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एनडीए का हिस्सा बने यूसुफ़ पठान को मिल गया विवादित प्लॉट, कांग्रेस का हंगामा
वडोदरा महानगरपालिका (वीएमसी) ने पूर्व क्रिकेटर और सांसद यूसुफ़ पठान को एक प्लॉट आवंटित करने के मुद्दे पर शुक्रवार को अंतिम निर्णय ले लिया.
यूसुफ़ पठान कुछ महीने पहले ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से अलग हो गए थे और अभी बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ हैं.
यूसुफ़ पठान वडोदरा में अपने बंगले के पास सरकारी ज़मीन का एक प्लॉट लेना चाहते थे, लेकिन अब तक गुजरात सरकार इसके लिए तैयार नहीं थी.
बीबीसी गुजराती के मुताबिक महानगरपालिका की स्थायी समिति ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को मंज़ूरी दी.
हालांकि, विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इस फैसले के ख़िलाफ़ आक्रामक रुख़ अपनाया और पालिका परिसर में ज़ोरदार नारेबाजी करते हुए कड़ा विरोध प्रदर्शन किया.
कांग्रेस ने 'एक वोट की कीमत 15 करोड़', 'वीएमसी (वीएमसी) के दामाद यूसुफ पठान', और 'वोट चोर, प्लॉट चोर, नोट चोर' जैसे नारों के साथ अपना विरोध जताया.
वडोदरा शहर कांग्रेस अध्यक्ष ऋत्विज जोशी ने कहा, "भाजपा ने यह प्लॉट यूसुफ़ पठान को मुफ्त में दे दिया. वह पिछले 14 सालों से इस ज़मीन पर कब्ज़ा जमाए हुए थे. भाजपा नेताओं ने पूर्व में पठान के ख़िलाफ़ लैंड ग्रैबिंग (जमीन हड़पने) का मामला दर्ज करने की बात कही थी, तो फिर आज यह प्लॉट क्यों दे दिया गया? भले ही क्रिकेटर राधा यादव ने अकादमी खोलने के लिए जमीन मांगी थी, लेकिन सरकार ने उन्हें ज़मीन नहीं दी. तो फिर इस मामले में ऐसा पक्षपात क्यों?"
स्थायी समिति की अध्यक्ष वर्षाबेन व्यास ने इस मामले पर मीडिया से बातचीत की.
उन्होंने कहा, "यह प्रस्ताव (गुजरात सरकार की ओर से आया था और स्थायी समिति ने इसे मंज़ूरी दे दी है. यह मंजूरी भूमि एवं निपटान अधिनियम के तहत एक विशेष मामले के रूप में दी गई है. राधा यादव की मांग अभी तक हमारे पास नहीं पहुंची है. हम उनकी बात भी सुनेंगे और भूमि एवं निपटान अधिनियम के तहत उस पर विचार करेंगे."
इससे पहले, गुजरात सरकार ने वडोदरा के तांदलजा इलाक़े में 978 वर्ग मीटर ज़मीन आवंटित करने को हरी झंडी दी थी. इस ज़मीन की क़ीमत 20.53 करोड़ रुपये बताई गई है.
मिली जानकारी के मुताबिक़, 978 वर्ग मीटर में से 500 वर्ग मीटर ज़मीन आवासीय इस्तेमाल के लिए यूसुफ़ पठान को मुफ़्त दी जाएगी. वहीं, बाकी 478 वर्ग मीटर ज़मीन तय क़ीमत से 45 फ़ीसदी कम दाम पर दी जाएगी. यानी पठान को इस हिस्से की क़ीमत का सिर्फ़ 55 फ़ीसदी चुकाना होगा.
गुजरात सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह फ़ैसला एक विशेष मामले के तौर पर लिया गया है और इसे भविष्य में मिसाल के रूप में नहीं माना जाएगा.
सरकार के फ़ैसले के मुताबिक़, राजस्व विभाग इस ज़मीन के मूल्य के बराबर दूसरी ज़मीन वडोदरा नगर निगम को मुआवज़े के तौर पर आवंटित करेगा. इस प्रस्ताव पर अंतिम फ़ैसला अगले शुक्रवार को होने वाली नगर निगम की स्थायी समिति और आम सभा की बैठक में मंज़ूरी मिलने के बाद लिया जाएगा.
ग़ौरतलब है कि यूसुफ़ पठान ने इस मामले को लेकर गुजरात हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे उन्होंने बाद में वापस ले लिया.
पूरा मामला क्या है?
यूसुफ़ पठान वडोदरा में अपने घर के पास 978 वर्ग मीटर का एक प्लॉट लीज़ पर लेना चाहते थे, लेकिन नगर निगम इसके लिए तैयार नहीं था. इसी वजह से विवाद शुरू हुआ. दो साल पहले वडोदरा नगर निगम (वीएमसी) ने सरकारी ज़मीन पर कथित तौर पर कब्ज़ा करने को लेकर यूसुफ़ पठान को नोटिस भी दिया था.
बीबीसी के हार्दिक से मिली जानकारी के मुताबिक़, क़ानूनी तौर पर पठान को आवंटित नहीं किए गए इस प्लॉट पर चारदीवारी और एक शेड बना दिया गया था. इस मामले को वडोदरा में बीजेपी के पूर्व पार्षद विजय पवार ने उठाया. उन्होंने 21 जून 2024 को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को इस संबंध में लिखित शिकायत दी थी.
विजय पवार की शिकायत के बाद वडोदरा नगर निगम ने यूसुफ़ पठान को नोटिस जारी कर प्लॉट से कथित अतिक्रमण हटाने को कहा. इसके ख़िलाफ़ यूसुफ़ पठान ने गुजरात हाई कोर्ट का रुख़ किया.
उस समय वडोदरा नगर निगम के उप आयुक्त सुरेश तुवीर ने आधिकारिक बयान में कहा था, "यह प्लॉट पूरी तरह नगर निगम के स्वामित्व में है. यूसुफ़ पठान ने इस प्लॉट पर चारदीवारी बनाकर अतिक्रमण किया है. हमने यह अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस दिया था, जिसके ख़िलाफ़ वह हाई कोर्ट गए हैं."
2024 के लोकसभा चुनाव में यूसुफ़ पठान ने टीएमसी के उम्मीदवार के तौर पर पश्चिम बंगाल की बहरामपुर सीट से जीत हासिल की थी. इसके कुछ ही समय बाद, जून में बीजेपी शासित वडोदरा नगर निगम ने एक प्लॉट पर कथित तौर पर कब्ज़ा करने के मामले में पठान को नोटिस जारी किया था.
जून 2026 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत हुई. इसके कुछ ही समय बाद टीएमसी के 20 सांसदों ने पार्टी छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया (एनसीपीआई) का दामन थाम लिया. इनमें यूसुफ़ पठान भी शामिल थे.
अब टीएमसी से अलग होने के दो महीने बाद राज्य सरकार यूसुफ़ पठान को 500 वर्ग मीटर का प्लॉट मुफ़्त देने और बाकी 478 वर्ग मीटर ज़मीन रियायती दर पर उपलब्ध कराने के लिए सहमत हो गई है.
यूसुफ़ पठान को प्लॉट आवंटित करने का प्रस्ताव जल्द ही वडोदरा नगर निगम की स्थायी समिति के सामने रखा जाएगा. इसके बाद इस पर फ़ैसला लिया जाएगा.
यह प्लॉट टाउन प्लानिंग स्कीम नंबर 22 के फ़ाइनल प्लॉट नंबर 90 में स्थित है. इस साल वडोदरा नगर निगम (वीएमसी) ने इस प्लॉट की सार्वजनिक नीलामी की तैयारी शुरू की थी. इसके लिए प्रति वर्ग मीटर 2.10 लाख रुपये की क़ीमत तय की गई थी. इस हिसाब से प्लॉट की अनुमानित क़ीमत 20.5 करोड़ रुपये बैठती है.
यूसुफ़ पठान ने 2012 में वीएमसी के सामने प्रस्ताव रखा था कि उन्हें यह ख़ाली प्लॉट बिना सार्वजनिक नीलामी के 99 साल की लीज़ पर दिया जाए. उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा था कि वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर हैं और उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनके बंगले के पास आवासीय इस्तेमाल के लिए ज़मीन आवंटित की जानी चाहिए.
उस समय वीएमसी की स्थायी समिति और आम सभा प्लॉट आवंटित करने के लिए तैयार थीं. ज़मीन की क़ीमत क़रीब 5.6 करोड़ रुपये आंकी गई थी और पठान यह रकम देने को तैयार थे. लेकिन तब शहरी विकास विभाग सार्वजनिक नीलामी के बिना सीधे प्लॉट आवंटित करने के पक्ष में नहीं था.
इसके बाद जून 2024 के लोकसभा चुनाव में यूसुफ़ पठान टीएमसी में शामिल हुए और बहरामपुर सीट पर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को हराया. चौधरी इस सीट से पांच बार सांसद चुने जा चुके थे.
स्टैंडिंग कमेटी लेगी फ़ैसला
वडोदरा नगर निगम की स्थायी समिति की अध्यक्ष वर्षाबेन व्यास ने बीबीसी से कहा, "शुक्रवार को स्थायी समिति की बैठक होगी, जिसमें इस संबंध में प्रस्ताव रखा जाएगा. सर्वसम्मति से लिया गया फ़ैसला अंतिम माना जाएगा."
वडोदरा में बीजेपी के पूर्व पार्षद विजय पवार ने इस पूरे मामले को उजागर किया था. उन्होंने बीबीसी से कहा, "2012 में इस प्लॉट को लेकर प्रस्ताव लाया गया था और आम सभा में इसे मंज़ूरी भी मिल गई थी. इसके बाद राज्य सरकार से मंज़ूरी मांगी गई. 2014 में राज्य सरकार ने जवाब दिया कि नीलामी के बिना यह प्लॉट नहीं दिया जा सकता. इसी वजह से हमने इस मामले को उजागर किया था."
उन्होंने कहा, "अब अगर राज्य सरकार यूसुफ़ पठान को प्लॉट देने के लिए तैयार है, तो कुछ नहीं किया जा सकता. सरकार सर्वोपरि है. इसलिए अब इस मामले का विरोध करने की ज़रूरत नहीं है."
इस मामले पर यूसुफ़ पठान का पक्ष जानने के लिए बार-बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी. वडोदरा नगर निगम के आयुक्त अरुण महेश बाबू से भी संपर्क नहीं हो पाया.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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