केरल में अभिनेत्री के अपहरण और गैंगरेप मामले में छह लोगों को 20 साल की सज़ा

पुलिसकर्मी एनएस सुनील को अदालत से जेल जाते हुए

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इमेज कैप्शन, पुलिसकर्मी एनएस सुनील को अदालत से जेल जाते हुए
    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, बेंगलुरु से
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

केरल के एक सेशन कोर्ट ने एक एक्टर के अपहरण और सामूहिक बलात्कार के मामले में छह दोषियों को 20 साल की जेल की सज़ा सुनाई है. सभी दोषियों पर 50 हज़ार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.

एर्नाकुलम सत्र न्यायालय की न्यायाधीश हनी वर्गीज़ ने अभियोजन पक्ष की उस याचिका को नज़रअंदाज़ किया जिसमें सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा देने की मांग की गई थी.

भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत सामूहिक बलात्कार और आपराधिक साजिश के लिए अधिकतम सज़ा उम्र क़ैद है.

एनएस सुनील उर्फ़ पल्सर सुनी, मार्टिन एंटनी, मणिकंदन बी, विजयेश वीपी, वदिवाल सलीम और प्रदीप को 17 फ़रवरी 2018 की शाम, त्रिशूर से कोच्चि जाते समय अभिनेत्री के साथ यौन हिंसा की साजिश रचने के अभियोग में दोषी ठहराया गया है.

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इसके अलावा मलयालम एक्टर दिलीप पर हमले की साजिश का मास्टरमाइंड होने का अभियोग था, लेकिन उनको अदालत ने आठ दिसंबर को बरी कर दिया था.

अदालत ने आदेश दिया कि जुर्माना अदा करने में विफल रहने पर दोषियों को एक साल अतिरिक्त जेल में बिताना होगा.

फ़ैसले को चुनौती देगी राज्य सरकार

केरल रेप केस

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इमेज कैप्शन, दोषियों को अदालत से जेल ले जाते हुए पुलिसकर्मी

केरल के कानून मंत्री पी. राजीव ने कहा है कि सरकार इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ हाई कोर्ट में अपील करेगी.

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उन्होंने शुक्रवार को फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद कहा, ''अदालत के फ़ैसले से असहमत होना जायज़ है, लेकिन न्यायाधीश की आलोचना करने की कोई ज़रूरत नहीं है. फैसले के पीछे के कारणों को हम पूरा फ़ैसला पढ़ने के बाद ही समझ सकते हैं.''

विशेष लोक अभियोजक वी अजाकुमार ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया, ''हमें सरकार से उच्च न्यायालय में अपील करने के निर्देश मिल चुके हैं. हम आरोपी संख्या सात से दस (आरोपी संख्या आठ अभिनेता दिलीप हैं) के बरी होने पर सवाल उठाएंगे. यह फ़ैसला समाज के लिए एक गलत संदेश है.''

अभियोजन पक्ष ने जो मामला अदालत के सामने रखा, उसके मुताबिक एर्नाकुलम के अंगामली के पास एक गाड़ी ने एक्टर की कार को पीछे से टक्कर मार दी थी. इसके बाद छह लोगों ने ड्राइवर से झगड़ा किया, कार में जबरदस्ती घुसे और उसे चलाकर ले गए.

अभियोजन पक्ष के अनुसार पल्सर सुनी उर्फ़ एनएस सुनील ने एक्टर के साथ यौन उत्पीड़न किया और इस घटना को अपने मोबाइल फ़ोन पर रिकॉर्ड भी किया. बाद में एक्टर को एक फिल्म निर्देशक के घर के बाहर छोड़ दिया गया.

इस मामले ने केरल और भारतीय फिल्म उद्योग में आक्रोश पैदा कर दिया था. इसका सबसे अधिक प्रभाव मलयालम फिल्म इंडस्ट्री पर पड़ा, जिसने पहली बार इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की. इसके बाद उत्पीड़न और यौन शोषण की कई कहानियाँ सामने आईं.

इसके चलते राज्य सरकार ने जस्टिस हेमा कमेटी का गठन किया, जहां कई महिलाओं ने पुरुषों के ख़िलाफ़ शिकायतें दर्ज कराईं.

'मी टू' आंदोलन के चलते राज्य सरकार ने शिकायतों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया. इस जांच दल के सामने अब भी कुछ मामले चल रहे हैं.

अदालत में आज क्या हुआ?

एक्टर दिलीप

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इमेज कैप्शन, एक्टर दिलीप (सफ़ेद कमीज़ में) को 2017 में गिरफ़्तार किया गया था और जमानत पर रिहा होने से पहले उन्होंने तीन महीने जेल में बिताए थे. उन्हें इस केस में बरी कर दिया गया है.

शुक्रवार सुबह जज वर्गीज़ ने सजा सुनाए जाने से पहले दोषी ठहराए गए छह व्यक्तियों से कुछ कहने का अनुरोध किया. दोषी ठहराए गए छह में से पांच ने खुद को निर्दोष बताया. सुनील ने ऐसा नहीं किया.

सुनील ने अदालत को बताया कि उन्हें अपनी बूढ़ी माँ की देखभाल करनी है. दूसरे दोषी मणिकंदन बी ने अपनी बेगुनाही का दावा करते हुए कहा कि वह परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं और उन्हें अपनी पत्नी, नौ वर्षीय बेटे और ढाई वर्षीय बेटी की देखभाल करनी पड़ती है.

तीसरे दोषी मार्टिन एंटनी ने कहा कि वह निर्दोष हैं और उन्होंने साढ़े पांच साल जेल में बिताए हैं. उन्होंने बरी किए जाने की गुहार लगाई.

चौथे शख़्स विजयेश वीपी ने निर्दोष होने का दावा करते हुए अदालत से एक अजीबोगरीब अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि उन्हें कन्नूर जेल में रखा जाए क्योंकि वह थलस्सेरी के रहने वाले हैं.

पांचवें अभियुक्त वदिवाल सलीम ने भी खुद को निर्दोष बताया और कहा कि उनकी पत्नी और तीन साल की बेटी है.

इन सभी पर आपराधिक साज़िश, अवैध रूप से कैद में रखने, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने, सामूहिक बलात्कार, सबूतों को मिटाने, अपहरण, आपराधिक धमकी, यौन रूप से स्पष्ट सामग्री रिकॉर्ड करने और उसे शेयर करने जैसे अभियोग लगाए गए थे.

इसके बाद जज वर्गीज़ ने कहा, "असली अपराधी सुनील कुमार उर्फ़ पल्सर सुनील है. बाकी पांचों की भी इस अपराध में भूमिका है."

अदालत ने यह भी कहा कि सुनील का मामला दूसरों से अलग था.

अदालत ने कहा, ''महिला की बेबसी को समझना होगा. यह मामला उसकी गरिमा का है.''

फ़ैसला सुनाने के लिए अदालत की कार्यवाही शुक्रवार दोपहर 3.30 बजे स्थगित करने से पहले अदालत ने यह बात कही थी. अदालत ने 261 गवाहों से पूछताछ की, जिनमें से कई की पूछताछ बंद कमरे में हुई. इनमें कई बड़ी फ़िल्मी हस्तियां भी शामिल थीं.

मुकदमे के दौरान लगभग 28 गवाह मुकर गए. इस मामले में कई उतार-चढ़ाव आए, कई बार यह उच्च न्यायालय और यहां तक कि सर्वोच्च न्यायालय तक भी पहुंचा.

आईटी एक्ट के तहत भी सज़ा

सरकारी वकील अजाकुमार

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इमेज कैप्शन, विशेष लोक अभियोजक वी अजाकुमार ने कहा है कि यह फ़ैसला समाज के लिए एक गलत संदेश है.

सामूहिक बलात्कार और आपराधिक साजिश के आरोपों में दोषी ठहराए जाने के अलावा, सुनील को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 ई के तहत हमले के वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए तीन साल के कठोर कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है.

साथ ही, उन वीडियो को साझा करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67ए के उल्लंघन के लिए उन्हें इतना ही जुर्माना भरना होगा और पांच साल की सजा काटनी होगी.

मार्टिन एंटनी को आईपीसी की धारा 201 के तहत सबूत नष्ट करने के आरोप में तीन साल की कठोर कारावास और 25 हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया गया. अपहरण के आरोप में दोषी पाए गए सभी छह लोगों को 10 साल की जेल और 25 हज़ार रुपये का जुर्माना भरना होगा.

कुल मिलाकर सुनील को 3.25 लाख रुपये और मार्टिन एंटनी को 3.25 लाख रुपये का भुगतान करना होगा.

दोषियों से ली जाने वाली कुल राशि में से पांच लाख रुपये महिला को दिए जाएंगे, साथ ही वह सोने की अंगूठी भी दी जाएगी जो उनसे छीन ली गई थी.

दोषियों ने जितने दिन जेल में बिताए हैं, उतने दिन सजा से घटा दिए जाएंगे. सुनील ने सात साल, छह महीने और 29 दिन, मार्टिन एंटनी ने पांच साल और 21 दिन, मणिकंदन ने चार साल, आठ महीने और 27 दिन, विजयेश ने पांच साल, एक महीने और 15 दिन, सलीम ने एक साल, 11 महीने और 12 दिन और प्रदीप ने तीन साल, तीन महीने और 28 दिन जेल में बिताए हैं.

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