रविवार, 24 अगस्त, 2008 को 07:08 GMT तक के समाचार
मलय नीरव
बीजिंग से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
ओलंपिक खेलों के समापन के पाँच दिनों के बाद ही शुरू होगी बीजिंग पैरा ओलंपिक मशाल रिले.
हर ओलंपिक खेलों के बाद खेलों में मानसिक और शारीरिक विकलांगता से जूझते हुए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों के लिए पारालंपिक खेलों का आयोजन किया जाता है.
इस बार रिले की शुरूआत होगी टेम्पल ऑफ़ हेवन यानी स्वर्ग के मंदिर से और मशाल प्रज्ज्वलित करेंगे सूर्यदेव.
इस मशाल रिले के लिए दो मार्ग चुने गए हैं- एक प्राचीन चीन का मार्ग और दूसरा आधुनिक चीन का.
बीजिंग ओलंपिक आयोजन समिति के कार्यपालक उपाध्यक्ष ज़ियांग जियाओ ने बताया है कि स्वर्ग यानी देवताओं के निवास स्थल और मनुष्यों को एक सूत्र में पिरोने के उद्देश्य से, मशाल की यात्रा स्वर्ग मंदिर से आरंभ होगी जो चीन की प्राचीन संस्कृति का परिचायक है.
धार्मिक विश्वासों को नया आयाम
इस प्रकार चीन में मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य और संतुलन बनाए रखने से जुड़ी परंपरागत विचारधाराओं पर आधारित धार्मिक विश्वासों को दोबारा नया आयाम दिया जा रहा है.
सूर्य की किरणों से दर्पण के सहारे अग्नि उत्पन्न कराई जाएगी जो मशाल को प्रज्वलित करेगी.
इसी प्रकार ओलंपिक मशाल की ज्योति भी प्रज्ज्वलित की गई थी.
पारालंपिक मशाल रिले स्वर्ग मंदिर से शुरू होकर प्राचीन मार्ग पर प्राचीन चीन की राजधानियों और ऐतिहासिक सांस्कृतिक महत्व वाले शहरों से होकर गुज़रेगी.
उधर आधुनिक चीन के मार्ग से गुज़रने वाली मशाल रिले भी स्वर्ग मंदिर से ही शुरू होगी और देश के सर्वाधिक विकसित नगरों से होकर गुज़रेगी.
आगामी पाँच सितंबर को दोनों मशालें बीजिंग में एक हो जाएंगी और फिर मशाल पहुँचेगी राष्ट्रीय स्टेडियम जहीँ छह सितंबर को उदघाटन समारोह आयोजित किया जाएगा.