जस्टिस वर्मा के ख़िलाफ़ आरोप साबित, कैश बरामदगी की जांच करने वाली लोकसभा समिति की रिपोर्ट

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लोकसभा अध्यक्ष की ओर से जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास के परिसर में कैश मिलने के आरोपों की जांच के लिए गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश कर दी है.

रिपोर्ट में समिति ने ये निष्कर्ष निकाला है कि जस्टिस वर्मा के ख़िलाफ़ बिना हिसाब वाली नकदी, सबूतों से छेड़छाड़ और संतोषजनक जवाब नहीं देने के आरोप 'साबित' होते हैं.

'जजेज़ (इंक्वायरी) एक्ट' के तहत गठित तीन सदस्यीय समिति ने कहा कि जस्टिस वर्मा अपने सरकारी आवास के स्टोर रूम में मिली नकदी की मौजूदगी, उसके स्रोत या मालिकाना हक को लेकर संतोषजनक जवाब देने में नाकाम रहे.

समिति ने यह भी कहा कि महत्वपूर्ण सबूतों को सुरक्षित नहीं रखा गया. साथ ही कानूनी तरीके से सील करने और निरीक्षण से पहले स्टोर रूम में मौजूद सबूतों की स्थिति को बदल दिया गया.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, यह रिपोर्ट दो खंडों में तैयार की गई है, जिसमें जांच के दौरान दर्ज मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य शामिल हैं.

तीन सदस्यीय जांच समिति ने मई में अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंप दी थी.

समिति की रिपोर्ट में क्या कहा गया है?

लाइव लॉ के मुताबिक समिति ने कहा कि पहला आरोप नई दिल्ली के 30, तुगलक क्रिसेंट स्थित जज के आधिकारिक आवास के स्टोर रूम में बिना हिसाब वाली करेंसी की बरामदगी और कब्जे से जुड़ा था.

समिति ने पाया कि 14-15 मार्च, 2025 को लगी आग के बाद स्टोर रूम में 500 रुपये के नोट बड़ी मात्रा में मौजूद थे.

लाइव लॉ के मुताबिक गवाहों ने इन्हें जले, आधे जले, गीले और बिखरे हुए नोटों के बंडल, ढेर और गड्डियों के रूप में बताया.

दिल्ली फायर सर्विस और पुलिस के कई कर्मचारियों ने नोटों को देखने की गवाही दी. तस्वीरों और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री से भी उनके बयानों की पुष्टि हुई.

समिति ने कहा कि स्टोर रूम में कुल कितनी नकदी मिली ये तय करना मुमकिन नहीं है क्योंकि नोटों को सुरक्षित नहीं रखा गया.

समिति ने रिपोर्ट में कहा कि सरकारी आवास पर बड़ी मात्रा में नकदी मिलना यह साबित स्थापित करता है कि जज का उस परिसर पर पूरा नियंत्रण था.

लाइव लॉ के मुताबिक समिति ने कहा, "जो बात स्थापित हुई है, वह यह है कि जज के कब्जे वाले सरकारी परिसर में बड़ी मात्रा में ऐसी नकदी मिली जिसका कोई संतोषजनक हिसाब नहीं दिया गया था. स्टोर रूम उस परिसर का हिस्सा था और जज उसकी मौजूदगी, स्रोत या मालिकाना हक को लेकर संतोषजनक जवाब देने में नाकाम रहे."

क्या है मामला

14 मार्च को दिल्ली हाई कोर्ट जज जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास के एक स्टोर रूम में आग लगी थी, जहाँ पर कथित तौर पर उनके घर से बड़ी मात्रा में कैश मिला था.

इसके बाद 22 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के मौजूदा चीफ़ जस्टिस डीके उपाध्याय की रिपोर्ट और जस्टिस यशवंत वर्मा के बचाव संबंधी एक रिपोर्ट जारी की.

इस रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस द्वारा दी गई कुछ फ़ोटो और वीडियो भी शामिल हैं जिसमें जले हुए नोट नज़र आ रहे हैं. हालांकि, रिपोर्ट के कुछ हिस्सों को 'रिडेक्ट' किया गया था, यानी काले रंग से छिपाया गया था.

जस्टिस वर्मा पर आरोप लगे कि नई दिल्ली स्थित उनके आधिकारिक निवास से भारी मात्रा में नकदी मिली थी.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन चीफ़ जस्टिस संजीव खन्ना ने दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस डीके उपाध्याय को एक प्रारंभिक पूछताछ करने को कहा था.

जस्टिस डीके उपाध्याय ने अपनी चिट्टी में चीफ़ जस्टिस संजीव खन्ना को कहा है कि इस मामले में एक 'गहरी जांच' की ज़रूरत है.

वहीं, जस्टिस यशवंत वर्मा ने दावा किया है कि स्टोर रूम में उन्होंने या उनके परिवार वालों ने कभी कैश नहीं रखा, और उनके ख़िलाफ़ साज़िश रची जा रही है.

तत्कालीन सीजेआई जस्टिस संजीव खन्ना ने मामले की जांच के लिए तीन जजों की कमिटी बनाई. साथ ही यह फ़ैसला लिया है कि जस्टिस यशवंत वर्मा को कुछ समय तक कोई न्यायिक ज़िम्मेदारी न सौंपी जाए.

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने प्रस्ताव दिया कि जस्टिस वर्मा को दिल्ली से हटाकर वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट भेज दिया जाए. हालांकि, इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने फैसले पर आपत्ति जताई थी.

जिस इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने जस्टिस वर्मा का विरोध किया, कभी वह इस एसोसिएशन का हिस्सा थे.

6 जनवरी 1969 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में जन्मे जस्टिस यशवंत वर्मा तीस साल से भी ज़्यादा लंबे समय से क़ानूनी पेशे से जुड़े रहे हैं.

करीब 200 सांसदों ने संसद के माध्यम से उन्हें पद से हटाने की मांग की थी. इसके बाद जस्टिस वर्मा ने इस्तीफ़ा दे दिया.

दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस ने क्या बताया

अपनी रिपोर्ट में दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस डीके उपाध्याय ने कहा कि 15 मार्च को उन्हें दिल्ली पुलिस के कमिश्नर का फ़ोन आया जिसमें उन्होंने जस्टिस यशवंत वर्मा के घर में लगी आग के बारे में बताया. कमिश्नर ने उन्हें क्या बताया ये हिस्सा छिपाया गया है.

इस घटना के बारे में जस्टिस डीके उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस संजीव खन्ना को 15 मार्च को बताया.

जस्टिस डीके उपाध्याय ने ये भी कहा कि जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पर तैनात सिक्योरिटी गार्ड के मुताबिक़ 15 मार्च की सुबह कुछ जली हुई चीज़ों को स्टोर रूम से हटाया गया.

इसके बाद उन्होंने अपने सेक्रेटरी को जस्टिस यशवंत वर्मा के घर की जांच करने के लिए भेजा.

जस्टिस डीके उपाध्याय ने अपनी रिपोर्ट में पुलिस कमिश्नर द्वारा भेजी गईं कुछ रिपोर्टों को भी शामिल किया है जिसमें ये कहा गया है कि स्टोर रूम में 4-5 अधजली बोरियों में कैश मिला है.

जस्टिस डीके उपाध्याय ने लिखा है कि उनकी जाँच के मुताबिक़, स्टोर रूम में केवल घर में रहने वाले लोगों, नौकरों और मालियों का आना जाना था इसलिए इस मामले में और जांच की ज़रूरत है.

पुलिस कमिश्नर ने जस्टिस डीके उपाध्याय के साथ कुछ फ़ोटो और एक वीडियो भी शेयर किए हैं. इनमें एक कमरे में जले नोट दिखाई देते हैं.

जस्टिस डीके उपाध्याय का कहना था कि उन्होंने ये फ़ोटो और वीडियो सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस संजीव खन्ना को भी भेजीं और इन्हें जस्टिस यशवंत वर्मा को भी दिखाया.

जस्टिस वर्मा ने अपने बचाव में क्या कहा था?

सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस संजीव खन्ना और दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस डीके उपाध्याय ने यशवंत वर्मा से 3 सवाल पूछे थे- स्टोर रूम में पैसे कैसे आए थे, उस धन का स्रोत क्या था, और किस प्रक्रिया से इन पैसों को 15 मार्च की सुबह हटाया गया?

अपने बचाव में जस्टिस यशवंत वर्मा ने कहा कि 'जब आग लगी तब वे मध्य प्रदेश में थे, और वे वापस दिल्ली 15 मार्च की शाम को पहुँचे. आग लगने के समय उनकी बेटी और स्टाफ़ घर पर मौजूद थे. लेकिन आग बुझाने के बाद उन्होंने स्टोर रूम में कैश को नहीं देखा.'

यशवंत वर्मा के मुताबिक़ उन्हें पहली बार जले हुए कैश के बारे में तब पता चला जब दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस ने उन्हें वीडियो दिखाया था.

उन्होंने कहा कि उन्होंने या उनके परिवार वालों ने आजतक उस स्टोर रूम में कैश नहीं रखा और जिस कैश का ज़िक्र किया जा रहा है वो उनका नहीं है.

उन्होंने अपने जवाब में लिखा, "ये कहना कि कोई एक ऐसे कमरे में कैश रखेगा जो खुले में है और जहाँ कोई भी घुस सकता है, ये बिल्कुल अविश्वनीय है." उन्होंने कहा कि वो कैश केवल बैंक से निकालते हैं, और उनके पास सारे लेनदेन के काग़ज़ात हैं."

यशवंत वर्मा के मुताबिक़, उनका स्टोर रूम उनके रहने वाली जगह से बिल्कुल अलग है, और उनके घर और स्टोर रूम के बीच एक दीवार भी है.

उन्होंने कहा कि उन्हें ये कथित कैश दिखाया या सौंपा नहीं गया. उन्होंने अपने स्टाफ़ से भी पूछताछ की और उन्होंने भी कहा कि स्टोर रूम से कोई कैश हटाया नहीं गया.

उनका कहना था कि ये पूरा मामला उनके ख़िलाफ़ एक साज़िश है, "इस पूरे हादसे ने मेरी प्रतिष्ठा को बर्बाद कर दिया है, जो मैंने एक दशक से ज़्यादा हाई कोर्ट का जज रहकर बनाई थी."

साथ ही यह भी कहा कि आज तक उन पर कोई भी आरोप नहीं लगे हैं, और अगर जस्टिस डीके उपाध्याय चाहें तो उनके न्यायिक कार्यकाल की जांच कर सकते हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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