चार नहीं बल्कि आठ राउंड हुई थी एके 47 से फ़ायरिंग, सिवान पुलिस की थ्योरी पर कई सवाल

सिवान

इमेज स्रोत, @yadavtejashwi

इमेज कैप्शन, छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान सिवान ज़िले में एके-47 से फ़ायरिंग का मामला सामने आया था (फ़ाइल फ़ोटो)
    • Author, सीटू तिवारी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 11 मिनट

देश भर में नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्रों के प्रदर्शन के दौरान बिहार का सिवान ज़िला चर्चा में रहा. बीती 25 जुलाई को सिवान में प्रदर्शन के दौरान एके 47 राइफ़ल का इस्तेमाल हुआ था.

प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ एके 47 के इस्तेमाल को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से लेकर बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया था.

तेजस्वी यादव ने कहा कि सम्राट सरकार बिहार को 'पुलिस स्टेट' बना रही है, वहीं राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट किया था, "दिल्ली में पैलेट गन और बिहार में एके 47. पूरा सिस्टम स्टूडेंट्स के ख़िलाफ़ जानलेवा है."

ऐसे में ये सवाल उठना लाज़िमी है कि सिवान में 25 जुलाई को क्या हुआ था?

एके 47 से फ़ायरिंग किसके आदेश पर हुई?

पुलिस प्रशासन अपनी सफाई में जो थ्योरी दे रही है, क्या वो सही है? क्या सिपाही अभिषेक कुमार भीड़ में फंस गए थे? और क्या प्रदर्शनकारियों की तरफ से भी गोली चलाई गई?

इन सवालों के जवाब हमने इस रिपोर्ट में ढूंढने की कोशिश की है.

बिहार विरोध प्रदर्शन

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, 25 जुलाई 2026 को पटना के डाकबंगला चौराहे पर नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए आयोजित 'बिहार बंद' प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मी युवाओं और छात्रों को हिरासत में लेते हुए

क्या हुआ था 25 जुलाई को?

25 जुलाई को सिवान शहर में छात्र समूहों के दो आयोजन थे.

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
Dinbhar: आवाज़ वही, अंदाज़ नया

देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां.

एपिसोड

समाप्त

पहला, छात्र संगठन आइसा का बिहार बंद और दूसरा, स्थानीय छात्रों के एक स्वतंत्र समूह का सिवान के गांधी मैदान में शांतिपूर्ण सभा का आयोजन.

आइसा ने बिहार बंद का कॉल 23 जुलाई को जबकि छात्रों के इंडिपेंडेंट समूह ने अपने कार्यक्रम की घोषणा 22 जुलाई को ही कर दी थी.

छात्रों के इंडिपेंडेंट समूह के आयोजकों में से एक अल्ताफ़ राजा थे. उन्होंने बीबीसी न्यूज़ हिंदी को बताया, "चूंकि देश में जगह-जगह पर उपद्रव हो रहा था इसलिए हम लोगों ने एक ग़ैर राजनीतिक शांतिपूर्ण आयोजन किया था. हम लोगों ने तय किया था कि तिरंगे के अलावा किसी झंडे का इस्तेमाल नहीं होगा. इस आयोजन के लिए प्रशासन से अनुमति भी ली गई थी. सुबह 10 बजे कार्यक्रम शुरू हुआ और 11.40 बजे तक हम लोगों ने 'जन गण मन' गाकर अपने कार्यक्रम की समाप्ति की घोषणा की."

जहां सिवान के गांधी मैदान में इंडिपेंडेंट समूह का ये आयोजन चल रहा था, वहीं दूसरी तरफ तकरीबन 500 मीटर की दूरी पर जेपी चौक पर आइसा का प्रदर्शन चल रहा था.

इस प्रदर्शन में शामिल भाकपा माले के पूर्व विधायक अमरजीत कुशवाहा ने बीबीसी हिन्दी से कहा, "हम लोगों ने जेपी चौक पर सुबह से भी धरना शुरू कर दिया था. सुबह 11 बजे तक तकरीबन 5,000 की भीड़ जुट गई थी. इस बीच हम लोगों ने बबुनिया मोड़ होते हुए चंदू चौक के पास एक सभा की. यहां हम लोगों ने करीब 12 बजे सभा समाप्ति की घोषणा कर दी."

बिहार बंद

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, 25 जुलाई 2026 को पटना में 'बिहार बंद' के दौरान की तस्वीर

दोपहर बारह बजे के बाद शुरू हुआ हंगामा

इस आंदोलन के दौरान हिंसा कब शुरू हुई?

इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमने सिवान न्यूज़ पोर्टल के राहुल कुमार से बात की. राहुल ने इस पूरे घटनाक्रम की कवरेज की थी. सिवान न्यूज़ पोर्टल एक दशक से सिवान में काम कर रहा है.

राहुल कुमार बताते हैं, "आयोजन खत्म होने के बाद कुछ प्रदर्शनकारी गांधी मैदान में आए और नारेबाज़ी करने लगे. यहीं उनका पुलिस के साथ पहला कॉन्फ्लिक्ट हुआ. इस बीच गांधी मैदान के दक्षिणी हिस्से से पत्थर चलने लगे जिसमें एक पत्थर एसपी पूरन कुमार झा को लगा. जिसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग किया."

सिवान में कांग्रेस नेता सुशील कुमार बताते हैं, "गांधी मैदान में हो रहे आयोजन में आइसा के कुछ लोग झंडा लेकर आ गए थे जिसके बाद छात्रों के इंडिपेंडेंट समूह ने विरोध किया और जल्दी से कार्यक्रम खत्म कर दिया. इस बीच छात्रों के अलग–अलग गुटों में टकराव बढ़ा और माहौल बिगड़ा. इस पर काबू पाने लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया."

इस बल प्रयोग के बाद प्रदर्शनकारी तितर-बितर हुए. प्रदर्शनकारी गांधी मैदान और जेपी चौक के आसपास के इलाकों में फैल गए. इस बीच प्रदर्शनकारियों के एक जत्थे ने नगर परिषद मोड़ के पास पहुंचकर पुलिस पर ईंट पत्थर फेंकना शुरू कर दिया.

पटना विरोध प्रदर्शन

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, 22 जुलाई 2026 को पटना में मुख्यमंत्री आवास के पास नीट पेपर लीक के विरोध में आयोजित 'लोक भवन मार्च' के दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के कार्यकर्ताओं और छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज करती हुई

घटना की टाइमलाइन

सिवान में पत्रकारों ने घटना का जो वीडियो रिकार्ड किया है, उसकी टाइमलाइन देखें तो नगर परिषद मोड़ की तरफ़ बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों की तरफ़ से तकरीबन साढ़े बारह बजे पत्थरबाज़ी शुरू होती है और पांच मिनट के अंदर ही एसआईटी जवान अभिषेक कुमार एके 47 से फ़ायरिंग कर देता है.

पत्रकार राहुल कुमार बताते हैं, " एके 47 से ही पहली फ़ायरिंग हुई. उस वक़्त एसपी वहीं मौजूद थे. इस फ़ायरिंग के बाद प्रदर्शनकारी भागने लगे और पुलिस ने उन्हें खदेड़ना शुरू किया. जिसके बाद जेपी चौक और हॉस्पिटल रोड के बीच फिर एके 47 का इस्तेमाल हुआ. इसके बाद प्रदर्शनकारी गलियों में घुसे जहां से पुलिस ने उन्हें लाठीचार्ज करके खदेड़ा."

सारण रेंज के डीआईजी (पुलिस उप महानिरीक्षक) नीलेश कुमार ने भी बीबीसी से बातचीत में इस बात की पुष्टि की है कि सिवान पुलिस ने पहली गोली एके 47 से ही चलाई थी.

सिवान एसपी पूरन कुमार झा ने 27 जुलाई को बीबीसी से कहा था, "पुलिस ने भीड़ पर काबू पाने के लिए फायरिंग की थी लेकिन तीन घायलों में से किसी को एके 47 की गोली नहीं लगी है. घायल युवकों में से एक व्यक्ति को पुलिस की गोली लगी है. जबकि बाकी दो किसकी गोली से घायल हुए, इसकी जांच चल रही है."

वीडियो कैप्शन, जुनैद सीजेपी और पुलिस ,जंतर-मंतर पर खाना खिलाने को लेकर क्या बोले?

एके 47 से 4 नहीं बल्कि कम से कम 8 राउंड फ़ायरिंग हुई

पटना

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, 22 जुलाई 2026 को पटना में मुख्यमंत्री आवास के पास नीट पेपर लीक के विरोध में आयोजित 'लोक भवन मार्च' के दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के कार्यकर्ताओं और छात्रों पर पुलिस आंसू गैस के गोले छोड़ती हुई

सिवान में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान एके 47 के इस्तेमाल पर मचे बवाल के बाद बिहार पुलिस बैकफुट पर दिख रही है.

बिहार पुलिस मुख्यालय ने बीती 27 जुलाई को एक प्रेस रिलीज जारी की. इसके मुताबिक, "जे पी चौक के पास बंद समर्थकों से घिर जाने के कारण वहां तैनात पुलिस कर्मियों में से एक सिपाही अभिषेक कुमार द्वारा जानमाल एवं सरकारी संपत्ति की सुरक्षा हेतु एके 47 से 4 राउंड गोली ऊपर की तरफ बैरल करके चलाया गया. सिपाही अभिषेक कुमार को निलंबित कर दिया गया है और विभागीय कार्यवाही चलाई जा रही है."

लेकिन इस पूरे घटना क्रम का वीडियो जो बीबीसी के पास है, उसमें ये जवान यानी अभिषेक कुमार एके 47 से कम से कम 8 राउंड फायरिंग करते हुए दिख रहा है.

साथ ही वो हवा में फायरिंग करते नहीं दिख रहे है बल्कि उन्होने एके 47 से 'इफेक्टिव फायरिंग' की है. यानी ऐसी फायरिंग जिसमें किसी को गोली लग सकती है.

बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी बिहार पुलिस के हवाई फायरिंग के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा 'गोली हवा में नहीं चलाई गई थी'.

बिहार

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, 22 जुलाई 2026 को पटना के डाकबंगला चौराहे पर नीट पेपर लीक के विरोध में आयोजित 'लोक भवन मार्च' के दौरान प्रदर्शन कर रहे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के कार्यकर्ताओं और छात्रों पर पुलिस नज़र रखती हुई

किसके आदेश से चली एके 47?

25 जुलाई को घटी इस घटना के बाद एसपी पूरन कुमार झा ने घटनास्थल पर पत्रकारों से बातचीत में इस बात को खारिज कर दिया था कि फायरिंग हुई है. उन्होने उस वक्त कहा था, 6 से 7 राउंड के आंसू गैस के गोले चलाए गए हैं.

हालांकि बाद में 27 जुलाई को बीबीसी से बातचीत में एसपी ने माना कि एके 47 का इस्तेमाल जानमाल और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए हुआ था.

सिविल पुलिस ध्दारा एके 47 का इस्तेमाल किसके आदेश पर हुआ?

बीबीसी ने ये सवाल सारण रेंज के डीआईजी नीलेश कुमार से पूछा तो उन्होने कहा, " मैनें अभिषेक से खुद बात की. वो डीआईयू (डिस्ट्रिक्ट इंटेलीजेंस यूनीट) का जवान है और सिवान स्टेशन की तरफ हुई किसी हत्या के मामले के संबंध में जा रहा था. इस बीच वो भीड़ में फंस गया और उसने एके 47 चला दी. उसको किसी ने आदेश नहीं दिया था. इसलिए उसे निलंबित कर दिया गया है."

नीलेश कुमार ने इससे ज्यादा किसी तरह की जानकारी नहीं दी और फोन डिसकनेक्ट कर दिया.

बिहार

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, 22 जुलाई 2026 को पटना में नीट परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग करते हुए आयोजित विरोध मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी हाथों में तिरंगा लेकर नारे लगाते हुए

क्या सिपाही भीड़ में फंस गया था?

सारण रेंज के डीआईजी नीलेश कुमार का बयान, 25 जुलाई को उपलब्ध वीडियो से मेल नहीं खाता.

वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि एके 47 से फायरिंग के वक्त अभिषेक कुमार भीड़ में नहीं फंसे थे.

बल्कि प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच जब नगर परिषद मोड़ के पास पत्थरबाजी शुरू हुई तो प्रदर्शनकारी एक तरफ थे और दूसरी तरफ यानी प्रदर्शनकारियों के ठीक सामने अभिषेक सहित अन्य पुलिसकर्मी थे. अभिषेक ने इसी वक्त पहली बार एके 47 का इस्तेमाल किया था.

साथ ही बीबीसी के पास उस एफ़आईआर की कॉपी उपलब्ध है जो नगर थाना सिवान के एसआई प्रशांत कुमार ने 25 जुलाई को की है. इस एफ़आईआर की कॉपी में लिखा है, " जान माल के सुरक्षा हेतु भीड़ को तितर बितर करने के लिए नियंत्रित रूप से मेरे साथ प्रतिनियुक्त सिपाही अभिषेक कुमार एके 47 के ध्दारा 4 चक्र गोली चलाई गई."

यानी डीआइयू के सिपाही अभिषेक कुमार भीड़ में फंसे नहीं थे बल्कि एफ़आईआर के मुताबिक उनकी प्रतिनियुक्ति एसआई प्रशांत कुमार के साथ थी. उस दिन ख़ुद प्रशांत कुमार की प्रतिनियुक्ति बिहार बंद के दौरान जेपी चौक पर थी.

प्रतिनियुक्त या डेप्यूटेशन का मतलब होता है किसी कर्मचारी या अधिकारी को उसके मूल विभाग या पद से हटाकर किसी अन्य विभाग, कार्यालय या स्थान पर भेजना या नियुक्त करना.

बिहार पुलिस के एक वरीय अधिकारी नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं, " यदि वो डिस्ट्रिक्ट इंटेलीजेंस यूनीट का सिपाही है तो वो सादे कपड़ों में क्यों नहीं था? इंटेलीजेंस का मतलब है अनुसंधान यूनीट जो वर्दी नहीं पहनती."

निलंबित सिपाही अभिषेक कुमार वायरल वीडियो में पुलिस की वर्दी, हेल्मेट और बॉडी प्रोटेक्टर में नज़र आ रहे है, जो पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठा रहा है.

पटना

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, 22 जुलाई 2026 को पटना में मुख्यमंत्री आवास के पास नीट पेपर लीक के विरोध में आयोजित 'लोक भवन मार्च' के दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के कार्यकर्ताओं और छात्रों पर पुलिस वॉटर कैनन का इस्तेमाल करती हुई

एक नहीं बल्कि दो जवानों के पास थी एके47

सवाल ये भी है कि क्या एके 47 को पब्लिक स्पेस में इस तरह लेकर जाया जाना चाहिए?

सिवान के जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने स्थानीय पत्रकारों से कहा, "उनको (अभिषेक कुमार) हवाई फ़ायरिंग नहीं करनी चाहिए थी. उन्हें ऐसा कोई आदेश नहीं था. उन्हें इस तरह का शस्त्र पब्लिक में नहीं ले जाना चाहिए. लेकिन जैसा कि एसपी साहब ने बताया कि वो (अभिषेक कुमार) कहीं जा रहा था और प्रोटेस्ट में फंस गया था."

जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ऐसे शस्त्र यानी एके 47 को पब्लिक स्पेस में लेकर नहीं जाने की बात कह रहे हैं, लेकिन एसपी पूरन कुमार झा जब सिवान के गांधी मैदान में थे तो उनके साथ दो ऐसे जवान थे जिनके पास एके 47 थी.

इस संबंध में पूछे जाने पर बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद बीबीसी से कहते हैं, "अगर एसपी को बॉडीगार्ड में जो जवान मिले है, उनके पास एके 47 है तो वो एसपी के साथ जाएंगे ही. महत्वपूर्ण बात ये है कि कौन सी ऐसी परिस्थिति बनी जिसमें एके 47 का इस्तेमाल किया गया. सिवान पुलिस ने जल्दबाज़ी दिखाई. पुलिस धैर्य से काम ले सकती थी."

बिहार

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, एक जुलाई 2026 को पटना में जेपी गोलंबर के पास राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत विश्वविद्यालयों में चार वर्षीय स्नातक (ऑनर्स विद रिसर्च) पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए 7.5 सीजीपीए की अनिवार्य शर्त के विरोध में राजभवन मार्च निकाल रहे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के सदस्यों को पुलिस हिरासत में लेती हुई

क्या लोगों की तरफ से भी फायरिंग हुई?

25 जुलाई को हुए आंदोलन के दौरान तीन युवक घायल हुए. बुलेट कुमार, आकाश कुमार और एक नाबालिग.

पुलिस का दावा है कि इसमें बुलेट कुमार को पुलिस की गोली लगी है जबकि बाकी दो को किसकी गोली लगी, इसकी जांच की जा रही है.

यानी सिवान पुलिस का दावा है कि प्रदर्शनकारियों की तरफ से भी फायरिंग हुई.

सिवान के मुफ़्फ़सिल थाना के एएसआई निलेश कुमार सिंह की तरफ़ से दर्ज एफ़आईआर में लिखा है, " भीड़ से फायरिंग की जा रही थी. जिसके बाद जान माल के सुरक्षार्थ व आत्मरक्षार्थ सरकारी पिस्टल से दो राउंड हवाई फायरिंग की. घटनास्थल के आसपास खोजने पर .315 का तीन खोखा एवं .765 का दो खोखा बरामद हुआ जिसकी जब्ती सूची तैयार की गई है."

सिवान सदर के कार्यपालक दंडाधिकारी रविन्द्र कुमार ध्दारा दर्ज एफ़आईआर में भी लिखा है, " उपद्रवियों ध्दारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पुलिस बल पर फायरिंग और पत्थरबाजी की गई."

लेकिन एक स्थानीय पत्रकार नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं, " उस दिन पूरे आंदोलन को सैकड़ों कैमरे रिकार्ड कर रहे थे. जिन मोबाइल कैमरों ने पुलिस के एके47 के इस्तेमाल, प्रदर्शनकारियों की पत्थरबाजी, लाठीचार्ज को रिकार्ड कर लिया, उसमें पब्लिक ध्दारा चलाई गई गोली रिकार्ड क्यों नहीं हुई?"

पटना

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, 22 जुलाई 2026 को पटना के जेपी गोलंबर पर नीट पेपर लीक के विरोध में आयोजित 'लोक भवन मार्च' के दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के कार्यकर्ताओं और छात्रों की रैली को पुलिस रोकती हुई

क्या सिवान पुलिस ने फॉलो की थी एसओपी?

किसी आंदोलन में ऐसी स्थिति बनने पर एसओपी क्या है?

ऐसे मामलों में सबसे पहले 'नाजायज मजमा' घोषित किया जाता है जिसे माइक से अनांउस करना होता है. उसके बाद वॉटर कैनन, लाठी चार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल होता है.

क्या सिवान पुलिस ने एसओपी को फॉलो किया?

सिवान में 25 जुलाई को जो वीडियो रिकार्ड हुए हैं, उनमें माइकिंग या वॉटर कैनन का इस्मेताल होता नहीं दिख रहा है. तय एसओपी में सिवान पुलिस ने भीड़ पर काबू पाने के लिए आंसू गैस के गोले और लाठीचार्ज का इस्तेमाल करती दिख रही है.

बिहार पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के मुताबिक सिवान में छात्र आंदोलन में 6 एफ़आईआर दर्ज़ हुई जिसमें 82 नामजद अभियुक्त थे. इस आंदोलन में एसपी पूरन कुमार झा, दो डीएसपी सहित 20 पुलिसकर्मी घायल हुए.

गृह विभाग ने इस पूरे घटनाक्रम पर आयुक्त और डीआईजी से रिपोर्ट तलब की है.

बीबीसी ने इस पूरे मामले में सिवान के जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें

BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह

कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.