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मंगलवार, 12 अगस्त, 2008 को 05:08 GMT तक के समाचार

प्रतीक्षा घिल्डियाल
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

'उसे ख़ुद पर नियंत्रण रखना आता है'

भारत को ओलंपिक में व्यक्तिगत स्पर्द्धा में पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाले अभिनव बिन्द्रा के पिता डॉक्टर एएस बिन्द्रा का कहना है कि अभिनव हमेशा ही शान्त और सौम्य रहने की कोशिश करते हैं.

दरअसल अभिनव को जिसने भी स्वर्ण पदक जीतने के बाद देखा उसने यही कहा कि इतनी बड़ी उपलब्धि के बाद भी वह कितना शान्त हैं.

ख़ुशी के मारे कोई चीखना नहीं, चिल्लाना नहीं या रोना नहीं. जब पदक दिए जा रहे थे तो रजत पदक जीतने वाले चीन के खिलाड़ी की आँखों से आँसू गिर रहे थे मगर अभिनव ने बहुत ही शान्त और सौम्य तरीक़े से हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन किया और स्वर्ण पदक ग्रहण किया.

बीबीसी हिंदी से विशेष बातचीत में अभिनव के पिता ने कहा कि शान्त रहना तो अभिनव की पहचान है.

उनका कहना था, "अभिनव को पता है कि अपनी भावनाओं पर कैसे नियंत्रण करना है और प्रतियोगिता के इतने बड़े स्तर पर इसकी ज़रूरत भी होती है."

'आलोचकों को चुप किया'

बेटे की इस उपलब्धि से बेहद ख़ुश डॉक्टर बिन्द्रा ने कहा कि इस ख़ुशी को शब्दों में बयान करना उनके लिए संभव नहीं है और उनके बेटे ने देश का नाम ऊँचा किया है.

उन्होंने साथ ही अभिनव के आलोचकों का मुँह बंद हो जाने की भी बात कही. डॉक्टर बिन्द्रा के अनुसार, "अभिनव ने उन लोगों को चुप किया है जो कहते थे कि अभिनव में अब वो दम नहीं है. इन वर्षों में हमने काफ़ी कुछ सुना मगर अब वे सब चुप हो गए हैं."

उन्होंने अभिनव की एक अन्य उपलब्धि का ज़िक्र करते हुए कहा, "अभिनव बतौर विश्व चैंपियन बीजिंग गए थे और वहाँ जाकर उन्होंने स्वर्ण पदक भी जीता. निशानेबाज़ी में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि किसी ने विश्व चैंपियन रहते हुए ओलंपिक का स्वर्ण भी जीता हो."

वो क्षण

जीत के उस मौक़े के ब्यौरा देते हुए अभिनव के पिता ने कहा कि अभिनव ने लगातार ही एक जैसा अच्छा प्रदर्शन किया.

उनके अनुसार जब अभिनव के अन्य प्रतिद्वन्द्वियों का प्रदर्शन कभी अच्छा कभी बुरा हो रहा था तब अभिनव ने एक जैसा प्रदर्शन किया और एक समय जब पहले और दूसरे स्थान में सिर्फ़ दशमलव एक अंक का अंतर था तब 10.8 अंक का अंतिम शॉट मारकर अभिनव ने स्वर्ण अपने नाम कर लिया.