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मंगलवार, 12 अगस्त, 2008 को 04:27 GMT तक के समाचार

शालिनी जोशी
देहरादून से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

जो कहा वो कर दिखाया....

अभिनव बिंद्रा की जीत से यूँ तो पूरा देश ही उल्लास और उत्सव के माहौल में डूबा है लेकिन देहरादून के लिए अभिनव की ये अभूतपूर्व सफलता कुछ ख़ास ख़ुशी लेकर आई है. अभिनव देहरादून में पैदा हुए और उनकी स्कूल की शिक्षा भी यहीं से हुई.

देहरादून के मशहूर रिवरडेल स्कूल में अभिनव ने साढ़े तीन साल की नन्ही सी उम्र में दाख़िला लिया था और पाँचवीं तक की पढ़ाई यहीं से की थी. इसके बाद उन्होंने देहरादून के ही मशहूर दून स्कूल में तीन साल पढ़ाई की और फिर चंड़ीगढ़ चले गए.

अभिनव ने अपने स्कूल से वादा किया था कि वो गोल्ड मेडल जीतकर आएंगे. उन्होंने अपना वादा पूरा कर दिखाया.

और अब उनके स्कूल के साथ-साथ पूरा देहरादून शहर अपने लाडले का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है.

ये एक सुखद संयोग ही था कि सोमवार की सुबह अभिनव के मुक़ाबले से पहले उनके इस बचपन के स्कूल में बाक़ायदा प्रार्थना की गई थी.

बच्चों ने अभिनव की कामयाबी के लिए दुआएं की थीं. स्कूल में जैसे ही ख़बर आई कि अभिनव ने दस मीटर एयर राइफ़ल के इवेंट में भारत का झंडा ऊँचा किया है तो सब ख़ुशी से उछल पड़े और पूरा स्कूल - 'हिप हिप हुर्रे...' के शोर में डूब गया.

स्कूल के हेड ब्वॉय नमन जौली ने कहा, "हमने उनके लिए प्रार्थना की थी. और हमारी प्रार्थना सफल रही. हम आगे भी उनके लिए प्रार्थना करेंगे कि वो और गोल्ड मेडल जीतें और आगे भी देश का नाम रोशन करें."

स्कूल की ही एक और छात्रा आद्या ने कहा, "मुझे गर्व है कि अभिनव मेरे स्कूल में पढ़े हैं. पहले तो इतना एक्साइटमेंट हो रहा था कि क्या होगा? फिर जब मैडम ने बताया तो पूरी क्लास हिप हिप हुर्रे चिल्लाने लगी."

'होनहार छात्र थे अभिनव'

स्कूल की प्रिंसिपल सुरजीत अहलूवालिया को अपने इस होनहार छात्र की उपलब्धि पर गर्व है. अभिनव के बारे में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सुरजीत अहलूवालिया का गला भर आया.

उन्होंने कहा, "मुझे पता था कि एक दिन अभिनव देश का नाम रोशन करेगा. उसमें बचपन से ही कुछ कर गुज़रने का जज़्बा नज़र आता था."

वे कहती हैं,"ये एक ऐतिहासिक दिन है मेरे स्कूल के लिए और पूरे देश के लिए. एक खास बात ये है कि एक बहुत अच्छे इंसान ने ये कामयाबी हासिल की है. भगवान ऐसे और बच्चे देश को दे."

अभिनव के देहरादून स्थित आवास में कर्मचारी सुरेंद्र कुमार की आंखें इस उपलब्धि पर छलछला आईँ. उन्होंने कहा, "हमने उन्हें बचपन में खेलते पढ़ते देखा है. वो निशानेबाज़ी के ऐसे शौकीन थे कि कभी बल्ब पर, कभी चिड़िया पर और कभी हमारे सिर पर बोतलें रखवाकर निशाने लगाते थे."

रिवरडेल स्कूल में उनकी क्लास टीचर रहीं सुनीता नौटियाल अपने पूर्व छात्र की महान उपलब्धि पर गदगद हैं.

उनका कहना है, "इससे बड़ा दिन कोई आ ही नहीं सकता. वो हमेशा अव्वल आता था. सात साल वो हमारे स्कूल में रहा. पांचवीं में मैं उनकी क्लास टीचर थी. वो हेड ब्वॉय था. और उसके बारे में कुछ कहना सूरज को दीपक दिखाने जैसा है."

सुनीता कहती हैं, "मैं ऐसा इसलिए नहीं कह रही कि उसने गोल्ड मेडल जीत लिया है लेकिन वास्तव में उसकी अच्छाई उसके गुण सब उसके चेहरे पर झलकते हैं. बहुत अनुशासित था वो. और उसकी वाइब्रेशन ही ऐसी थी कि कोई उससे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता था."

अभिनव पढ़ाई में अव्वल रहने के साथ-साथ संगीत और नाटक में भी आगे रहते थे.

अभिनव के सहपाठी और शूटिंग में भी उनके साथी रहे राष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज़ मयंक मारवाह अपने दोस्त की कामयाबी पर फूले नहीं समा रहे हैं.

देहरादून में अपना शूटिंग इंन्स्टीट्यूट चला रहे मयंक का कहना है, "इससे ज़बर्दस्त मनोबल बढ़ेगा और निशानेबाज़ी में उभरते खिलाड़ियों को प्रेरणा, हिम्मत और मौका सब मिलेंगें. ये सिर्फ अभिनव की जीत नहीं खेल और सभी खिलाड़ियों की जीत है."