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ईरान की कोयला खदान में विस्फोट, कम से कम 51 लोगों की मौत
- Author, थॉमस मैकिन्टोश
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
पूर्वी ईरान के कोयला खदान में हुए एक विस्फोट से कम से कम 51 लोगों की मौत हो गई है. सरकारी मीडिया ने इस घटना की पुष्टि की है.
बताया जा रहा है कि खदान के दो ब्लॉकों में मीथेन गैस के रिसाव की वजह से यह विस्फोट हुआ है.
यह खदान ईरान की राजधानी तेहरान से क़रीब 540 किलोमीटर दूर दक्षिणपूर्व में तबास में है. स्थानीय समयानुसार यह धमाका शनिवार रात 9 बजे (भारतीय समयानुसार रात 11 बजे) हुआ.
दक्षिण खुरासान के गवर्नर जवाद घेनात्ज़ादेह ने कहा है कि विस्फोट के समय ब्लॉक में 69 लोग मौजूद थे.
समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक़ जवाद घेनात्ज़ादेह ने कहा, "मदनज़ू खदान में एक विस्फोट हुआ है, दुर्भाग्य से उस वक्त ब्लॉक बी और सी में 69 लोग काम कर रहे थे."
"ब्लॉक सी में 22 लोग मौजूद थे, जबकि ब्लॉक सी में 47 लोग थे."
यह अभी भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि कितने लोग अभी जीवित हैं और कितने खदान के अंदर फंसे हुए हैं.
हालांकि सरकारी मीडिया ने मृतकों के आंकड़ों में संशोधन किया है. पहले बताया गया था कि इस हादसे में 30 मजदूरों की मौत हुई है.
समाचार एजेंसी आईआरएनए ने जानकारी दी, "हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 51 पहुंच गई है, जबकि घायलों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है."
ईरान के रेड क्रिसेंट के प्रमुख का हवाला देते हुए, सरकारी टीवी ने रविवार को कहा था कि 24 लोग लापता हैं.
राष्ट्रपति ने दिए जांच के आदेश
रॉयटर्स समाचार एजेंसी के मुताबिक़ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की है.
पेज़ेशकियान ने टीवी पर प्रसारित एक वीडियो में कहा, "मैंने मंत्रियों से बात की है और हम इस मामले पर नज़र रखेंगे."
अल ज़ज़ीरा के मुताबिक़, राष्ट्रपति पेज़ेशकियान संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में शामिल होने के लिए न्यूयॉर्क जाने की तैयारी कर रहे थे. उन्होंने कहा है कि खदान में फंसे सभी लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हरसंभव प्रयास करने और पीड़ित परिवारों की मदद करने के आदेश दिए गए हैं.
उन्होंये साथ ही ये भी कहा कि इस घटना की जांच करने के आदेश दिए गए हैं.
आईआरएनए के मुताबिक़, तबास खदान 30 हज़ार वर्ग किलोमीटर (लगभग 11,600 वर्ग मील) से अधिक क्षेत्र में फैली है.
आईआरएनए के अनुसार, "इसे ईरान की सबसे बड़ी और सबसे समृद्ध खदान माना जाता है."
सरकारी मीडिया ने स्थानीय सरकारी वकील अली नेसाई के हवाले से कहा, "खदान में गैस जमा होने के कारण राहत बचाव कार्य में मुश्किल पेश आ रही है."
नेसाई ने कहा, "अभी हमारी प्राथमिकता है कि घायलों का इलाज कराया जाए और मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला जाए."
उन्होंने कहा, "इस हादसे से संबंधित लोगों की ग़लती और लापरवाही पर बाद में कार्रवाई की जाएगी."
इससे पहले भी हुए हैं हादसे
ईरान की खदानों में इससे पहले भी ऐसे हादसे हुए हैं.
पिछले साल दामगन के उत्तरी शहर में स्थित कोयला खदान में हुए विस्फोट में छह लोगों की मौत हो गई थी. स्थानीय मीडिया के मुताबिक़ हो सकता है कि यह हादसा मीथेन गैस के रिसाव की वजह से हुआ था.
मई 2021 में इसी खदान में दो लोगों की मौत हो गई थी. स्थानीय मीडिया के मुताबिक़ खदान के ढहने से ऐसा हुआ था.
साल 2017 में उत्तरी ईरान के आज़ाद शहर में स्थित एक कोयला खदान में विस्फोट हुआ था. इस हादसे में 43 लोगों की जान चली गई थी, जिसकी वजह से ईरानी अधिकारियों के प्रति लोगों में गुस्सा था.
अल ज़ज़ीरा के मुताबिक साल 2013 में दो अलग-अलग खदानों में हादसे हुए थे जिनमें 11 मज़दूरों की जान गई थी. वहीं 2009 में इस तरह की कई घटनाएं हुई थीं, जिनमें कम से कम 20 कामग़ार मारे गए थे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित