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शनिवार, 21 फ़रवरी, 2009 को 13:33 GMT तक के समाचार

प्रदीप मैगज़ीन
वरिष्ठ खेल पत्रकार

बहुत कठिन है डगर आईपीएल की

फटाफट क्रिकेट का नया अवतार T-20 बेशक इस खेल में नई क्रांति लाया है, लेकिन इसे तेज़ी से आगे बढ़ाने के बड़े-बड़े दावों के बावजूद राह इतनी आसान नहीं है और बाधाओं से अटी पड़ी है.

आर्थिक मंदी इसके लिए पहली बुरी ख़बर थी. फिर इंग्लैंड के क्रिकेटरों को करोड़ों-अरबों डॉलर का ख़्वाब दिखाने वाले एलन स्टैनफ़ोर्ड के सपने हक़ीक़त में बदलने से पहले ही चकनाचूर हो गए.

भारत में भी हालात अच्छे नहीं हैं. क्रिकेट का चेहरा-मोहरा बदल देने वाले ललित मोदी के दिन यूँ भी अच्छे नहीं चल रहे हैं और भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण राजस्थान में उनके क्रिकेट साम्राज्य पर ख़तरा मँडरा रहा है.

आईपीएल की सेहत अभी भले ही अच्छी हो, लेकिन जिस तरह के हालात बन रहे हैं उससे इस खेल में और धन बरसने की उम्मीदों को झटका लगा है.

चुनौतियां

पहला ख़तरा घरेलू दर्शकों की तरफ़ से आने की आशंका है. ये वही दर्शक हैं जो स्टेडियमों में पहुँच कर न केवल टीमों की हौंसला अफ़जाई करते हैं, बल्कि इस खेल को प्रायोजित करने वालों को भी खींचते हैं.

आईपीएल को टेलीविज़न पर प्रसारित करने का ज़िम्मा निभाने वाले सोनी के सीईओ ने इस्तीफ़ा दे दिया है.

इस्तीफ़े की असली वजह कोई नहीं जानता, लेकिन अटकलों का बाज़ार गर्म है कि मंदी के माहौल में पैसे की क़िल्लत को देखते हुए ही उन्होंने इस जहाज़ को आगे खेने की बजाय कमान छोड़ना ही बेहतर समझा.

लेकिन इन सबसे बेपरवाह अपने उत्पाद और प्रायोजकों को एक माँ की तरह दुनिया की जलनभरी नज़रों से बचाने वाले आईपीएल सम्राट डींग मारते नहीं थक रहे हैं और वादा कर रहे हैं कि इस साल का आईपीएल पहले से भव्य और शानदार होगा.

उनके दावों में कितना दम हैं इसके बारे में फ्रेंचाइज़ी भी बहुत आश्वस्त नहीं है. उन्हें पिछले साल भी अच्छा ख़ासा नुक़सान हुआ था और उन्हें डर है कि इस साल वो और भी रकम गँवा देंगे.

ऐसी भी आशंका है कि अगर सोनी का झंझट सौहार्द्रपूर्ण तरीक़े से जल्द न सुलझा तो ये आईपीएल को भारी नुक़सान पहुँचा सकता है.

आईपीएल के साथ समस्या ये नहीं है कि ये बहुत व्यावहारिक उत्पाद नहीं है. बेशक ये सुपरहिट है, लेकिन अब भी बहुत लोगों की पहुँच से दूर है और ख़ासकर तब जब अर्थव्यवस्था में सुधार के कोई लक्षण नज़र नहीं आ रहे हैं.

लालच

जैसा कि आईपीएल फ्रेंचाइज़ी के एक सीईओ कहते हैं, "आईपीएल को अपनी महत्वाकांक्षाएँ कम करनी चाहिए वरना ये लगातार बढ़ते लालच के बोझ तले दम तोड़ देगा."

यहाँ ज़िक्र भारतीय क्रिकेट बोर्ड के लालच का हो रहा है. बोर्ड को अब ये अहसास तो हो ही गया होगा कि क्रिकेटरों की नीलामी एक जुआ है जिसमें पैसे ये सोचकर झोंका जा रहा है कि कई गुना कमाई होगी.

लेकिन ये भुला दिया गया है कि जुए के इस खेल में कमाई की गारंटी सिर्फ़ एक ही आदमी की होती है और वो होता है कैसिनो का मालिक. बाक़ी सब भारी नुक़सान में रहते हैं.

भारतीय क्रिकेट बोर्ड को ये समझना होगा कि अगर फ़ायदा सिर्फ़ उन्हें ही होगा तो ये खेल उम्मीद से कहीं पहले ख़त्म हो जाएगा.

मुझे नहीं पता कि आईपीएल फ्रेंचाइज़ी इस बारे में अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं या नहीं, लेकिन कभी मदद की ज़रूरत पड़ी तो वो उन्हें होगी. वरना आईपीएल को भारी नुक़सान होगा क्योंकि लालच की भी आख़िरकार कोई सीमा होती है.

(लेखक हिंदुस्तान टाइम्स के खेल सलाहकार हैं)