पाकिस्तान के पीएम शहबाज़ शरीफ़ ने पूछा, क्यों नहीं दी जा रही इमरान ख़ान की मेडिकल रिपोर्ट?

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने देश के सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस से इमरान ख़ान पर हुए हमले की जाँच के लिए न्यायिक आयोग बनाने की मांग की है.
इसके अलावा पीएम शरीफ़ ने कीनिया में मारे गए पाकिस्तानी पत्रकार अरशद शरीफ़ की हत्या की भी जांच की मांग की है.
पीएम शहबाज़ शरीफ़ ने चीफ़ जस्टिस उमर अता बंडियाल को एक ख़त लिखकर हत्या के प्रयास की जाँच का निवेदन किया है.
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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान पर बीते गुरुवार को पाकिस्तानी पंजाब के वज़ीराबाद इलाक़े पर जानलेवा हमला हुआ था. इमरान ख़ान अपनी पार्टी के लाहौर से इस्लामाबाद तक मार्च का अगुवाई कर रहे थे.
हमले में इमरान ख़ान को गोली लगी थी जिसके बाद लाहौर के अस्पताल में उनकी सर्जरी हुई थी.
इमरान ख़ान ने ख़ुद पर हमले के लिए पीएम शहबाज़ शरीफ़, गृहमंत्री राना सनाउल्लाह और एक आर्मी जनरल को ज़िम्मेदार बताया था. ये सभी लोग इमरान ख़ान के आरोपों को ख़ारिज कर चुके हैं.
इमरान ख़ान की पार्टी तहरीके इंसाफ़ के नेता उमर असद ने एक पाकिस्तानी टीवी चैनल को बताया है कि वे ऐसे किसी भी कमीशन के समक्ष इन तीन लोगों के ख़िलाफ़ सबूत देने को तैयार हैं.

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पीएम ने लिखी चिट्ठी
चीफ़ जस्टिस बंडियाल को लिखी चिट्ठी में पीएम शहबाज़ शरीफ़ ने सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज से हमले की जांच की गुज़ारिश की है.
शरीफ़ ने सुझाव दिया है कि जाँच आयोग को पाँच अहम सवालों पर अपनी तफ़्तीश केंद्रित करनी चाहिए.
इन पाँच सवालों पर हो जाँच
- कौन से सुरक्षा बल पर उन्हें सुरक्षा देने का जिम्मा था?
- क्या सिक्योरिटी प्रोटोकॉल और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिज़र को पालन किया गया?
- क्या सुरक्षा बलों और सिविल प्रशासन ने तफ़्तीश, सबूत इकट्ठा करने और घटना के बाद के प्रोसिजर का पालन किया?
- सुरक्षा में क्या कोताही हुई और इसके कौन ज़िम्मेदार?
- क्या इमरान ख़ान पर चली गोली उनकी हत्या की आपराधिक साज़िश का नतीजा या हमलावर अकेला ही था?

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‘चार गोलियाँ थीं, आठ या सोलह?’
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पीएम शहबाज़ शरीफ़ ने अपने पत्र में हमले के बाद एफ़आईआर रजिस्टर करने में हुई देरी का भी उल्लेख किया है.
उन्होंने लिखा है कि पंजाब में तहरीके इंसाफ़ का शासन है और उसके अधीन एजेंसियों ने हमले के बाद जांच के लिए बने-बनाए नियमों का उल्लंघन किया है.
शहबाज़ शरीफ़ ने एक समारोह में इमरान पर हमले के लिए पंजाब सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए बोला, “अगर इस मामले में तुरंत एफ़आईआर नहीं हुआ तो पंजाब सरकार से पूछें. पंजाब में इनकी अपनी हुकूमत है, मेरी तो नहीं है. आईजी इनका है, गृह सचिव इनका है. वो चार गोलियाँ थीं, आठ गोलियाँ हैं सोलह…ये क़ौम को बताएँ.
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमले के इतने दिन बाद भी अब प्रशासन को इमरान ख़ान की मेडिकल रिपोर्ट, फ़ॉरेंसिक जाँच के लिए मुहैया नहीं करवाई गई है.
उन्होंने आरोप लगाया है कि पंजाब सरकार केस की सही तफ़्तीश नहीं कर रही है और इसकी वजह से सबूतों से छेड़छाड़ हो सकती है.
ये अभी साफ़ नहीं है कि न्यायिक जाँच आयोग का गठन कब तक होता है.
इमरान ख़ान ने इस फ़ैसले का सशर्त स्वागत किया है. उन्होंने कहा है कि जब तक तीन लोग अपने पद पर हैं, स्वतंत्र जाँच संभव नहीं है.
सबूत देने को तैयार

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इमरान ख़ान की पार्टी तहरीके इंसाफ़ के वरिष्ठ नेता असद उमर ने पाकिस्तानी न्यूज़ चैनल एआरवाई को बताया कि अगर हुकूमत भी मान गई है कि अदालती जाँच होनी चाहिए तो ये बिल्कुल दुरूस्त है.
उन्होंने कहा, “ये तहक़ीक़ात सिर्फ़ शहबाज़ शरीफ़ के सवालों तक सीमित नहीं रह सकती. वो तो फिर खुली इंवेस्टीगेशन होगी. पीएम और होम मिनिस्टर का रोल क्या था…इन तमाम चीज़ों की जाँच होनी चाहिए."
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असद उमर ने कहा कि जब तक अभियुक्त अपने पदों में बैठे है, तब तक वे कैसे सही जाँच होने देंगे, इसलिए इन्हें पद से हटाया जाना चाहिए.
उनका कहना था कि वे इन तीनों लोगों के ख़िलाफ़ सबूत न्यायिक कमिशन को देने के लिए तैयार हैं.
असद उमर ने अपनी पार्टी का वो दावा भी दोहराया की इमरान पर सिर्फ़ एक व्यक्ति ने हमला नहीं किया था, गोलियाँ कम से कम दो जगह से चली थीं.

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उधर पाकिस्तान के सत्तारूढ़ गठबंधन ने इमरान ख़ान पर हमले तेज़ कर दिए हैं.
सत्तारूढ़ गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट के प्रमुख मौलाना फ़ज़लुर ने हाल में ही में इमरान ख़ान पर कुछ तीख़ी टिप्पणियां की थीं.
एक जानलेवा हमले में घायल हुए इमरान को उन्होंने एक अच्छा एक्टर बताया था.
उन्होने कहा था कि एक्टिंग में इमरान ख़ान ने शाहरूख़ और सलमान ख़ान को भी पीछे छोड़ दिया है.
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