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गुरुवार, 14 अगस्त, 2008 को 03:23 GMT तक के समाचार

रविकांत सिंह
बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

'एक कहावत बन गए अभिनव बिंद्रा'

बीजिंग ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले अभिनव बिंद्रा न सिर्फ़ भारत के अख़बारों की सुर्खियाँ बने बल्कि पदक जीतने के बाद चीन के स्थानीय अख़बारों में छाए रहे.

अंग्रेजी दैनिक 'चाइना डेली' ने सोमवार को हेडलाइन दी - 'एक अरब 10 लाख लोगों के एक देश में एक दिन'.

अख़बार ने लिखा कि एक अरब 10 लाख लोगों के देश में अभिनव पहले ऐसे भारतीय हैं जिन्हें व्यक्तिगत प्रदर्शन के कारण ओलंपिक में स्वर्ण पदक मिला है.

उन्होंने एथेंस ओलंपिक में विजयी रहे चीन के जू क़िनान को शिकस्त देकर यह सफलता पाई. जू को इस बार रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा.

अपने पहले पन्ने पर अख़बार ने लिखा, "बिंद्रा की जीत इसलिए भी और महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि इस बार पहली बार आठ स्वर्ण पदक जीत चुकी भारतीय हॉकी टीम को क्वॉलिफ़ाइंग दौर से ही बाहर होना पड़ा. वर्ष 1928 से 1956 तक भारतीय हॉकी टीम ने लगातार छह स्वर्ण पदक जीते थे."

इतिहास बनाया

चीनी भाषा में ओलंपिक खेल दैनिक ने अंदर के पन्ने पर इस शीर्षक से साथ एक लंबा लेख लिखा - 'भारत के लिए स्वर्ण जीतने वाला पहला भारतीय.' अख़बार ने लिखा, "बिंद्रा ने 10 मीटर एयर रायफ़ल में स्वर्ण पदक जीतकर न सिर्फ़ इतिहास रचा है बल्कि फ़ाइनल में भी बेहतरीन स्कोर किया. उन्होंने फ़ाइनल में 10 से ऊपर स्कोर किए और जू को रुला दिया."

कहावत बन गए

हांगकांग से प्रकाशित होने वाले अंग्रेजी दैनिक 'चाइना मार्निंग पोस्ट' ने बिंद्रा के फ़ोटो के साथ हेडलाइन दी है, 'कहावत बन गए बिंद्रा'.

अख़बार ने लिखा है, "25 वर्षीय चंडीगढ़ के रहने वाले बिंद्रा ने भारतीय खेल के इतिहास में अपना नाम दर्ज कर लिया है. उन्होंने व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण जीत कर देश की 108 वर्ष पुरानी हसरत को पूरा कर दिया."

सौम्य खिलाड़ी

बीजिंग ओलंपिक खेलों के लिए चीनी भाषा में प्रकाशित होने वाले सरकारी अख़बार ने हेडलाइन दी - "बिंद्रा एक सौम्य विजेता हैं." अख़बार ने लिखा, "इतिहास बनाने की बिंद्रा में अदभुत क्षमता है. 28 वर्ष के बाद पहला स्वर्ण पदक दिला कर बिंद्रा ने देश के खेल के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है."

अभिनव बिंद्रा की व्यक्तिगत ज़िदगी के ब्यौरों के साथ अख़बार ने उनके समृद्ध परिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में भी लिखा है.