहे हैं. इस चरण में कुल 189 उमीदवार हैं जिसमें सबसे ज़्यादा 28 भवनाथपुर में हैं जबकी अति नक्सल प्रभावित चतरा सीट से सिर्फ़ 9 उमीदवारों ने ही परचा भरा है.
महाराष्ट्र में महीने भर तक चले चुनावी दंगल के ख़त्म होने के बाद अब झारखंड की बारी है, यही वजह है कि पहले चरण के लिए सभी दलों ने कमर कस ली है. ख़ासतौर पर सत्तारूढ़ दल बीजेपी इन चुनावों को लेकर अति सतर्क है. हाल में उसे महाराष्ट्र में अपनी सरकार गंवानी पड़ी जबकि हरियाणा में उसे गठबंधन सरकार बनाने पर मजबूर होना पड़ा.
भारत के पूर्वी प्रदेश झारखंड में आदिवासी समुदाय की बड़ी आबादी है, यह प्रदेश अपनी खनिज संपदा और अलग संस्कृति के लिए विशेष रूप से पहचाना जाता है. हालांकि झारखंड में ग़रीबी भी काफ़ी ज़्यादा है.
जिस तरह से हाल के कुछ विधानसभा चुनावों में बीजेपी का प्रदर्शन लगातार नीचे गिरा है, उस हालात में उसे झारखंड में भी विपक्षी दलों से कड़ी चुनौती मिलने के आसार दिख रहे हैं. यहां तक चुनाव से पहले ही बीजेपी की सहयोगी पार्टी आजसू ने उससे अपना नाता तोड़ दिया था.
किन सीटों पर दिलचस्प मुकाबला?
इस चरण में सबसे ज़्यादा दिलचस्प लड़ाई लोहरदग्गा सीट पर है. यहां प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रामेश्वर ओरांव का मुकाबला राज्य कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुखदेव भगत से है.
सुखदेव भगत इस बार भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. इस सीट पर 'ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन' यानी आजसू की नीरू शांति भगत भी मैदान में है, उनके चुनावी समर में उतरने से ये लड़ाई तिकोनी होती दिख रही है.
पिछले विधानसभा के चुनाव में सुखदेव भगत कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ रहे थे. उस समय उन्हें आजसू के कमल किशोर भगत से सिर्फ़ 592 वोट से हार गए थे. इस बार कमल किशोर भगत की पत्नी को आजसू ने मैदान में उतारा है.
इसी चरण में पलामू की बिश्रामपुर सीट भी है जहाँ से भाजपा के मौजूदा मंत्री राम चन्द्र चंद्रवंशी लड़ रहे हैं उनके ख़िलाफ़ कांग्रेस के पूर्व मंत्री चंद्रशेखर दुबे मैदान में हैं.
इस चरण में और भी कई महत्वपूर्ण चेहरे हैं जो चुनाव लड़ रहे हैं. कुछ चेहरे ऐसें भी हैं जो पूर्व मंत्री रह चुके हैं तो कुछ उम्मीदवारों पर भ्रष्टाचार के गंभीर मामले फिलहाल अदालतों में चल रहे हैं.
सुखदेव भगत कांग्रेस का साथ छोड़कर इस बार बीजेपी से चुनावी मैदान में है, उन्हीं की तरह और भी कई नेता हैं तो दल बदल कर चुनाव लड़ रहे हैं.

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कौन किसके साथ?
झारखंड में कुल 81 विधानसभा सीटे हैं. साल 2014 के चुनाव में बीजेपी ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की थी जबकि उसके सहयोगी दल आजसू को पांच सीटें मिली थी. इस तरह से इस गठबंधन ने मिलकर राज्य में सरकार बनाई थी.
फिलहाल आजसू ने बीजेपी से अलग होकर चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया है. ऐसे में महाराष्ट्र से सबक लेते हुए बीजेपी अपने सहयोगी दलों को एक बार फिर साथ रखने की पूरी कोशिश करेगी.
पहले चरण की 13 सीटों में से भाजपा 12 सीटों पर चुनाव लड़ रही है जबकि एक निर्दलीय उम्मीवार को उसने समर्थन दिया है. आजसू ने इन 13 में से सिर्फ़ दो सीटों पर ही अपने उम्मीदवार उतारे हैं.
वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दलों ने महागठबंधन बनाने की कोशिश की है जिसमें कांग्रेस के साथ झारखंड मुक्ती मोर्चा और आरजेडी शामिल हैं.

सुरक्षा के इंतजाम
जिन 13 सीटों में पहले चरण का मतदान होना है वो चतरा, गढ़वा, पलामू, लातेहार, गुमला और लोहरदग्गा ज़िलों में पड़ती हैं. इन 13 सीटों के नाम इस प्रकार हैं- भवनाथपुर, गढ़वा, हुस्सैनाबाद, छत्तरपुर, बिश्रामपुर, डाल्टनगंज, पांकी, लातेहार, मनिका, लोहरदग्गा, विशुनपुर, गुमला और चतरा.
इन सभी सीटों पर सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं क्योंकि शहरी इलाकों को छोड़कर ज़्यादातर मतदान केंद्र उन इलाकों में हैं जहां माओवादियों का बड़ा प्रभाव है.
हाल ही में लातेहार और पलामू में नक्सलियों ने हिंसक वारदातों को अंजाम भी दिया है जिसमें पुलिसकर्मियों की मौत भी हुई है.
ये हमले ऐसे वक़्त में हुए जब भारत के गृह मंत्री अमित शाह अपने प्रचार के दौरान बोल रहे थे कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने नक्सलवाद का जड़ से ख़ात्मा कर दिया है.

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इस चरण में कुल 37 लाख 87 हज़ार मतदाता हैं जिनमे 18 लाख महिलाएं हैं. मतदान केंद्रों की बात करें तो 1202 मतदान केंद्र संवेदनशील माने गए हैं जबकि 1790 अतिसंवेदनशील मतदान केंद्र की श्रेणी में शामिल हैं.
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