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ग्रेटर नोएडा: इमारतों के मलबे से निकाले गए तीन शव, राहत और बचाव कार्य जारी
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, ग्रेटर नोएडा के शाह बेरी गांव से
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 4 मिनट
देश की राजधानी दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में दो इमारतें ढह जाने से कुछ लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है. अब तक मलबे से तीन शव निकाले जाने की पुष्टि हो चुकी है.
शाह बेरी गांव में यह हादसा मंगलवार की रात आठ से साढ़े आठ बजे के क़रीब हुआ. ढहने वाली इमारतों में से एक निर्माणाधीन थी जबकि दूसरी वाली दो साल पहले बनकर तैयार हुई थी.
अभी तक आधिकारिक आंकड़ा नहीं मिल पाया है कि यहां कितने लोग रहते थे और कितने लोग मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं.
मौक़े पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मलबे के नीचे दबे हुए लोगों की संख्या 10 से भी कम हो सकती है.
एनडीआरएफ़ के जन संपर्क अधिकारी कृष्ण कुमार ने बीबीसी को बताया कि मौके पर चार टीमें राहत कार्यों में लगी हैं. हर टीम में 45-45 बचावकर्मी हैं. उन्होंने बताया कि सुबह 9 बजे तक करीब 10 फीसदी ही मलबा हटाया जा सका है.
कैसे हुआ हादसा
बगल की इमारत में रहने वाले शख्स ने बीबीसी को बताया कि निर्माणाधीन इमारत छह मंज़िला थी और एक पांच मंज़िला इमारत उससे सटी हुई थी.
उन्होंने कहा कि पुरानी इमारत में ज़्यादा लोग नहीं रहते थे और शाम को एक महिला और एक बच्ची ही उन्हें नज़र आई थी.
मूलत: किशनगंज की रहने वालीं आरसी बेग़म इस इलाक़े में लोगों के घरों में खाना बनाने का काम करती हैं. वह बताती हैं कि यह हादसा उनकी आंखों के सामने ही हुआ.
आरसी बेग़म ने बीबीसी को बताया, "मैंने इमारत को अपनी आंखों से गिरते देखा. मैंने देखा कि पहले नई वाली बिल्डिंग धड़ाम से गिरी और धूल का ग़ुब्बार उठा. इसके बाद हम लोग यहां से भाग गए. थोड़ी ही देर बाद पुरानी वाली इमारत भी गिर गई."
वह बताती हैं कि उन्होंने भी पुरानी बिल्डिंग में कभी ज़्यादा लोग नहीं देखे.
विरोधाभासी दावे
ख़ुद को प्रत्यक्षदर्शी बता रहे लोगों के घटना को लेकर किए जा रहे दावों में विरोधाभास भी देखने को मिल रहा है.
घटनास्थल के पास ही रहने वाले मिंटू डेका और उनकी पत्नी शिखा डेका का कहना है कि वे पिछले तीन साल से यहां रह रहे हैं.
उनका दावा है कि पहले नई नहीं, बल्कि पुरानी इमारत गिरी थी. उनका यह भी दावा है कि घटना साढ़े आठ बजे नहीं बल्कि सवा नौ बजे के क़रीब हुई थी.
शिखा डेका ने बीबीसी को बताया, "हम सवा नौ बजे मार्केट से लौट रहे थे. हम नई इमारत में काम करने वाले मज़दूरों के बच्चों को पढ़ाते हैं. पुरानी इमारत में दो-तीन परिवार रहते थे जिनमें से एक ने तो कल ही गृहप्रवेश की पूजा की थी."
शिखा का दावा है कि जो मज़दूर निर्माणाधीन इमारत में काम करते थे, उनके परिवार रात को पुरानी बिल्डिंग में चले जाते थे. उनका कहना है कि यहां 15-16 मज़दूरों के परिवार थे, ऐसे में दबने वालों की संख्या 40 से 50 हो सकती है.
डेका दंपती ने यह भी दावा किया कि इमारत में घटिया निर्माण सामग्री इस्तेमाल की गई थी.
घटना के कारणों का पता नहीं
अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि इमारतों के ढहने की वजह क्या थी. इन इमारतों के मालिक के बारे में भी अभी तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है.
घटनास्थल पर प्रशासन और एनडीआरएफ़ की टीम के सदस्य बचाव और राहत कार्य में लगे हुए हैं.
मलबे के नीचे फंसे लोगों का पता लगाने के लिए स्निफ़र डॉग्स की मदद भी ली गई है मगर अभी तक किसी के ज़िंदा होने के संकेत नहीं मिले हैं.
केंद्रीय संस्कृति मंत्री और गौतम बुद्ध नगर के सांसद महेश शर्मा भी यहां पहुंचे. उन्होंने बीबीसी को बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद सीधे वह यहां आए हैं और अभी तक पक्के तौर पर यह नहीं कहा जा सकता कि कितने लोग दबे हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि पहले हमारी प्राथमिकता मलबे को हटाने की है.
मौक़े पर मौजूद अधिकारियों का मानना है कि दोनों इमारतों के मलबे को हटाने में कम से कम छह घंटों का समय लग सकता है.
सीएम ने दिए जांच के आदेश
उत्त प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं. मुख्यमंत्री कार्यालय के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से ट्वीट करके इस बात की जानकारी दी गई है.
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने भी ट्वीट करके कहा है कि घटना के लिए दोषी पाए जाने वालों के ख़िलाफ़ कठोर कार्रवाई की जाएगी.
उधर गौतम बुद्ध नगर के ज़िला अधिकारी वीएन सिंह ने एक समाचार चैनल से बात करते हुए कहा, "मलबे में कुछ लोगों के दबे होने की आशंका है. एनडीआरएफ़ ने काम शुरू कर दिया है और सभी अधिकारी हरकत में आ गए हैं. अभी हम यह नहीं बता सकते कि कितने लोग इसमें दबे हो सकते हैं."
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