अमरीकी सैनिकों की जान बचाने वाली मछली!

शैड मछली
    • Author, एश्ली विंचेस्टर
    • पदनाम, बीबीसी ट्रैवल
  • प्रकाशित

क्या आपको पता है कि मछली से बनने वाली एक डिश ने अमरीका के वजूद को बचाने में बहुत बड़ा रोल निभाया था?

इस मछली को अमरीकी शैड के नाम से बुलाते हैं. एक दौर था जब शैड मछलियों को पकड़कर पकाने-खाने के लिए अमरीकी लोग सब काम छोड़कर जुट जाते थे.

अमरीकी सूबे कनेक्टिकट के छोटे से गांव एसेक्स में आज भी शैड मछली भूनकर खाने का चलन है. इसके लिए बाक़ायदा हर साल एक कार्यक्रम का आयोजन होता है. 1958 से रोटरी क्लब इसका आयोजन कर रहा है. ये मछली यहां के लोगों के लिए इतनी ख़ास क्यों है, ये आपको बताएंगे लेकिन उससे पहले इसे पकाने का तरीक़ा आपको बताते हैं.

शैड मछली
इमेज कैप्शन, फट्टों में ठोक कर पकाई जाती है मछली

सारे कांटे निकाले जाते हैं

शैड एक ख़ास तरह की बड़े आकार वाली मछली होती है. कनेक्टिकट नदी में मिलने वाली ये मछली, उत्तरी अटलांटिक महासागर के एक हिस्से सारगासो सागर से नदी में आती है.

शैड मछलियां अप्रैल से जून महीने में कनेक्टिकट नदी में अंडे देने के लिए जमा हो जाती हैं. बहार का मौसम आने तक इनकी अच्छी ख़ासी आबादी हो जाती है. ये मछली नदी में इतनी ज़्यादा तादाद में होती हैं कि जिसे मछले पकड़ना भी नहीं आता वो भी मछली मारने बैठ जाता है.

शैड मछली को काटकर सबसे पहले इसके तमाम कांटे निकाले जाते हैं. फिर इसके लंबे और पतले टुकड़े काटकर लकड़ी के फट्टों पर कील की मदद से ठोंका जाता है. मछली के टुकड़ों में छोटे-छोटे कट लगाकर उस पर नमक, मसाला और लाल शिमला मिर्च के टुकड़े लगाए जाते है. फिर एक बड़ी-सी अंगीठी में इन्हें भूना जाता है.

फट्टों के नीचे बड़े-बड़े बर्तन रखे होते हैं ताकि गर्म होने पर मछली का तेल इनमें जमा हो जाए और मछली जल्दी सिंक कर कुरकुरी बन जाए. इसे खाने के लिए कनेक्टिकट रिवर म्यूज़ियम में लोग दूर दूर से आते हैं. शैड मछली को पकाने के तरीक़ों का ज़िक्र अठारहवीं सदी की किताबों में भी मिलता है.

शैड मछली

ग़रीबों का खाना

जानकारों का कहना है कि जब अमरीका, ब्रिटेन का ग़ुलाम था, तो ग़रीब लोग बड़ी मात्रा में शैड मछली खाते थे. उस दौर में ये ग़रीब किसानों और मज़दूरों का खाना होती थी. यहां तक कि जेल में बंद क़ैदियों को भी शैड मछली खाने के लिए दी जाती थी.

कनेक्टिकट नदी में ये मछली भारी मात्रा में पायी जाती थी. लिहाज़ा आस-पास के ग़रीब लोग इसी से अपना पेट पालते थे. एक दौर में ये मछली ग़रीबों का खाना कहलाती थी. कनेक्टिकट के लोक क़िस्सों में भी इसका ज़िक्र मिलता है. कुछ कहानियों में कहा गया है कि इसे शैतान ने अपनी हड्डियों से बनाया है. तो कुछ में इसे बुरी आत्माओं का रूप बताया गया है.

बहरहाल, इन लोक कथाओं से इतर एक बात पर यक़ीन किया जा सकता है कि इस मछली ने अमरिकी सेनाओं की जान बचाई थी. कहा जाता है कि जब जॉर्ज वॉशिंगटन की फ़ौजें दुश्मन और अकाल से लड़ रही थीं, उस वक़्त शैड मछली ने दोनों से जंग जीतने में सेना की मदद की थी.

सेना मोर्चे पर डटी थी और खाने को कुछ नहीं था. अचानक बहुत बड़ी मात्रा में शैड की पैदावार हो गई. सैनिकों ने शैड खाकर ही अपनी भूख मिटाई और अमरीकी क्रांति की लड़ाई जीती.

इसमें कोई शक नहीं कि शैड एक ज़ायक़ेदार मछली है. लेकिन आसानी से दस्तयाब होने और बहुत ज़्यादा मात्रा में पैदा होने की वजह से इसकी पहचान गरीबों के खाने के तौर पर ही रही. हालांकि, बीसवीं सदी में जब अर्थव्यवस्था का मिज़ाज बदला तो शैड के हालात भी बदले.

शैड मछली

शादियों की ख़ास डिश

अमरीका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में तो ज़्यादा से ज़्यादा बेक की हुई शैड मछली खाने का मुक़ाबला होने लगा है. शादी-ब्याह, सियासी पार्टियों वग़ैरह में भी शैड को एक ख़ास डिश के तौर पर परोसा जाने लगा है.

अमरीका के एक राज्य उत्तरी कैरोलाइना ने तो दावा ही पेश करना शुरू कर दिया है कि ये मछली उनकी है. सबसे अच्छे तरीके से वही लोग इसे पकाते हैं. हालांकि कुछ लोगों को बहुत ज़्यादा कांटे होने की वजह से इसका ज़ायक़ा पसंद नहीं आता है. लेकिन रिवायती तौर पर इसकी मांग इतनी ज़्यादा है कि हर कोई इसका स्वाद लेना चाहता है.

शैड को इसे बहुत तरीकों से पकाया जाता है, लेकिन लकड़ी के फट्टों पर इसके टुकड़े ठोक कर सेंकने के बाद जो स्वाद आता है, वो किसी और तरीक़े से पकाई शैड में नहीं आता.

कनेक्टिकट नदी
इमेज कैप्शन, कनेक्टिकट का एसेक्स रोटरी क्लब शैड मछली सेंकने का कार्यक्रम आयोजित करता है

कारखानों से पैदावार में कमी

कुछ इतिहासकारों का कहना है कि मध्यम वर्ग के समाज में शैड खाने का चलन बढ़ा है. लेकिन, इसे पारंपरिक तरीक़ों से पकाने का रिवाज अब लगभग ख़त्म सा हो रहा है. कुछ लोग ही बाक़ी बचे हैं जो आज भी इस रिवायत को ज़िंदा रखे हुए हैं.

कनेक्टिकट के क़स्बे एसेक्स का रोटरी क्लब पिछले साठ सालों से इस परंपरा को आगे बढ़ा रहा है.

अमरीकी अर्थव्यवस्था बदलने से शैड का क्रेज़ तो बढ़ा है. लेकिन कनेक्टिकट नदी के पास बड़े कारखाने और फ़ैक्ट्रियां लगने से इसकी पैदावार में कमी आई है. हालांकि, कनेक्टिकट का ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण विभाग शैड के फलने-फूलने का पूरा ख़्याल रख रहा है.

(अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी ट्रैवल पर उपलब्ध है.)

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