कोरोना वायरस: चीन के लोग लॉकडाउन में भी कैसे मुस्कुराते रहे?

कोरोना लॉकडाउन चीन

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    • Author, मैट जेनकिन्स
    • पदनाम, बीबीसी ट्रैवेल
  • प्रकाशित

फरवरी की शुरुआत में जब कोरोना वायरस ताक़तवर होता जा रहा था तब चीन के वुहान से आ रही दिल दहलाने वाली ख़बरों को नज़रअंदाज़ करना नामुमकिन था.

मैं वहां से 945 किलोमीटर दूर ताइवान में थी जहां से मैंने चीन के मैसेजिंग और सोशल मीडिया ऐप 'वीचैट' पर बारीक नज़र रखनी शुरू की.

सड़क पर गश खाकर गिरते लोगों और अपार्टमेंट ब्लॉक से निकलती लाशों के बीच ज़ल्द ही कुछ दिलचस्प वीडियो आने लगे.

इन वीडियो को चीनी लोग ख़ुद से बना रहे थे. दुनिया आज जिस बात को जानती है यह उसकी पहली झलक थी.

कई लोग कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ ज़िंदगी की जंग लड़ रहे हैं, लेकिन हमारी बड़ी आबादी बस सामान्य बने रहने और लॉकडाउन में थोड़ी सी हंसी-ख़ुशी तलाशने की कोशिश कर रही है.

इस विरोधाभास को सबसे पहले चीन के लोगों ने झेला.

दूसरे देशों में लोग सरकारी लॉकडाउन का सामना कैसे कर रहे हैं इसे कई रचनात्मक तरीके से रिपोर्ट किया गया है, लेकिन चीन के बारे में हम सिर्फ़ वहां के सरकारी मीडिया पर निर्भर हैं.

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सरकारी मीडिया यह नहीं बताता कि 1.4 अरब लोग किस तरह दर्द के बीच पड़ोसियों को ख़ुश रखने के लिए हंसी मज़ाक का सहारा लेते रहे.

इटली के लोग खिड़कियों पर खड़े होकर ज़ोर-ज़ोर से गाते-बजाते हैं. मैड्रिड से लेकर मुंबई तक लोगों ने बालकनियों में खड़े होकर स्वास्थ्यकर्मियों के लिए तालियां बजाई हैं.

ख़ुद पर हंसने की कला

चीन के लोग रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए अक्सर ख़ुद पर ही हंस लेते हैं.

लोगों ने टॉयलेट पेपर के रोल की ड्रेस पहनकर गाना गाने के वीडियो पोस्ट किए. ये वीडियो भव्य ओपेरा में नहीं बने, चीन के लोगों ने इसे अपने घर में ही बनाया.

कुछ मज़ाकिया वीडियो में लोग अपने जीवनसाथी के बेसुरे गाने से बचने के लिए अपार्टमेंट से भागने की कोशिश करते दिखते हैं.

अनिश्चितता और लाचारी दूर करने वाली इन प्रतिक्रियाओं की जड़ें चीन की प्राचीन कला- कुज़ोंग ज़ुओले में है. इसका अर्थ है- "दुख के बीच आनंद खोजना".

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ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी में आधुनिक चीनी साहित्य के प्रोफेसर क्रिस्टोफर री के मुताबिक कुज़ोंग ज़ुओले शब्द का पहला इस्तेमाल बौद्ध ग्रंथ महारत्नकूट सूत्र के चीनी अनुवाद में मिलता है. यह अनुवाद 1375 साल पहले तांग राजवंश के समय हुआ था.

आधुनिक समय में यह प्राकृतिक आपदाओं से लेकर सरकार के कठोर नियंत्रण तक, असहाय कर देने वाले हालात में मुस्कुराने का प्रतीक बन गया है.

मुश्किलों में भी मुस्कुराना

री लिखते हैं, "इनके हंसी-मज़ाक और चुटकुलों ने ध्यान खींचा है और जनभावना को प्रभावित किया है."

अमरीकी लेखक ईबी व्हाइट ने लिखा है, "हास्यवादी परेशानियों को भुनाते हैं". आधुनिक चीन में ये जहां-तहां बिखरी हुई हैं.

दूसरे देशों में ऐसी धारणा है कि चीन में हास-परिहास नहीं होता. री इस धारणा को सुधारने का प्रयास करते हैं. कुज़ोंग ज़ुओले चीन में एक तरह की सांस्कृतिक कसौटी है जिसमें हास्य की व्यापक श्रृंखला है.

इसमें रोज़ाना की चुहल से लेकर सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की व्यंग्यात्मक आलोचना तक शामिल है.

री कहते हैं, "मुझे लगता है कि यह (कुज़ोंग ज़ुओले) एक रूपक है. यह चीनी हास्य के बारे में विचार करने का तरीक़ा है जो कम से कम 20वीं सदी में हावी रहा है."

"21वीं सदी में भी सेंसरशिप और अभिव्यक्ति की आज़ादी सहित नागरिक स्वतंत्रता पर तमाम तरह की बंदिशों के बावजूद यह मौजूद है."

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वैसे इस विचार के आलोचक भी हैं जिनमें से कुछ जाने-माने हास्यवादी हैं.

20वीं सदी के महान चीनी लेखकों में से एक लु शुन ने 1933 में पूछा था, "क्या लोग उन जगहों पर भी हंस सकते हैं जहां मूसलाधार बारिश हो रही हो और खेतों में बाढ़ का पानी भरा हो?"

चीन में ज़ाहिर तौर पर इसका जवाब है हां. भूकंप से लेकर बाढ़, अकाल और महामारी तक, चीन बड़ी कुदरती आपदाएं झेलता रहा है.

हालात पर व्यंग्य

दुनिया की आबादी का लगभग पांचवा हिस्सा चीन में रहता है. देश का संघर्ष अक्सर बड़ी तादाद में लोगों को बेसहारा छोड़ देता है. अनिश्चितता का सामना करने पर चीनी लोग कुज़ोंग ज़ुओले का सहारा लेते हैं.

मिसाल के लिए 2011 में, जब बीजिंग भयंकर आंधी-बारिश की चपेट में आया था तब लोगों ने विशाल साउथ-नॉर्थ वाटर ट्रांसफर प्रोजेक्ट पर व्यंग्य करना शुरू कर दिया था.

बीजिंग की गलियां जब पानी से भर गईं तब लोगों ने एक-दूसरे को टेक्स्ट मैसेज भेजे- इस बार तो प्रोजेक्ट एकदम सही काम कर रहा है.

हाई स्पीड रेल हादसों से लेकर हाई-प्रोफाइल भ्रष्टाचार के मामलों तक, लोगों ने हर जगह मज़ा ढूंढ़ लिया.

इस साल फरवरी और मार्च में जब कोरोना वायरस ने करीब 6 करोड़ चीनी लोगों को लॉकडाउन में रहने को विवश कर दिया, तब लोगों ने वीचैट और डॉयइन जैसे वीडियो ऐप्स का रुख किया.

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कई वीडियो में लगता है कि मौजूदा हालात पर तमाचा मारा गया है.

एक वीडियो में पुलिस वाला और नगरपालिका का कर्मचारी बिना मास्क पहने घूम रहे आदमी को डपट रहे हैं.

वह आदमी अपनी जगह खड़ा रहता है- तब तक सफाई कर्मचारी छींकने नहीं लग जाता. तब वह आदमी अपनी पिछली जेब से ज़ल्दी-ज़ल्दी मास्क ढूंढ़ता है और अपने चेहरे पर लगा लेता है.

डॉयइन के एक वीडियो में लॉकडाउन करा रहे मोहल्ले के चौकीदार की तुलना दार्शनिक से की गई है जो मामूली मगर गहरे अर्थ वाले सवाल पूछता है- तुम कौन हो? तुम कहां से आए हो? और तुम्हें कहां जाना है?

कुछ दूसरे मीम्स पहेलियों वाले हैं, जैसे क्यूपा (जिसका मतलब होता है कीड़ों की तरह रेंगना) हैशटैग के साथ पोस्ट किए गए वीडियो.

ऐसा करने वालों में ज़्यादातर युवा महिलाएं हैं जो लॉकडाउन की अनौपचारिक ड्रेस- पायजामा, बाथ रोब्स और चप्पल में रहती हैं.

क्यूपा के लिए वे फर्श पर कीड़े मकोड़ों की तरह रेंगते हुए पूरे घर में चक्कर लगाती हैं. कुछ वीडियो में पूरा परिवार ही ऐसा करते हुए ख़ुद को शूट करता है.

इसका मतलब क्या है? मैं जिसे भी जानती हूं- यहां तक कि चीन में मेरे जिन दोस्तों ने यह वीडियो मुझे फॉरवर्ड किया उनको भी इसका पता नहीं है.

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बेतुकी ज़िंदगी के मज़ाक

री कहते हैं, "मुझे लगता है कि यह हालात से तालमेल बिठाने का तरीका है. वे कहना चाहते हैं कि हमें इसके लिए मजबूर किया गया है. हमारा अस्तित्व फंसा हुआ है."

"यदि हमें इसी हालत में रहना है तो हम इसे मंजूर करते हैं. यदि हम कीड़े-मकोड़ों की तरह रह रहे हैं तो चलो कीड़े जैसा ही रहते हैं."

चीनी लेखक यू हुआ ने कई साल पहले लॉस एंजेल्स रिव्यू ऑफ़ बुक्स से कहा था, "चीन में वास्तविकता कल्पना से कहीं अधिक बेतुकी है."

री के मुताबिक़, चीन के कई आम लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पहले से ही अवास्तविकता- वास्तविकता से दो-चार है. महामारी ने उसे उभार दिया है.

वह एक और चीनी मुहावरे की ओर इशारा करते हैं- जियान्गुई बुगुई, जिसका मोटे तौर पर अर्थ है- "हम इन विचित्रताओं के इतने आदी हो गए हैं कि अब ये विचित्र नहीं लगते."

चीनी सोशल मीडिया पर जो दिखता है उसके छिपे हुए अर्थ का पता लगाना हमेशा रोमांचक है. फिर भी, कभी-कभी इतनी बारीकी से विश्लेषण नहीं करना पड़ता.

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तलवारबाज़ नायिका

मार्च की शुरुआत में बीजिंग में रहने वाले एक परिचित ने मुझे 30 सेकेंड की क्लिप भेजी जो भुलाए नहीं भूलती.

इसमें एक युवा महिला पायजामे और बाथरूम की चप्पल में अपार्टमेंट से बाहर आती है. उसके चेहरे पर मास्क है. एक हाथ में कूड़े का थैला है और दूसरे हाथ में तलवार है.

कूड़े को कूड़ेदान में गिराने के बाद वह स्प्लिट किक करते हुए तलवार को सिर के ऊपर उछालती है, फिर उछलकर उसे पकड़ती है.

पूरे लय में मार्शल आर्ट का हुनर दिखाती है और जिस तेज़ी से उसने शुरुआत की थी, उसी तेज़ी से ख़त्म करके वह गायब हो जाती है.

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नेमलेस नाम के गीत के साथ बनाए गए इस वीडियो ने तुरंत लोगों का ध्यान खींच लिया.

वह कौन थी? वह कहां की थी? उसकी तारीफ़ में टिप्पणियों की बाढ़ आ गई.

तांग राजवंश के समय की कविताएं लिखी की जाने लगीं. दिवंगत लेखक जिन योंग की तलवारबाज़ नायिका से उसकी तुलना होने लगी.

वीडियो क्लिप में कोई संदर्भ नहीं था, फिर भी इसने एक साथ कई कल्पनाओं को जन्म दे दिया- चीनी तलवारबाज़ पीढ़ी, लॉकडाउन में रोज़मर्रा की दुनियादारी, अलगाव की भावना, गुमनामी की भावना जो सबके ज़हन में थी.

ये साझा भावनाएं नये तरीके से लोगों को करीब लाती दिख रही हैं और उसमें इस जैसे वीडियो अहम भूमिका निभा रहे हैं.

पहली बार जब मैंने इस वीडियो को देखा था उसके एक महीने बाद भी मैं इसे देखने से ख़ुद को नहीं रोक सकती. हर बार लगता है कि मैं कुछ प्रेरक और मज़ेदार देख रही हूं.

यह याद दिलाता है कि हम सब भले ही शक्तिहीन महसूस करते हैं, लेकिन हम सबमें नायक बनने की क्षमता है.

भारत में कोरोनावायरस के मामले

यह जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाती है, हालांकि मुमकिन है इनमें किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के नवीनतम आंकड़े तुरंत न दिखें.

राज्य या केंद्र शासित प्रदेश कुल मामले जो स्वस्थ हुए मौतें
महाराष्ट्र 1351153 1049947 35751
आंध्र प्रदेश 681161 612300 5745
तमिलनाडु 586397 530708 9383
कर्नाटक 582458 469750 8641
उत्तराखंड 390875 331270 5652
गोवा 273098 240703 5272
पश्चिम बंगाल 250580 219844 4837
ओडिशा 212609 177585 866
तेलंगाना 189283 158690 1116
बिहार 180032 166188 892
केरल 179923 121264 698
असम 173629 142297 667
हरियाणा 134623 114576 3431
राजस्थान 130971 109472 1456
हिमाचल प्रदेश 125412 108411 1331
मध्य प्रदेश 124166 100012 2242
पंजाब 111375 90345 3284
छत्तीसगढ़ 108458 74537 877
झारखंड 81417 68603 688
उत्तर प्रदेश 47502 36646 580
गुजरात 32396 27072 407
पुडुचेरी 26685 21156 515
जम्मू और कश्मीर 14457 10607 175
चंडीगढ़ 11678 9325 153
मणिपुर 10477 7982 64
लद्दाख 4152 3064 58
अंडमान निकोबार द्वीप समूह 3803 3582 53
दिल्ली 3015 2836 2
मिज़ोरम 1958 1459 0

स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

11: 30 IST को अपडेट किया गया

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(ये बीबीसी ट्रैवेल की स्टोरी का अक्षरश: अनुवाद नहीं है. मूल कहानी देखने के लिए यहां क्लिक कर सकते हैं.)

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