सोमवार, 11 अगस्त, 2008 को 08:13 GMT तक के समाचार
बीजिंग ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीत कर इतिहास रचने वाले अभिनव बिंद्रा ने कहा है कि यह भारत के लिए महान क्षण है जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता.
दस मीटर एयर राइफ़ल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने के बाद अभिनव ने पत्रकारों से कहा, "मैंने कभी भी अपना ध्यान बँटने नहीं दिया. यही मेरी सफलता का मूल मंत्र है."
किसी व्यक्तिगत स्पर्धा में पहली बार भारत की ओर से स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ी बने अभिनव का कहना था, "आज मेरा दिन था. उम्मीद करता हूँ कि आने वाले दिन हमारे दूसरे साथियों के लिए महान साबित होंगे."
जीत से अभिभूत अभिनव से जब यह पूछा गया कि फ़ाइनल राउंड में निर्णायक अचूक निशाना साधने के बाद वो कैसा महसूस कर रहे थे तो उनका कहना था, "मैं इसे बता नहीं सकता. ये तय है कि अब दुनिया को भारत और उसकी ताकत में विश्वास करना पड़ेगा."
उन्होंने कहा कि भारत में नकारात्मक सोच खेलों के विकास में बड़ी बाधा है जिसे दूर कर लें तो सफलताएँ आती रहेंगी.
पिता भी खुश
चंडीगढ़ में अभिनव के पिता एएस बिंद्रा ने बीबीसी संवाददाता प्रतीक्षा घिल्डियाल से कहा, "अभिनव के गोल्ड जीतने की हमें इतनी खुशी हुई है जिसे व्यक्त कर पाना मुश्किल है. उसने उन लोगों को चुप कर दिया जो कहते थे कि अब अभिनव में वह दम नहीं रहा."
उन्होंने कहा कि उनके बेटे ने ओलंपिक तक का सफ़र कड़ी मेहनत और लगन से तय किया है और दोहरी सफलता हासिल की है. वह वर्ल्ड चैंपियन के साथ ओलंपिक चैंपियन भी बन गया है.
उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा के वक्त फ़िनलैंड और चीन के उसके प्रतिद्बंद्बियों ने भी अपनी-अपनी प्रतिभा दिखाई लेकिन उनमें ठहराव नहीं था. अंतिम शॉट पर अभिनव ने उन्हें 0.7 के अंतर से पछाड़ दिया.
पुरस्कार लेते वक्त अभिनव के संयत रहने के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, "संयत रहना तो उसका नेचर है. वह बहुत शांत रहता है. वह जानता है कि अपनी भावनाओं पर कैसे काबू रखा जाए. और यही उसका स्वभाव है जो इस स्तर पर चाहिए होता है. इसीलिए पुरस्कार लेते वक्त वह इतना संयत था."
उन्होंने एक निजी समाचार चैनल से कहा, "अभिनव बचपन से ही बंदूकों से खेलता था. जब वो पाँच साल का था तभी से अचूक निशाना लगाता रहा है."
एएस बिंद्रा बचपन की एक घटना की ओर इशारा करते हुए कहते हैं, "वो अपनी आया को बैठा कर उनके सिर पर रंग भरा हुआ गुब्बारा रखता था और उस पर अचूक निशाना लगाता था. उस समय वो पाँच साल का था. तभी मैंने उसकी टैलेंट को पहचान लिया."
उन्होंने कहा कि ये सिर्फ़ उनके बेटे की जीत नहीं है बल्कि पूरे देश की जीत है और यह समय जश्न मनाने का है.