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वागनर ग्रुप की बग़ावत से रूसी राष्ट्रपति की छवि को कितना नुक़सान, आगे क्या करेंगे पुतिन
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कब-कब क्या-क्या हुआ?
- शुक्रवार को येवगेनी प्रिगोज़िन ने कहा अपने 25,000 लड़ाकों को लेकर वो राजधानी मॉस्को की तरफ मार्च करेंगे.
- जनरल सर्गेई सुरोविकिन ने उन्हें कदम पीछे हटाने और पुतिन की सत्ता स्वीकार करने के लिए कहा.
- शुक्रवार रात प्रिगोज़िन रूसी शहर रोस्तोव-ऑन-डॉन तक आए और यहां के सैन्य मुख्यालय पर कब्ज़े का दावा किया.
- रूस की एफ़एसबी ने उनके ख़िलाफ़ आपराधिक मामला दर्ज किया. मॉस्को में हाई अलर्ट घोषित किया गया.
- शनिवार सवरे पुतिन ने देश को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि देश के साथ गद्दारी हुई है.
- इसके तुरंत बाद प्रोगोज़िन बोले- मैंने विद्रोह नहीं किया, मैं उन जोकरों का विरोध कर रहा हूं जो यूक्रेन में युद्ध की कमान संभाल रहे हैं.
- अपने लड़ाकों के साथ प्रिगोज़िन मॉस्को की तरफ तेज़ी से बढ़ने लगे.
- शनिवार शाम को पुतिन के मित्र और बेलारूस के राष्ट्रपति लूकाशेंको के साथ प्रिगोज़िन का समझौता हुआ.
- क्रेमलिन ने कहा कि प्रोगोज़िन बेलारूस जाएंगे और उनके ख़िलाफ़ दर्ज आपराधिक मामलों को हटा लिया जाएगा.
- रविवार को प्रिगोज़िन एक कार में रोस्तोव शहर से बाहर जाते नज़र आए.
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बीते 24 घंटों में रूस में घटनाक्रम काफी तेज़ी से बदला है.
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बेहद क़रीबी माने जाने वाले वागनर ग्रुप के प्रमुख येवगेनी प्रिगोज़िन ने कदम पीछे खींच लिए हैं.
पहले उन्होंने रूसी शहर रोस्तोव-ऑन-डॉन पर कब्ज़ा करने का दावा किया था.
बग़ावती तेवर लिए प्रिगोज़िन ने इससे पहले कहा था कि वो अपनी प्राइवेट आर्मी के लड़ाकों के साथ मॉस्को की तरफ मार्च करेंगे.
उनका कहना था कि वो देश के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु और रूसी सेना के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ वालेरी गेरासिमोव से रूबरू मुलाक़ात करना चाहते हैं.
प्रिगोज़िन की इस चेतावनी के बाद मॉस्को में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई थी. कई अन्य शहरों में आम नागरिकों की आवाजाही को लेकर भी पाबंदियां लगाई गई थी.
लेकिन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भरोसेमंद मित्र बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्ज़ेंडर लूकाशेंको के हस्तक्षेप के बाद अब प्रिगोज़िन ने मॉस्कों की तरफ मार्च करने का अपना इरादा बदल दिया है. अपनी प्राइवेट आर्मी के लड़ाकों को लेकर अब वो बेलारूस की तरफ जा रहे हैं.
विद्रोह से पुतिन की छवि को नुक़सान?
बीबीसी रूसी सेवा की संवाददाता ओल्गा इवशिना मानती हैं कि प्रोगोज़िन के विद्रोह ने रूसी राष्ट्रपति छवि को नुक़सान पहुंचाया है.
वो कहती हैं कि पुतिन और रूस का मीडिया सालों से देश के भीतर एकता और स्थिरता की एक छवि बनाने की कोशिश करते रहे हैं, जिसे इस विद्रोह ने एक तरह से चुनौती दे दी है.
रोस्तोव-ऑन-डॉन पर नियंत्रण के प्रोगोज़िन के दावे के बाद कई राजनेताओं में डर फैल गया. फ्लाइट रडार सेवाओं के अनुसार इस दौरान कई निजी जेट विमानों को मॉस्को से बाहर जाते देखा गया है.
एक के बाद एक प्रांतीय गवर्नर मीडया के सामने आए और उन्होंने रूसी राष्ट्रपति के प्रति अपनी वफादारी की बात दोहराई.
ओल्गा कहती हैं, "इससे पहले 1991 में रूस में एक और सशस्त्र सैन्य विद्रोह की कोशिश हुई थी. उस वक्त प्रांतीय गवर्नरों ने विद्रोहियों का साथ दिया था. शुक्रवार और शनिवार को रूस में जो कुछ हुआ उसमें ऐसा कुछ नहीं दिखाई दिया. हालांकि ये ज़रूर कहा जा सकता है कि इस विद्रोह ने रूसी राष्ट्रपति की छवि में दाग़ ज़रूर लगा दिया है."
बेलारूस की पत्रकार और शोधकर्ता हान्ना ल्यूबाकोवा कहती हैं कि प्रोगाज़िन और लूकाशेंको के बीच हुई ये डील बताती है, "लूकाशेंको पुतिन के हाथों की कठपुतली हैं."
वो कहती हैं कि लूकाशेंको के हाथों में "इतनी ताकत नहीं है कि वो प्रिगोज़िन को फिर से इस तरह का कदम उठाने से रोक सकें."
वो कहती हैं, "आपको ये नहीं भूलना चाहिए कि केवल एक दिन में प्रिगोज़िन लगभग मॉस्को की सरहद तक पहुंच गए थे. मुझे नहीं लगता कि इस तरह का बेहद महत्वाकांक्षी व्यक्ति जो इस तरह का बड़ा जोखिम लेने की काबिलियत रखता है लूकाशेंको की बात सुनेगा."
वो कहती हैं, "प्रिगोज़िन के विद्रोह का बेलारूस के भीतर भी कुछ हद तक असर होगा क्योंकि उनके विद्रोह की ये घटना पुतिन की कमज़ोरियों को सामने ले आई है."
रूसी राष्ट्रपति के आलोचक रहे एलेक्ज़ेंडर लित्विनेन्को की पत्नी मारिया ने बीबीसी संवाददाता लॉरा कॉन्सेनबर्ग को बताया कि इस पूरे घटनाक्रम ने पुतिन की कमज़ोरी दुनिया को दिखा दी है.
वो कहती हैं, "एक बर्बर नेता वाली पुतिन की छवि केवल लोगों के दिनों में ख़ौफ पैदा करने के लिए है."
मारिया के पति एलेक्ज़ेंडर लित्विनेन्को की हत्या साल 2006 में हो गई थी.
मारिया कहती हैं, "ये विद्रोह पुतिन की सत्ता के बारे में एक ख़ास संदेश देता है. पुतिन ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो किसी भी चीज़ पर नियंत्रण रख पाते हैं."
बीबीसी संवाददाता स्टीव रोज़नबर्ग कहते हैं कि प्रिगोज़िन की बगावत के बाद जब पुतिन ने शनिवार को टेलीविज़न पर लोगों को संबोधित किया तो कड़े शब्दों का इस्तेमाल ज़रूर किया लेकिन वो मज़बूत नहीं दिखे.
वो कहते हैं, "अपने संदेश में सबसे पहले कहा, "देश की पीठ पर छुरा भोंका गया है". उन्होंने प्रिगोज़न को गद्दार कहा. लेकिन शाम होते-होते लूकाशेंको के शांति प्रस्ताव पर प्रिगोज़िन सहमत हो गए और रूस ने उनके ख़िलाफ़ लगाए सारे आरोप हटा लिए."
वो कहते हैं, "वागनर और क्रेमलिन के बीच क्या समझौता हुआ है उसके बारे में अभी विस्तृत जानकारी नहीं है, इसलिए इसके बारे में कुछ कहना मुश्किल है."
वो कहते हैं कि हो सकता है कि आने वाले दिनों में इस बारे में और जानकारी सामने आएगी लेकिन ये कहा जा सकता है कि पुतिन इस घटनाक्रम के बाद अधिक ताकतवर नहीं दिख रहे.
आगे पुतिन क्या करेंगे?
पोलैंड के सासंद राडोस्लॉ सिकोर्स्की कहते हैं कि इस विद्रोह ने जहां एक तरफ पुतिन की कमज़ोरी दिखाई है वहीं उन्हें और ताक़तवर भी बना दिया है.
वो कहते है, "आप सोचिए कि हथियारबंद लड़ाकों का पूरा दस्ता रूस के भीतर सैंकड़ों किलोमीटर आगे तक चला आया लेकिन कहीं किसी ने उन्हें न तो रोकने की कोशिश की और न ही उन्हें किस ने चुनौती दी. ये पुतिन की कमज़ोरी दिखाता है."
"लेकिन फिर आगे पुतिन शायद उन लोगों को नहीं बख्शेंगे जिन्होंने वागनर को समर्थन दिया और उनका विरोध नहीं किया. वो अब आगे क्या करेंगे ये आने वाला वक्त बताएगा लेकिन उनकी सत्ता अब और निरंकुश और बर्बर हो जाएगी."
बीबीसी संवाददाता ओल्गा इवशिना कहती हैं कि पुतिन ताक़त के इस्तेमाल में यकीन रखते हैं और हो सकता है कि हमेशा की तरह वो अब अधिक ताक़त का इस्तेमाल करें.
वो कहती हैं कि पुतिन देश के भीतर अभिव्यक्ति की आज़ादी पर लगाम लगा सकते हैं, जाने-माने टेलीग्राम चैनलों समेत मीडिया पर अधिक पाबंदी लगा सकते हैं. ये भी हो सकता है कि वो यूक्रेन पर हमले बढ़ा दें.
वो कहती हैं, "एक बात तो स्पष्ट है, अगर अगले सप्ताह यूक्रेन को कहीं पर युद्ध में कुछ बढ़त मिल जाती है तो रूस इसके लिए सीधे तौर पर वागनर और उसकी बग़ावत को ज़िम्मेदार ठहराएगा."
हालांकि बीबीसी की पूर्वी यूरोप संवाददाता सारा रीन्सफ़ोर्ड कहती हैं कि मामला इतना सीधा नहीं लगता.
वो कहती हैं, "पहले गद्दारी करने का आरोप लगाना और फिर आपराधिक मामले हटाकर अपने कदम पीछे हटा लेना, ये पुतिन की शख्सियत का हिस्सा नहीं लगता."
वो कहती हैं कि इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े कई सारे सवाल अभी बाकी हैं, जिनका अब तक कोई जवाब नहीं मिल सका है.
वो कहती हैं, "प्रिगोज़िन ऐसे व्यक्ति तो हैं नहीं जो यहां से जाकर ट्रैक्टर चलाने या आलू की खेती करें. रही पुतिन की बात करें तो वो अब और निरंकुश हो जाएंगे और विद्रोह से जुड़े लोगों का दमन करेंगे."
बेलारूस के साथ डील और प्रिगोज़िन का यू-टर्न
लूकाशेंको से बातचीत के बाद रोस्तोव-ऑन-डॉन से मॉस्को की तरफ आने वाले वागनर ने मॉस्को से 200 किलोमीटर पहले ही अपना मार्च रोक दिया.
ये लड़ाके रोस्तोव से आगे वोरोनेज़ पहुंच चुके थे जहां उन्होंने वहां के सैन्य मुख्यालय पर कब्ज़ा करने का दावा किया. लेकिन रविवार को प्रिगोज़िन एक कार में रोस्तोव शहर से बाहर जाते नज़र आए.
रोस्तोव से मॉस्को की तरफ निकलें तो वोरोनेज़ ठीक आधे रास्ते में पड़ता है.
लेकिन सवाल ये है कि वागनर और प्रिगोज़िन को इससे क्या हासिल हुआ?
शनिवार शाम को पुतिन के मित्र और बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्ज़ंडर लूकाशेंको के साथ प्रिगोज़िन का समझौता हो गया,.
क्रेमलिन ने कहा कि प्रिगोज़िन बेलारूस जाएंगे और इसके बदले उनके ख़िलाफ़ दर्ज आपराधिक मामलों को हटा लिया जाएगा. वहीं उनके लड़ाकों को भी क्षमादान दिया जाएगा.
बीबीसी मॉनिटरिंग के विटाली शेवचेन्को कहते हैं कि प्रिगोज़िन के बेलारूस जाने की ख़बर बस एक सूत्र के हवाले से है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इसके बारे में जानकारी दी थी.
लेकिन इस मामले में अब तक प्रिगोज़िन ने कोई टिप्पणी नहीं की है. उन्होंने अब तक केवल मार्च बंद करने की ही बात की है.
शेवचेन्को कहते हैं "प्रिगोज़िन के लिए ये नुक़सान का सौदा है. अगर क्रेमलिन की बात सही है तो उन्हें निर्वासन में बेलारूस भेजा गया है. रही बात वागनर ग्रुप की तो क्रेमलिन चाहता है कि उसके लड़ाके सेना के साथ अनुबंध करें और सेना का हिस्सा बन जाएं. यानी ये एक तरह के वागनर का अंत है."
क्या कह रहे हैं रूसी नागरिक?
प्रिगोज़िन की बग़ावत के बाद पुतिन के राष्ट्र को संबोधित करने के बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने स्थिति को गंभीरता से लिया और उन्हें लगा कि उन्हें खुद जनता के सामने आने की ज़रूरत है.
रूस की एक जानीमानी विश्लेषक तातियाना स्टैनोवाया ने टेलीग्राम पर लिखा, "रूस के संभ्रांत वर्ग के कई लोग निजी तौर पर इसके लिए पुतिन को ज़िम्मेदार ठहराएंगे कि मामला इस हद तक बढ़ गया और सरकार की तरफ से सही समय पर कोई उचित प्रतिक्रिया नहीं आई."
उन्होंने लिखा "इसलिए, यह पूरा घटनाक्रम केवल पुतिन के लिए नहीं बल्कि पुतिन के आला अधिकारियों के लिए भी एक का झटका है."
इस पूरे मामले पर रूसी नागरिकों की प्रतिक्रिया के बारे में कोई भी निष्कर्ष निकालना मुश्किल है. हालांकि मीडिया में वागनर लड़ाकों और टैंकों के साथ आई रूसी नागरिकों की तस्वीरों ने नेताओं को चिंता में जरूर डाल दिया होगा.
वागनर के लड़ाकों ने रोस्तोव शहर पर कब्ज़ा करने का दावा किया था. लेकिन जब वो शहर से बाहर जाने लगे तो कई लोगों ने उनका अभिवादन किया, लोगों ने उनके लिए तालियां बजाई और उनके साथ तस्वीरें लीं.
हालांकि ये भी महत्वपूर्ण है कि वागनर के लड़ाकों के शहर में आने के बाद कुछ लोग शनिवार को शहर छोड़ते हुए भी नज़र आए थे.
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