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अमेरिका पर तंज़ और जापान की तारीफ़, जयशंकर के इस रवैये की वजह क्या है?
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को भारत और अमेरिका के रक्षा सौदों पर चौंकाने वाली जानकारियां साझा कीं. आमतौर पर ऐसी जानकारियां सार्वजनिक तौर पर साझा नहीं की जातीं.
लेकिन भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि भारत तो हमेशा मिलिट्री सौदे के लिए तैयार रहा है लेकिन अमेरिका ने ही इसे सप्लाई देने में हिचकिचाहट दिखाई है.
अमेरिका की इस ‘हिचिकिचाहट’ का ज़िक्र करते हुए जयशंकर ने जापान के तारीफ के पुल बांधे और कहा कि इसने तो भारत में क्रांति कर दी है.
अमेरिका और जापान दोनों रणनीतिक सुरक्षा संगठन 'क्वॉड' में भारत के सहयोगी हैं.
गुरुवार को जापान-इंडिया फोरम में जयशंकर ने जापानी विदेश मंत्री योशिमासा हयाशी के सामने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान दो अहम समझौते हुए हैं.
एक जीई एयरोस्पेस और हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स के बीच जीई 14 इंजन की मैन्युफैक्चरिंग का करार और दूसरा ऊंचाई वाले यूएवी की खरीद और उनकी असेंबलिंग का सौदा.
उन्होंने कहा, "अमेरिका से हथियार और दूसरे रक्षा साजो-सामान के सौदे को लेकर भारत को कोई दिक्कत नहीं रही है. ये अमेरिका ही है जो पिछले कई साल से हमें ऐसी सप्लाई देने में हिचकिचाता रहा है. भारत तो अपनी सेना के लिए ऐसी सप्लाई के हर विकल्प के लिए तैयार रहा है.’’
जयशंकर ने कहा कि अमेरिका से परमाणु करार होने के बाद ये हिचक कम हुई. भारत और अमेरिका के बीच साल 2008 में मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार के समय परमाणु करार हुआ था.
जापान की तारीफ़
भारत के विदेश मंत्री ने जापानी विदेश विदेश मंत्री योशिमासा हयाशी की मौजूदगी में उनके देश की खूब तारीफ की.
उन्होंने कहा कि जापान ने भारत को कई सेक्टरों में मदद की है. ताज़ा मिसाइल सेमीकंडक्टर सेक्टर है.
एस जयशंकर ने कहा, "मेरा ख्याल है कि जापान ने इस देश में एक के बाद एक कई क्रांति की हैं. मारुति क्रांति का मतलब सिर्फ सुजुकी का यहां आना नहीं था. इसके साथ एक पूरी जीवनशैली भारत आ रही थी. एक सोच भारत आ रही थी. यानी बदलाव लाने वाली एक औद्योगिक संस्कृति आ रही थी."
"भारत में जापान की दूसरी क्रांति थी मेट्रो रेल. मेरा मानना है कि भारत के शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर में इसका काफी बड़ा असर रहा है.’’
उन्होंने कहा, "तीसरी क्रांति हाईस्पीड ट्रेन है. भारत में बुलेट ट्रेन परियोजना पूरी होने पर लोग हाई स्पीड ट्रेन का असर देख सकेंगे. इसका बड़ा असर होगा.’’
"चौथी क्रांति इमर्जिंग, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में होगी.’’
भारत और जापान के बीच सहयोग
उन्होंने कहा, "दुनिया के सामने कई अहम चुनौतियां हैं जैसे परमाणु मिसाइल प्रसार और आतंकवाद. ये महत्वपूर्ण है कि हम इसकी तह तक जाएं और जो देश जिम्मेदार हैं, उन्हें जवाबदेह ठहराएं.’’
"भारत और जापान एक साथ हैं. जापानी विदेश मंत्री ने भी कहा कि एक जैसी सोच रखने वाले देशों जैसे भारत और जापान के लिए आतंकवाद से लड़ाई पहली प्राथमिकता है.’’
गुरुवार को नई दिल्ली में भारत-जापान फोरम के उद्घाटन सत्र में जापानी विदेश मंत्री योशिमासा हयाशी ने कहा कि जी 20 अध्यक्षता को सफल बनाने के लिए जापान, भारत के साथ मिलकर काम करने को बहुत उत्सुक हैं.
भारत और जापान ने गुरुवार को मिलिट्री साजो-सामान और टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के तरीकों के अलावा सेमीकंडक्टर सेक्टर में मिलकर काम करने की संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया.
एस जयशंकर और जापानी विदेश मंत्री हयाशी ने मुक्त स्वतंत्र एवं समृद्ध हिंद-प्रशांत सुनिश्चित करने में भारत और जापान के बीच मज़बूत और स्थायी साझेदारी को बढ़ाने पर सहमति जताई.
जापान भारत में बड़ा निवेशक है. जून 2022 तक भारत में 1439 जापानी कंपनियां काम कर रही थीं. इनमें से आधी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां हैं.
साल 2000 से लेकर 2022 तक जापान ने भारत में 37.8 अरब डॉलर का निवेश किया. जापान भारत में पांचवां सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेशक है.
विदेश मंत्री ने क्यों जारी किया वीडियो
इस बीच, एस. जयशंकर ने संसद में विदेश नीति पर अपने बयान के दौरान विपक्ष पर निशाना साधा.
मणिपुर मामले में संसद में चल रहे गतिरोध के दौरान विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया.
इस वीडियो में उन्होंने उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेशी यात्राओं के ब्योरे शेयर किए.
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के हालिया घटनाक्रमों के बारे में जानकारी दी और पीएम नरेंद्र मोदी की अमेरिका, पापुआ न्यू गिनी और मिस्र की यात्राओं के महत्व पर फोकस किया है
जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 20-23 जून तक संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक यात्रा किसी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा की गई केवल दूसरी यात्रा थी.
उन्हें दूसरी बार अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करने का दुर्लभ विशेषाधिकार दिया गया.
एस जयशंकर ने ट्विटर पर एक वीडियो बयान में कहा, "दुख की बात है कि विपक्ष ने संसद के दोनों सदनों में मेरे बयान को बार-बार बाधित किया. जाहिर है उनके लिए पार्टी हित है उनके लिए दलगत राजनीति राष्ट्रीय प्रगति से अधिक महत्वपूर्ण थी.’’
उन्होंने कहा कि विपक्ष ने राज्यसभा में उनके बयान के दौरान हंगामा किया.
जयशंकर ने कहा, ''मैंने गुरुवार को संसद और देशवासियों को विदेश नीति से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण घटनाक्रमों से अवगत कराना चाहा. लेकिन विपक्ष ने मेरे बयान के दौरान हंगामा किया.''
उन्होंने कहा, '' विपक्ष के लिए पक्षपातपूर्ण राजनीति राष्ट्रीय प्रगति से अधिक महत्वपूर्ण थी.''
दरअसल गुरुवार को भी मणिपुर हिंसा मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बयान देने की मांग को लेकर संसद में काफी हंगामा हुआ. विपक्ष लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में हंगामा किया.
जयशंकर का आक्रामक रवैया
विदेश मंत्री पिछले कुछ समय से अपने बयानों से काफी सुर्खियां बटोरते रहे हैं. खासकर पश्चिमी देशों को लेकर उन्होंने ऐसे कई बयान दिए हैं, जिन्हें साहसिक कहा जा सकता है.
एस जयशंकर, एक ऐसे व्यक्ति के रूप में उभरे हैं, जो विकासशील देशों की सोच को बिना किसी संकोच के सधे हुए लफ़्ज़ों में व्यक्त कर रहे हैं.
विदेश मंत्री जयशंकर की भारत में बढ़ती लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजह यही है कि लोग देख रहे हैं कि वो अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसी दुनिया की बड़ी ताक़तों के सामने खड़े हैं.
जयशंकर के बयान निडर, तीखे और कुछ लोगों की नज़र में तो चिढ़ाने वाले रहे हैं
हाल के वर्षों में लोकतंत्र की रेटिंग करने वाली पश्चिमी देशों की बड़ी संस्थाएं, भारत के लोकतंत्र में गिरावट और अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे बर्ताव को लेकर चिंता जताती रही हैं. इन चिंताओं को लेकर जयशंकर का रुख़ बेहद आक्रामक रहा है.
पश्चिमी देशों के रवैये को लेकर वो कहते हैं, "ये तो ढोंग है. दुनिया में कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्होंने ख़ुद को ऐसे सर्टिफिकेट जारी करने का ठेकेदार बना रखा है. वो इस बात को पचा नहीं पा रहे हैं कि भारत अब उनकी रज़ामंदी का तलबगार नहीं है."
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