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मेरे बेटे ने ग़ैर-कश्मीरियों को बचाते हुए जान दी है: रऊफ़ की मां
- Author, माजिद जहांगीर
- पदनाम, श्रीनगर से, बीबीसी हिंदी के लिए
- प्रकाशित
"मेरा बेटा शहीद हुआ है. मुझे अपने बेटे पर गर्व है कि उसने पांच ग़ैर-कश्मीरियों की जान बचाई है. हर किसी को यह यह याद रखना चाहिए कि उसने दूसरों को बचाने के लिए अपनी जान दी है. हमारे परिवार का सभी को ध्यान रखना चाहिए. हम सबकुछ खो चुके हैं. वह हमारे परिवार का इकलौता कमाने वाला था. मेरे पति को कैंसर है. हमारी ज़िंदगी में जो खालीपन आ चुका है अब वह भर नहीं सकता है."
यह हाले दिल मिसरा बानो का है. मिसरा बानो के बेटे रऊफ़ अहमद डार की भारत प्रशासित कश्मीर के पहलगाम में पांच पर्यटकों की डूबने से बचाते हुए मौत हो गई थी.
जिस दिन यह हादसा हुआ उस दिन को याद करते हुए मिसरा बानो कहती हैं कि उस दिन रऊफ़ ने उनसे फ़ोन पर बात की थी और कहा था कि वह उनके लिए फल लेकर आएगा. वह कहती हैं कि रऊफ़ ने कहा था कि वह उनके लिए गोश्त बनाएं.
मिसरा कहती हैं, "शाम में मैंने फ़ोन किया लेकिन उसने नहीं उठाया. मैं उस जगह पर गई और सोचा कि नदी में कूद जाऊं. इसके बाद मैंने सोचा कि वह सुबह में आ जाएगा. लेकिन सुबह को मुझे उसकी लाश मिली. इसके बाद मुझे पता चला कि वह पर्यटकों की जान बचाते हुए डूब गया. वह बहुत रहमदिल था, अब मैं आपसे बात नहीं कर सकती क्योंकि अब मुझमें बात करने की हिम्मत नहीं है."
मिसरा को दर्जनों महिलाओं ने उनके घर में लगे टेंट के नीचे घेर रखा है और वह उन्हें सांत्वना दे रही हैं लेकिन वह हर वक़्त रोती रहती हैं और अपनी छाती पीटती रहती हैं.
बीते शुक्रवार शाम को पौने सात बजे लिद्दर नदी में यानिद राफ़्टिंग पॉइंट पर पांच पर्यटक आए थे. राफ़्टिंग टूरिस्ट गाइड रऊफ़ ने शाम होने के कारण काम बंद कर दिया था और राफ़्टिंग के लिए मना कर दिया था लेकिन पर्यटकों ने ज़िद की तो उन्होंने राफ़्टिंग कराने के लिए हामी भर दी.
कैसे हुआ था हादसा
रऊफ़ के सहायक आरिफ़ अहमद डार ने कहा, "हमने अपनी सभी नाव रख दी थीं. कुछ पर्यटकों ने रऊफ़ से राफ़्टिंग कराने के लिए कहा तो उन्होंने मना कर दिया क्योंकि हम हर रोज़ छह बजे काम बंद कर देते हैं. आख़िर में रऊफ़ ने पर्यटकों को हां कह दिया. मैं भी उस नाव में था जो डूब गई. जब हम राफ़्टिंग पॉइंट से चले और 250 मीटर गए तो हमारे नाव डूबनी शुरू हो गई और एकाएक पलट गई. सभी सातों लोग नदी में गिर गए."
"इसके बाद मैंने और रऊफ़ ने लोगों को बचाना शुरू किया हमने पांचों लोगों को बचा लिया. इस बचाव अभियान के दौरान मैं दो चट्टानों के बीच फंस गया. कुछ सेकंडों के लिए मैंने सोचा कि मैं मर गया हूं लेकिन अल्लाह के शुक्र से मैं ज़िंदा हूं. जब मैं नदी के किनारे पर सभी पर्यटकों के साथ पहुंचा तो रऊफ़ ग़ायब थे. मैंने सोचा कि उन्होंने ख़ुद को बचा लिया होगा और वह सुरक्षित होंगे लेकिन रऊफ़ कहीं नहीं थे. पानी उन्हें बहा ले गया था और वह डूब गए थे. इसके बाद अगले दिन एसडीआरएफ़, पर्यटक और स्थानीय पुलिस को राफ़्टिंग पॉइंट से चार किलोमीटर दूर रऊफ़ का शव मिला."
आरिफ़ कहते हैं, "सभी पर्यटक डरे हुए थे लेकिन उन्होंने हमारा शुक्रिया किया कि हमने उन्हें डूबने से बचा लिया. मैं अभी भी ख़ौफ़ में हूं. जब से यह घटना हुई है तब से मुझे बार-बार डराती है. लोगों को और ख़ुद को बचाना आसान नहीं था. मैंने अपने दोस्त, भाई और उस्ताद को खोया है."
रऊफ़ के घर में बड़ी संख्या में लोग उनके परिवार को सांत्वना देने के लिए आ रहे हैं.
रऊफ़ के पिता ग़ुलाम रसूल डार होटल मैनेजर हैं. वह कहते हैं कि उन्हें ख़ुशी है उनके बेटे ने अच्छे मक़सद के लिए अपनी जान दी.
वह कहते हैं, "जो भी इस दुनिया में आया है अगर वह कुछ अच्छा कहता है तो वह उस पर फ़ख़्र करत है."
लोगों को बचाने की कोशिश
रऊफ़ की नाव जब डूबी तो उसके बचाव के लिए निकली नाव में राफ़्टिंग गाइड आदिल अहमद थे. वह कहते हैं जिस जगह नाव डूबी उससे कुछ मीटर की दूर पर हम थे और देखा कि कैसे यह दुर्घटना हुई.
उन्होंने कहा, "तब काम बंद करने का समय था और हम कपड़े बदल रहे थे. दो मेहमानों ने आकर रऊफ़ साब को राफ़्टिंग के लिए कहा. हम स्टार्टिंग पॉइंट पर गए और हमारे ग्राहकों ने जैकेट और हेलमेट पहने और हमने उन्हें नाव में बैठाया. हम दो सहायक गाइड थे जो दूसरी नाव में थे. हमारी नाव में भी लोग थे. मैं उन्हें यहीं से देख रहा था और जब मैंने नाव डूबती देखी तब लोगों को नाव में से उतारकर बचाव अभियान शुरू कर दिया."
नाव कैसे डूबी जब आदिल से यह पूछा गया तो उन्होंने कहा, "नदी में उस समय तेज़ी से पानी बह रहा था. जैसे मैं देख रहा था तब नाव विपरीत दिशा में पलटी. जब नाव डूबी तो रऊफ़ ने पर्यटकों को बचाना शुरू कर दिया."
रऊफ़ के पिता के अनुसार, रउफ़ ने एमए किया था और बीएड भी कर रहे थे. अब उनके पीछे उनके माता-पिता, भाई और पत्नी रह गई है.
बीबीसी ने उन पर्यटकों से भी बात करने की कोशिश की जिन्हें रऊफ़ ने बचाया था लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी.
जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने शनिवार को रऊफ़ के परिवार को पांच लाख की सहायता राशि की घोषणा की है और उन्हें 'असली हीरो' बताया है.
रऊफ़ डार के चचेरे भाई जावेद अहमद डार का कहना है कि वह एक धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति थे, 'वह एक नेक आदमी था. वह धर्म के आधार पर कभी काम नहीं करता था.'
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