RCEP पर मोदी के फ़ैसले को ठीक नहीं मानते अरविंद पनगढ़िया

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इंडियन एक्सप्रेस की एक ख़बर के अनुसार नीति आयोग के पूर्व वाइस चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया ने कहा है कि अगर रीजनल कांप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप यानी आरसीईपी से हम बाहर रहे तो कोई भी मल्टीनेशनल कंपनी यहां नहीं आना चाहेगी.
उन्होंने कहा है कि यही समय है जब देश में बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों को निवेश के लिए बुलाया जाए.
जाने-माने भारतीय-अमरीकी अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया ने नीति आयोग के उपाध्यक्ष के पद से 2017 में इस्तीफ़ा दे दिया था. उनको जनवरी 2015 में नीति आयोग का पहला उपाध्यक्ष बनाया गया था.
अख़बार से विशेष साक्षात्कार में अरविंद पनगढ़िया ने भारत को आरसीईपी में शामिल होने की पुरजोर वक़ालत की.
भारत ने आरसीईपी से समझौते से खुद को अलग कर लिया है लेकिन पनगढ़िया को लगता है कि प्रधानमंत्रमी नरेंद्र मोदी ने समझौते में और छूट हासिल करने के लिए ऐसा किया है लेकिन आगे इस पर समझौता वार्ता होगी.
पनगढ़िया ने कहा कि आरसीईपी भारत के हित में है और प्रधानमंत्री इस बात को अच्छी तरह समझते हैं. आरसीईपी में आने वाले देशों की तीन अरब जनता इस दायरे में आ रही है जोकि दुनिया की कुल जीडीपी का 20 प्रतिशत है और आप इतने बड़े बाज़ार से अलग नहीं रह सकते.

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टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक ख़बर के अनुसार, निर्वाचन आयोग को दी जानकारी में बीजेपी ने बताया कि उसे कुल मिले चुनावी चंदे का आधे से ज़्यादा हिस्सा एक ट्रस्ट से मिला है.
बीजेपी को 2018-19 के दौरान टाटा समूह के एक चुनावी ट्रस्ट से 356 करोड़ रुपये का चंदा मिला. बीजेपी ने बताया है कि चेक और ऑनलाइन भुगतान के ज़रिए उसे इस अवधि में कुल 700 करोड़ रुपये मिले.
टाटा के ट्रस्ट से कांग्रेस को साढ़े 55 करोड़ और तृणमूल कांग्रेस को 43 करोड़ रुपये मिले.
हिंदुस्तान टाइम्स ने ने लिखा है महाराष्ट्र में चुनाव बाद घटनाक्रम में नया ट्विस्ट, राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू. शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट में एक मुकदमा दायर किया है जिसमें कहा है कि राज्यपाल बीजेपी के बिना पर काम कर रहे हैं.
सरकार बनाने के लिए कांग्रेस और एनसीपी ने शिवसेना के सामने साझा न्यूनतम कार्यक्रम बनाने की शर्त रखी है. इसमें किसानों की कर्ज़ माफ़ी की बात भी शामिल करने की मांग शामिल है.
जनसत्ता की एक ख़बर के अनुसार, इस साल क़ानून का उल्लंघन करते पाए गए 1800 से अधिक एनजीओ और शिक्षण संस्थाओं का एफ़सीआरए पंजीकरण रद्द कर दिया गया है और विदेशी फंड पाने से उन पर रोक लगा दी गई है.

इंडियन एक्सप्रेस की एक ख़बर के अनुसार, महाराष्ट्र में सहयोगी दल की नारजगी झेल रही बीजेपी को झारखंड में भी झटका लगा है. यहां विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और बीजेपी की सहयोगी आजसू पार्टी ने 12 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े कर दिए हैं जहां से बीजेपी ने भी उम्मीदवार घोषित किए हैं.
इस बीच ऐसी ख़बरें हैं कि एनडीए में शामिल रामविलास पासवान की पार्टी लोजपा ने झारखंड चुनावों में 50 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करने का फ़ैसला किया है.
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