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वर्ल्ड कप 2019: ICC ने विश्व कप के लिए इंग्लैंड को ही क्यों चुना?- वर्ल्ड कप डायरी
- Author, विनायक गायकवाड़
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लंदन से
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
जब मैं ट्रेंट ब्रिज स्टेडियम के दरवाज़े पर था तो मैं सिर्फ़ भारत... भारत... की आवाज़ सुन पा रहा था. सच कहूं तो मैं अंदर जाने के लिए बेसब्र था क्योंकि पिच की इंस्पेक्शन में देरी होने के कारण अभी मैच शुरु नहीं हुआ था.
लेकिन कुछ ही देर में मेरी सारी उम्मीदें ठंडी पड़ गईं जब आईसीसी ने बारिश की वजह से भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच मैच रद्द करने की घोषणा की.
बल्कि मैं तो स्टेडियम के अंदर भी नहीं पहुंचा था जब मैच के रद्द होने पर भारतीय समर्थकों के बाहर निकलने के लिए गेट खुल गए थे. सब ख़त्म हो गया था.
दोनों टीमों को एक-एक प्वाइंट दे दिया गया और दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट टूर्नामेंट का ये चौथा मैच था जो बारिश के वजह से रद्द हुआ.
मेरे लिए विश्व कप तब शुरु हुआ जब मेरी फ्लाइट सुबह 9.20 पर लंदन पहुंची. मुझे लगता है विश्व कप के मैचों को लाइव देखना हर क्रिकेट फैन का सपना होता है. क्रिकेट के लिए इसी प्यार की वजह से भारत, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, साउथ अफ्रीका यहां तक कि अमरीका के फैंस की भीड़ यहां जुट जाती है.
लेकिन इंग्लैंड उन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया, जिसका पहला कारण है अनचाहा मौसम और दूसरा कोई ख़ास प्रचार न होना.
इंग्लैंड में मैच करवाने का ये समय सही था?
खेलों के उत्पत्ति वाले देश में होना एक शानदार अनुभव है. जब मैं विश्व कप को कवर करने की तैयारी कर रहा था तो लंदन में मेरे सहयोगियों ने कहा, ''चिंता न करो, लोग यहां गर्मियों के मज़े ले रहे हैं''. लेकिन उनमें से किसी के पास मेरे लिए ही नहीं बल्कि उन हज़ारों क्रिकेट फैंस के लिए भी प्लान था जो काफ़ी दूरी तय करके पहुंचे थे.
इंग्लैंड की अलग-अलग हिस्सों में बारिश हो रही थी, जो गंभीर चिंता की वजह बन गई है. अधिकतर लोग 'रिज़र्व दिनों' पर सवाल उठा रहे थे. आईसीसी ने इस फॉरमेट में कोई रिज़र्व दिन नहीं रखा है और इससे टीम के अंकों पर असर पड़ा है.
मैं ट्रेंट ब्रिज के बाहर दुबई के एक ग्रुप से मिला. कुमार वहां काम करते हैं और वे क्रिकेट को बहुत पसंद करते हैं और अपने बच्चों को इंग्लैंड क्रिकेट का जादू दिखाने लाए थे.
वे पूछते हैं, "अगर आईसीसी मौसम के बारे में जानता था तो उन्होंने खेल के लिए इंग्लैंड को ही क्यों चुना? क्या ये समय सही था? अगर विश्व कप कहीं और होता तो हम इसका ज़्यादा मज़ा लेते, है ना?"
आईसीसी को इस मुद्दे पर ज़रूर सोचना चाहिए. ये विश्व कप का चौथा मैच था जो मौसम की वजह से रद्द हुआ, जिसमें मौसम के पूर्वानुमान से इस तरह की उम्मीद नहीं की गई हो.
श्रीलंका अपने अंतिम पड़ाव पर था जब उनके अच्छे स्कोर बन गए थे लेकिन बारिश के वजह उनके मैच रद्द हो गए . पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडिज, बांग्लादेश, न्यूज़ीलैंड के बाद अब भारत को भी इन्हीं परिस्थितियों को झेलना पड़ा.
दलजीत कनाडा से अपने दोस्तों के साथ आए थे, उन्होंने मज़ाक़ में कहा, "विश्व कप में 11 टीम खेल रही है. दस तो राष्ट्रीय है ही और एक भगवान की टीम बारिश है". सोशल मीडिया भी इसी तरह की प्रतिक्रियाओं से भरा हुआ था.
शीर्ष पर रहने की होड़
मैच का इस तरह रद्द होने से टीम पर जरूर असर पड़ता है. और ये विषय न केवल प्रशंसकों के लिए बल्कि खिलाड़ियों के लिए भी एक चिंता का विषय है. अगर टीम मैच रद्द होने के कारण एक प्वाइंट खो रही है तो इसके साथ वो ऊपर पहुंचने के लिए एक मौका भी तो खो रही है.
याद रहे कि शीर्ष चार टीमें ही सेमी-फाइनल में पहुंचेंगी चाहे वो कोई भी हो.
कनिका लांबा लंदन के रेस्टोरेंट में काम करती हैं, वो कहती हैं, ''आखि़रकार ये सब तो नम्बरों पर ही टिका हुआ है. ये बिल्कुल मायने नहीं रखता कि कौन बेहतर था. अगर आपको प्वाइंट नहीं मिले तो मतलब आप खेल से बाहर हैं.'' वे भी उन दुखी लोगों में से एक थी जिनसे मैं मिला था.
वे कहती हैं, "मेरे पिता क्रिकेट के बहुत बड़े शौकीन हैं. हम दो बहनें हैं और उन्होंने हमें हमेशा सिखाया कि कैसे खेलें. सबसे जरूरी बात जो उन्होंने बताई कि खेल को किस कदर प्यार किया जाए. मैं भारत का मैच आनंद लेना चाहती थी लेकिन लगता है कि इस समय तो मेरा सपना पूरा होगा नहीं."
प्रचार की कमी
जब मैं फ्लाइट में था तो मैं सोच रहा था कि लंदन किसी विवाह स्थल की तरह सजा-धजा होगा, और ऐसा हो भी क्यों ना? आख़िरकार विश्व कप जो हो रहे हैं.
लेकिन जब मैंने यहां-वहां लगे कुछ बैनर और विज्ञापन देखे तो लगा, बस इतना ही! मुझे लगता है कि भारत से आने के अपने कुछ नुकसान भी हैं.
मुझे याद हैं जब 2011 में भारत ने विश्व कप की मेज़बानी की थी जिसने क्रिकेट के लिए हर जगह मूड बना दिया था. बल्कि ये क्रिकेट के लिए पागलपन था जिसने टीम को जीताने में मदद की.
लेकिन इंग्लैंड इस मामले में ठंडा सा प्रतीत हुआ. इसी तरह लंदन, नॉटिंघम भी दिखावा करने से थोड़ा बचता है! अगर आप विश्व कप वाले स्थान ट्रेंट ब्रिज भी जायेंगे तो आपको लगेगा ही नहीं कि यहां विश्व कप की मेज़बानी हो रही है.
आज सुबह (गुरुवार) मैंने हिथ्रो से नॉटिंघम के लिए टैक्सी ली. ताहिर इमरान मुझे लगभग 173 किमी दूर ले गया. ताहिर 40 के आसपास थे और वे पाकिस्तान के वज़ीराबाद ज़िले से थे. लगभग पूरी यात्रा हमारी बातचीत क्रिकेट, भारत, पाकिस्तान पर ही हुई.
ताहिर लंदन में 20 सालों से हैं. उन्होंने एक जरूरी बात पर ध्यान दिलाया, उन्होंने कहा, ''क्रिकेट की शुरुआत इंग्लैंड से हुई थी लेकिन अब वे लोग उस तरह से मज़े नहीं लेते और उसके प्रति आकर्षित होते हैं.''
वे कहते हैं कि यहां का युवा वर्ग फुटबॉल पसंद करता है और इसलिए तीन जून को अधिकतर लोग लीवरपूल की जीत देख रहे थे, जिसने टॉटनहम हॉट्सपर को हराया था. इंग्लैंड बनाम पाकिस्तान मैच से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता.
पाकिस्तान ने दुनिया की नंबर वन टीम को हराया लेकिन लोगों को इसकी कोई परवाह नहीं थी.
यहां का मौसम दोपहर में 13 डिग्री से 11 डिग्री तक नीचे चला गया था. मौसम और भी ठंडा हो सकता है लेकिन चारों तरफ़ विश्व कप की बहस से गर्माने की उम्मीद है.
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