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राजस्थान: 12 साल की बच्ची को चार दिन बनाए रखा बंधक, रेप के आरोप में 18 गिरफ़्तार
- Author, मोहर सिंह मीणा
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लिए
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
(इस कहानी का ब्योरा आपको विचलित कर सकता है)
राजस्थान के श्रीगंगानगर ज़िले में 12 साल की एक बच्ची से रेप के आरोप में 18 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. पुलिस के मुताबिक इस मामले में जल्द ही और गिरफ़्तारियां हो सकती हैं.
पुलिस के मुताबिक बच्ची को चार दिनों तक बंधक बनाकर अलग-अलग जगह रखा गया और देह व्यापार करवाया गया.
श्रीगंगानगर ज़िले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) हरिशंकर ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया है, "इस मामले की जांच लगभग अंतिम स्तर पर है. हमने 18 लोगों को गिरफ्तार किया है."
उन्होंने ये भी बताया कि अभी सीसीटीवी फ़ुटेज चेक किए जा रहे हैं और इसके बाद तीन से चार गिरफ़्तारियां और होंगी.
क्या है पूरा मामला
इस मामले के जांच अधिकारी और अडिशनल एसपी कैलाश दान बताते हैं कि इस लड़की का इंस्टाग्राम पर एक फ्रेंड था, जिससे मिलने के लिए वह 18 जून को श्रीगंगानगर से सौ किलोमीटर दूर विजयनगर गई थी, वहां उस फ्रेंड ने उसके साथ रेप किया.
जानकारी के मुताबिक़ उसके बाद ये बच्ची विजयनगर से बस से रात में श्रीगंगानगर पहुंची और रिक्शा किया.
बच्ची के घर ना पहुंचने पर उसकी मां ने कई जगह उसकी तलाश की और रिश्तेदारी में पूछताछ की. लेकिन जब 22 जून तक भी बच्ची घर नहीं पहुंची तो माँ पुलिस थाने पहुंची.
सदर पुलिस थाने के प्रभारी सुभाष चंद्रा बीबीसी से कहते हैं, "बच्ची की मां के थाने पहुंचने से पहले ही हमें बच्ची के साथ हुई घटना की जानकारी मिल गई थी. हम बच्ची तक पहुंच गए और अभियुक्तों को हिरासत में ले लिया था."
"यह मामला महिला थाने से जुड़ा था, इसलिए महिला थाना प्रभारी और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सदस्य आ गए थे. हमने बच्ची को उनके सुपुर्द कर दिया."
महिला पुलिस थाना प्रभारी कलावती चौधरी ने बीबीसी से कहा, "बच्ची की शिकायत पर हमने पॉक्सो, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, देह व्यापार समेत अन्य संबंधित धाराओं में एफ़आईआर दर्ज की हैं. मामले की जांच एडिशनल एसपी कर रहे हैं."
वो आगे बताती हैं कि बच्ची ने बताया कि 20 से 25 लोगों ने उसका रेप किया.
18 अभियुक्त गिरफ़्तार
जांच अधिकारी एडिशनल एसपी बीबीसी से फ़ोन पर बताते हैं कि बच्ची के साथ 18 जून की रात से 22 जून की दोपहर के बीच ये घटनाएं हुई हैं.
वह बताते हैं, "बच्ची अपने फ्रेंड से मिलकर रात को श्रीगंगानगर बस स्टैंड पहुंची. यहाँ से उसने रिक्शा लिया. रिक्शे वाला उसे एक होटल में ले गया, जिसके बाद यह पूरी घटना हुई."
"रिक्शे वाला रात को बच्ची के साथ ही होटल में रुका. रेप के मामले में रिक्शे वाले को भी गिरफ़्तार किया गया है."
वह आगे बताते हैं, "जिस होटल में बच्ची को ले जाया गया, वहीं उसके साथ सबसे ज़्यादा बार रेप हुआ. इसके अलावा दो अन्य होटलों में भी बच्ची को ले जाया गया, जहां रेप की घटना हुई."
उनका कहना है कि जांच जारी है और जल्द ही कम से कम चार लोग और गिरफ्तार होंगे. इस मामले में अभी तक गिरफ्तार सभी अभियुक्त बालिग हैं, और लड़की के सोशल मीडिया फ़्रेंड को विजयनगर से गिरफ़्तार किया गया है.
पुलिस ने अभियुक्तों को रिमांड पर भी लिया और अब वे ज्यूडिशियल कस्टडी में जेल में हैं. पुलिस होटल की सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जल्द ही कुछ अन्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी कर सकती है.
बच्ची के साथ जिन तीन होटलों में रेप के आरोप है, उन सभी पर ज़िला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए बुलडोज़र चलाया है.
ग़ुस्से में स्थानीय लोग
घटना के बाद महिला पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज हुई है. बच्ची का मेडिकल किया गया और बयान भी दर्ज किए गए हैं. पुलिस ने बच्ची से अभियुक्तों की शिनाख्त भी कराई है.
जांच अधिकारी बताते हैं कि बच्ची अभी अपने माता-पिता के साथ अपने घर पर है.
घटना के बाद से श्रीगंगानगर में लगातार लोग सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं और अभियुक्तों को कड़ी सज़ा देने की मांग उठाई जा रही है.
दिल्ली एम्स अस्पताल में मनोचिकित्सक डॉ गणेश मीणा बताते हैं कि कोई भी नाबालिग जब ऐसी स्थिति से गुज़रता है, जहां उसके साथ रेप की घटना होती है, परिवार में किसी की मृत्यु होती है या कोई बड़ा हादसा होता है, तब वह पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) से गुज़रता है.
डॉक्टर मीणा के मुताबिक़, पीटीएसडी में बच्चे के आत्मविश्वास में गिरावट आती है. वह किसी पर भरोसा नहीं करता, खामोश रहता है, पढ़ाई छूट जाती है और बाहर के लोगों से उसे डर लगता है. वह बार-बार उस घटना को याद कर सहम जाता है. ऐसी स्थिति में बच्चे का पूरा जीवन प्रभावित हो सकता है.
बच्चों को इस स्थिति से उबरने के लिए समाधान बताते हुए वह कहते हैं कि ऐसी स्थिति में साइकियाट्रिस्ट की सलाह लेनी चाहिए. इसके साथ दवाइयां और थेरेपी भी है, जो लंबी प्रक्रिया है. बच्चों में इस दौरान परेशान करने वाले विचार आते हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.