शनिवार, 12 जुलाई, 2008 को 08:12 GMT तक के समाचार
चार माह से भारतीय हॉकी फ़ेडरेशन के तकनीकी सलाहकार रिक चार्ल्सवर्थ ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है और ऑस्ट्रेलिया लौट गए हैं.
समाचार एजेंसियों से फ़ेडरेशन के महासचिव रणधीर सिंह ने कहा, "रिक ने हमें लिखा है कि वे आगे काम नहीं करना चाहते."
फ़ेडरेशन को भंग करने के बाद बनाई गई समिति के मुखिया असलम शेर ख़ान ने कहा कि भारत में हॉकी को चलाने के तौर-तरीक़ों से चार्ल्सवर्थ ख़ुश नहीं थे.
उन्होंने कहा कि चार्ल्सवर्थ इस बात की शिकायत करते थे कि उन्हें बताया नहीं गया है कि उन्हें क्या करना है.
हालाँकि समाचार माध्यमों में चार्ल्सवर्थ के हवाले से ये भी कहा गया है कि वे अपनी बीमार माँ की देखरेख के लिए ऑस्ट्रेलिया गए हैं.
ख़ान ने कहा, "वे भारतीय कार्यप्रणाली से ख़ुश नहीं थे और उन्होंने इस्तीफ़ा देना बेहतर समझा. हमने उन्हें रोकने की कोशिश की लेकिन लगा कि वे अपना मन बना चुके थे."
'लटके हुए मुद्दे'
समाचार एजेंसी पीटीआई से ख़ान ने कहा, "चार्ल्सवर्थ के लिए समय परेशानी भरा रहा. करार से संबंधित मुद्दे अब तक लटके हुए हैं." ख़ान ने कहा कि चार्ल्सवर्थ ने अपना इस्तीफ़ा भारतीय खेल प्राधिकरण को सौंपा है क्योंकि उनका करार उसी के साथ है.
प्राधिकरण के एक अधिकारी ने इस्तीफ़े की पुष्टि की है और बताया कि अंतरराष्ट्रीय हॉकी संघ के अधिकारियों से बातचीत के बाद ही उनके त्यागपत्र पर फ़ैसला लिया जाएगा.
हॉकी दिग्गज चार्ल्सवर्थ को चार महीने पहले मार्च महीने में भारतीय हॉकी संघ ने अपना तकनीकी सलाहकार बनाया था.
उससे ठीक पहले आठ बार ओलंपिक चैंपियन रही भारतीय हॉकी टीम इस साल बीजिंग में होने वाले ओलंपिक के क्वालीफ़ाईंग मैच में हार गई थी.
अंतरराष्ट्रीय हॉकी संघ की पहल पर चार्ल्सवर्थ भारत में इस खेल को फिर से ज़िंदा करने के लिए तैयार हुए थे लेकिन प्रतीत होता है कि उन्हें भारत मे हॉकी की व्यवस्था नहीं भाई.
खलने वाली बातें
उन्होंने भारत में इस खेल की वर्तमान दुर्दशा के लिए अधिकारियों को ज़िम्मेदार ठहराया. एएफ़पी से चार्ल्सवर्थ ने कहा, "बदलाव लाने की प्रतिबद्धता होनी चाहिए. भारतीय हॉकी को प्रशासन, प्रबंधन और टीम के प्रशिक्षण में बहुत लंबा सफ़र तय करना है."
उन्होंने कहा, "अधिकारियों को किसी भी चीज़ से पहले समस्याओं को देखना चाहिए. सबसे पहले कमी का सामना करना चाहिए जो मुझे नज़र नहीं आता."
चार्ल्सवर्थ 1972 से लेकर 1988 के दौरान चार ओलंपिक में ऑस्ट्रेलियाई टीम की ओर से खेले थे. जब 1986 में ऑस्ट्रेलिया ने विश्व कप जीता को वे टीम के कप्तान थे.
अंतरराष्ट्रीय हॉकी से 1988 में संन्यास लेने वाले चार्ल्सवर्थ बहुआयामी प्रतिभा के धनी रहे हैं. पेशे से डॉक्टर चार्ल्सवर्थ ने हॉकी के साथ ही पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट भी खेला. चार्ल्सवर्थ 1993 तक दस साल ऑस्ट्रेलिया की संसद के सदस्य भी रहे हैं.
संन्यास लेने के बाद उन्होंने अपने देश की महिला हॉकी टीम के प्रशिक्षण का काम हाथ में लिया और उसे कुछ ही समय में दुनिया की सबसे शानदार टीमों में बदल लिया.