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मॉब लिंचिंग पर पीएम को ख़त लिखने वालों पर देशद्रोह का मामलाः प्रेस रिव्यू
देश में बढ़ रहीं मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर चिंता ज़ाहिर करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला खत लिखने वाली करीब 50 मशहूर हस्तियों पर बिहार के मुज़फ़्फरपुर में एफ़आईआर दर्ज की गई है.
द हिंदू में प्रकाशित समाचार के अनुसार इस एफ़आईआर में देशद्रोह, उपद्रव, धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाने और शांति में बाधा डालने से संबंधित अलग-अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.
जिन लोगों के ख़िलाफ़ यह एफ़आईआर की गई है उनमें मशहूर इतिहासकार रामचंद्र गुहा, फ़िल्म निर्देशक मणि रत्नम, अनुराग कश्यप और अभिनेत्री अपर्णा सेन समेत करीब 50 लोग शामिल हैं.
ख़बर के मुताबिक स्थानीय वकील सुधीर कुमार ओझा की ओर से दो महीने पहले दायर की गई एक याचिका पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) सूर्य कांत तिवारी के आदेश के बाद यह प्राथमिकी दर्ज हुई है. ओझा ने कहा कि सीजेएम ने 20 अगस्त को उनकी याचिका स्वीकार कर ली थी.
राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित फ़िल्म निर्देशक अदूर गोपालकृष्णन का नाम भी इस एफ़आईआर में दर्ज है. उन्होंने इस पर चिंता जताई है और कहा है कि सिर्फ इस बात से कोई देशद्रोही नहीं हो जाता कि वो सत्तापक्ष से सहमत नही है.
पटरी पर दौड़ने लगी देश की पहली प्राइवेट ट्रेन
देश की पहली प्राइवेट ट्रेन तेजस पटरियों पर दौड़ने लगी है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित समाचार में बताया गया है उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. यह ट्रेन लखनऊ और दिल्ली के बीच चलेगी.
इस मौके पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, "यह देश की पहली कॉरपोरेट ट्रेन है. मैं इसमें यात्रा करने वाले पहले यात्रियों को बधाई देता हूं, और उम्मीद करता हूं कि अन्य शहरों को जोड़ने के लिए भी इसी तरह की पहल की जाएगी."
प्राइवेट ट्रेन 'तेजस एक्सप्रेस' से यात्रा करने वाले यात्रियों को यदि ट्रेन नियत समय पर नहीं पहुंचाती है तो इसके बदले यात्रियों को मुआवजा दिया जाएगा.
इस नियम के अनुसार अगर ट्रेन एक घंटे से अधिक लेट होती है, तो यात्री को 100 रुपये और दो घंटे से ज्यादा लेट होती है, तो 250 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा. इतना ही नहीं ट्रेन के यात्रियों को 25 लाख रुपये का बीमा भी दिया जाएगा.
भारत ने कश्मीर पर मलेशिया और तुर्की के बयान की निंदा की
भारत ने कश्मीर मुद्दे पर तुर्की और मलेशिया के बयान की 'कड़ी निंदा' करते हुए देश के आंतरिक मुद्दे से जुड़े विषय पर इन दोनों के बयान को ''तथ्य से परे' बताया और मित्रतापूर्ण संबंधों की ओर ध्यान दिलाते हुए उनसे ऐसे बयान देने से बचने को कहा है.
नवभारत टाइम्स के अनुसार विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने संवाददाताओं से कहा, ''जम्मू कश्मीर को लेकर हाल का भारत का निर्णय पूरी तरह से आंतरिक मामला है.''
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इस विषय पर कई बार तथ्य रख चुके हैं, तथ्य यह है कि जम्मू कश्मीर ने भारत के साथ विलय के प्रपत्र पर हस्ताक्षर किया था.
दरअसल संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद्दे को उठाते हुए मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने आरोप लगाया था कि भारत ने जम्मू कश्मीर पर हमला बोला और क़ब्ज़ा किया. उन्होंने नई दिल्ली से पाकिसतान के साथ मिलकर काम करने को कहा. तुर्की ने भी कश्मीर की स्थिति पर भारत की आलोचना की थी.
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